शुक्रवार, 5 मई 2017

शे 'र

काम करने का मन नहीं करता
मेरे मन में तो हैं मन की बातें .
मैं तो जुमलों में बात करता हूँ
वो पकड़ बैठे हैं मन की बातें .


मैं सलीके से चला हूँ, इसलिए काबू में है
वरना अपना दिल उछलता हर घडी है जोर से .
देखकर हँसता किसी को,साथ में रहता भी है 
और छुप छुप के किसी को देखता है गौर से .



दस बीस बरस उम्र अगर कम रही होती 
छुप छुप के देखती वो हमें रात को रोती
दिन भर ना देखने से कभी दिल भरा करता 
सपने में हमें देखती जब रात को सोती .


ये रात क़यामत है,बरसात क़यामत है 
तुम साथ में हो मेरे, ये साथ क़यामत है.
वैसे तो मुझे तुमसे ना कोई शिकायत है 
होठों में जो हंसती हो ये बात क़यामत है .


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