रविवार, 14 मई 2017

जो बात दिल से लिखोगे वो दिल में जायेगी, 
दिमाग छूती हुयी दिल में उतर जायेगी | 
दिमागदारों से ज्यादा ना दिल की बात कहो,
दिलों की बात है, दिल से ही सुनी जायेगी |



परदे पर बाहुबली देख, जनता बैठी खुश होती है  
सरहद पर मरता फौजी है,बेवा परदे में रोती है. 
जो एक शीश के बदले में दस शीश काटने वाले थे  
अब उनका नेकर गीला है ,अब उनकी पीली धोती है .


इसीलिए खामोश रहा मैं कुछ ना बोला
चौराहे पर खडा हुआ जो बोल रहा है |
उसका नहीं भरोसा जाने किधर चले,वो
सारे रस्ते देख रहा है, तौल रहा है |

जब तक ए सी में था मौसम रहा सुहाना
अब गरमी में गरम बात वो बोल रहा है |
पहले तो मीठी बातें थीं हाँ जी वाली,
जाने जहर की पुड़ियाँ अब क्यों खोल रहा है ?

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