मंगलवार, 9 मई 2017

मेरठ में क्रान्ति दिवस




'आजादी है जिम्मेदारी, इसमें सबकी हिस्सेदारी,
इसको  सबने  लडकर पाया, खैरात नही ये सरकारी.

हम और लड़ेंगे जीतेंगे संघर्ष नहीं अब कम होगा 
जब तक आजादी में सबका हिस्सा ना बिलकुल सम होगा.'-------- अमरनाथ 'मधुर' 
 10 मई 1857 के स्वतंत्रता सेनानियों की याद में मेरठ बार ऐसोशिएसन, ओल इंडिया लायर्स यूनियन मेरठ और जनवादी लेखक संघ की मेरठ ईकाई द्वारा आज दि 09-05-2107 को मेरठ बार एसोसिएशन के सभागार में एक विचार गोष्ठी और कवि  सम्मलेन का आयोजन किया गया।इसकी अध्यक्षता एडवोकेट श्री तौफीक अहमद खान  तथा संचालन जलेस के जिला सचिव श्री मुनेश त्यागी ने किया ।श्री के डी शर्मा इतिहासकार ने स्वतंत्रता से जुड़े अछूते पहलुओं की जानकारी दी।

   10 मई 1857की क्रांति अचानक नही थी बल्कि आजादी के लिए एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा थी जिसके लिए चार साल पहले से तैयारी चल रही थी जिसमें बहादुरशाह जफर, नाना साहिब, अजीमुल्ला खान, झांसी की महारानी लक्छमीबाई, बेगम हजरत महल, वीर कुंवर सिंह, मौलवी  अहमद शाह, बेगम हजरत महल के प्रधान मंत्री राजा बालकृष्ण सिंह, तातिया टोपे,वीर  कुंवर सिंह  आदि  नेता शामिल थे.
इसके लिए फ्रांस, इटली, रूस, क्रीमिया, इरान आदि देशों से सम्पर्क किया गया .इस महासंग्राम में काफी बडे पैमाने पर किसानों, मजदूरों, जनजातियों, कारीगरों, राजा रानियों, नवाबों बेगमों ने भाग लिया था.
इसकी हार का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि यह हमारी अंदरूनी झगडों और हमारे राजाओं, सामंतों और नवाबों द्वारा क्रांति के साथ की गई गद्दारी थी|


श्री जब्बार अहमद खान ऐडवोकेट ने कहा यह सही मायनों में हमारा राष्ट्रीय पर्व है जिसमें जिसमें हमारी जनता की बहुत बडी भागेदारी थी.
जनवादी लेखक संघ के जिला सचिव मुनेश त्यागी ने कहा कि इस क्रांति की सबसे बड़ी विरासत हिंदू मुस्लिम एकता थी जिसे बाद में अंग्रेजों ने योजनाबद्ध तरीके से षडयंत्र रचकर तोड़ दिया और हिन्दुस्तान पर अपना खूनी शिकंजा कस दिया| 

इस अवसर पर हुई कवि गोष्ठी में वरिष्ठ कवि रामगोपाल भारतीय ने कुछ यूं कहा,,,,,
अब चेहरों के दाग छुपाने की खातिर,
आइनों में नुक्स निकाले जायेंगे,
अमरनाथ 'मधुर' ने आजादी के बारे में  कुछ यूं बयां किया ,,,,,,
'आजादी है जिम्मेदारी, इसमें सबकी हिस्सेदारी,
इसको  सबने  लडकर पाया, खैरात नही ये सरकारी.

हम और लड़ेंगे जीतेंगे संघर्ष नहीं अब कम होगा 
जब तक आजादी में सबका हिस्सा ना बिलकुल सम होगा.'

ब्रजपाल सिंह ब्रज ने कहा,,,,,
जिन शहीदों ने सींचा ये मां का चमन,
उन शहीदों को है कोटि कोटि नमन, 

 युवा कवि  नितीश राजपूत ने देशभक्ति से ओत प्रोत कविताएँ सुनाकर श्रोताओं का आशीर्वाद प्राप्त किया |सभागार में खचाखच भरे श्रोताओं ने तालिया बजाकर कवियों का हौसला बढ़ाया।

सभा में मौ आरिफ, रंजना, सत्यबीर सिंह, उदयवीर राणा, इंद्रपाल सिंह मलिक, तरूण ढाका, रामोतार मित्तल, अश्रफुल्ला खां, नैपाल सागर, हेमचंद निमेष, करणवीर मलिक, अश्विनी सिवाच, ब्रजवीर मालिक ,आदि आदि अधिवक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किये  लिया, विचार गोष्ठी का संचालन एडवोकेट श्री राजकुमार गुर्जर, व कवि गोष्ठी का संचालन श्री मुनेश त्यागी ऐडवोकेट ने किया |
,,,,,,,,,मुनेश त्यागी
जिला सचिव, मेऱठ.



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