सोमवार, 12 जून 2017

 जिसका मुँह ऐसा है जैसा दिखता दरियाई घोड़ा है, 
वो चतुर कहे शैतान कहे जो भी बोले वो थोड़ा है | 
हंगामें जैसी बात कहाँ इसमें दिखलाई देती है ?
जिस परम्परा का वारिस वो, उससे ही खुद को जोड़ा है |

करें उपवास तो जनता उसे उपहास कहती है 
हमें गांधी नहीं वो गोडसे का ख़ास कहती है |
हमारे पास लाठी है, हमारे पास टोपी है 
लंगोटी ना सही नेकर में हमारे पास रहती है ?


कविता लिख कर पोस्ट की रहे शान्ति धाम 
दोस्त उठाकर ले गए मचा दिया कोहराम |

जितना सादा मेरा मिजाज रहा
दोस्त उतना दिलों पे राज रहा |



मेरे बच्चे फुटपाथों से अदला-बदली कर आए हैं 
चंद खिलौने दे आए हैं, ढेरों खुशियां घर लाए हैं--------- pratapsomvanshi



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