गुरुवार, 31 अगस्त 2017

जीने को आधार चाहिए,मरने को आधार चाहिए 
अटकी रहती साँस अधर में,हमको नहीं उधार चाहिये |


काली सफ़ेद दाडी वाले दोनों जेलों के अन्दर हैं, 
जो बाहर उछल कूद करते उनका भी आना नंबर है |
ना वक्त बदलते देर लगे बडबोलो सुन लो कान खोल 
इस माया से इस काया कब रखता मोह कलंदर है |





सुना है पेड़ गिरता है तो अपने रुख को गिरता है
बड़ा हो पेड़ तो गिरने से धरती हिल ही जाती है |
मगर सच ये बड़े पेड़ों के होते खोखले तन हैं
जो उनके साए में उनको सजा भी मिल ही जाती है |


नजर बदली ना हमने अब तलक बदला नजरिया है 
वो होंगे और जो मौसम बदलने पर बदल जाते |
सितमगर को सितमगर कह रहे हैं, कहते आये हैं 
हमें समझाने वाले क्यूँ नहीं उठकर निकल जाते |


मैदान में हूँ जंग से मोड़ा नहीं है मुंह 
तलवार छोड़ बैठे वो जो थे अगल बगल |
दुनिया बदलने जो चले थे साथ में मेरे 
दुनिया नहीं बदली मगर वो खुद गये बदल |



हिन्दू मुस्लिम रहे,दोस्त भी हम रहे,
और सितमगर के हम पर सितम भी रहे | 
जान देने की जब भी जरुरत पड़ी, 
आगे तुम कम रहे ना कभी हम रहे |




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