शुक्रवार, 8 सितंबर 2017

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की नृशंस हत्या के विरोध में प्रदर्शन



जनवादी लेखक संघ मेरठ की जिला इकाई ने आज वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की नृशंस हत्या के विरोध में प्रदर्शन और एक श्रध्दांजलि सभा का आयोजन कमिशनरी पार्क मेरठ में किया जिसमें सरदार गुरचरण सिंह ने कहा कि यह सच्चाई की हत्या है और हत्यारी ताकतें चुप्पी का माहौल बनाये रखना चाहती हैं. सभा में सभी लोग "हम सब गौरी लंकेश हैं" के पोस्टर लिये हुए थे. 
डा जी आर मलिक ने कहा कि सरकार हत्यारों को पकडने और पहचानने के लिए न्यायिक जांच कराये. उन्होंने कहा कि गौरी लंकेश की हत्या प्रेस की आजादी और लिखने, पढने, बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गम्भीर हमला है, यह असहिष्णुता और असंवेदनशीलता व भय का दौर है.
मेजर हिमांशु ने कहा कि हत्यारी सोच एक महिला, पत्रकार और बुध्दिजीवी को मारने में कामयाब हो गये हैं, निर्दोष लोगों की हत्या करके यह व्यवस्था समाज को आतंकवाद, नक्सलवाद और हथियारबंद प्रतिरोध की तरफ ले जा रही है.
अध्यक्षता कर रहे अब्दुल जब्बार खान ऐडवोकेट ने कहा कि यह हत्या निंदकों पर प्रहार है, यह डराने की मुहीम है, हत्यारों को पकडा नही जा रहा है. यह मिली जुली संस्कृति और विरासत पर हमला है. यह विचारों की हत्या है और यह नाथुराम गोडसे की विचारधारा है.
जनवादी लेखक संघ के जिला सचिव मुनेश त्यागी ने कहा कि हम इस हत्यारी मुहीम का मुकाबला करेंगे. हम चुप नही बैठेंगे. ये कट्टरपंथी हत्यारे निडरता, आजाद सोच, और सच की आवाज को दबा नही सकते. हम संगठित और एकजुट होकर बोलने की आजादी और प्रेस की आजादी की हिफाजत करेंगे. हम झूठ का पर्दाफ़ाश करेंगे.
एआईएलयू के प्रदेश सचिव ब्रजवीर सिंह ने कहा कि गरीबों,शोषितों और दबे कुचले लोगों की आवाज उठाने वालों की हत्या की जा रही है. ये जालिम ताकतें सच की आवाज को दबाने पर तुली हुई हैं,
राजकुमार गुर्जर ऐडवोकेट ने कहा कि यह असहमति की आवाज और आजादी पर बर्बर हमला है, आज की सत्ता और कट्टरपंथी ताकतें सच से ज्यादा भयभीत हैं अतः बोलने लिखने वालों की हत्या पर उतर आई हैं.
जी पी सलौनिया ऐडवोकेट ने कहा कि यह लोकतंत्र और संविधान की हत्या है, लोगों को विभाजित किया जा रहा है, डराया धमकाया और दबाया जा रहा है. अब हमारा एकजुट होने का वक्त है.
ब्रजपाल सिंह ब्रज ने कि यह लोकतंत्र, भाईचारे और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गम्भीर आक्रमण है यह मतभिन्नता की आजादी का खुल्लमखुल्ला उलंघन है.
मधुर ने अपनी बात कुछ यूं व्यक्त की,,,,
पता करो तालिबानों का, घर ढूंढो शैतानों का,
छिपे हुए किस मांद में बैठे खोले राज ठिकानों का,
नही कलम के वीर सिपाही बंदूकों से डरते हैं,
मरते हैं एक बार बहादुर, बुजदिल रोज ही मरते हैं.
सभा में शिक्षा मित्र संयुक्त मोर्चा के संयोजक धर्मपाल शर्मा, और आसिफ अली अंसारी ने भी विचार व्यक्त किये. सभा में बोलते हुए शहजाद अहमद ऐडवोकेट ने कहा कि अफसोस की बात यह है कि जनता के मुद्दों को उठाने वाली आवाज को कुतिया बता रहे हैं, और प्रधानमंत्री अपने ट्रोल्स को सपोर्ट कर रहे हैं,
सभा में कर्ण सिंह सैनी, जितेंद्र पांचाल, सुभाष, प्रदीप कुमार, सलीम अख्तर सिद्दीक़ी, तौसीफ अली खान आदि महिलाओं और पुरूषों ने हिस्सेदारी की. सभा की अध्यक्षता अब्दुल जब्बार खान और संचालन मुनेश त्यागी ने किया.
,,,,,,,मुनेश त्यागी.

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