मंगलवार, 10 अक्तूबर 2017

हमने जबड़े तोड़ दिए हैं हिटलर से हैवानों के,



हमने  जबड़े  तोड़ दिए हैं हिटलर से शैतानों के ,
हमने घर में घुस कर मारे कठमुल्ला शैतानों के | 
नाम हमारा सुनकर नेकर तक ढीला हो जाता है, 
हमसे मत टकराना हम हैं लाल मजूर किसानों के |





वीर सपूतों के शव गत्तों में आये 
ना कुछ बोले राष्ट्र भक्त ना शर्माए |
गद्दारों ने ऐसा शौर मचाया है 
जैसे कोई चोर चोर खुद चिल्लाए |
शहीद सैनिक सपूतों के शवों को गत्ते के कार्टून्स ही मयस्सर?
कपूतों की संपत्ति 16 सौ गुना बढ़ी ?! मालामाल हुए !? क्याये शहादतकामज़ाकनह

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