शनिवार, 14 अक्तूबर 2017

मुझे मेरे हाल पे छोड़ दे ,मेरे हमदम ! मेरे हमनवां !

मेरे हमदम ! मेरे हमनवां !, अभी मैं जवां, अभी तू जवां
मुझे मेरे हाल पे छोड़ दे , ना बना ग़मों की दास्ताँ |............मेरे हमदम ! मेरे हमनवां !


तेरे साथ तो जो भी गुजर गया
वो सफ़र बहुत हसीन था  |
मैं रही सदा तेरा आसमाँ
तू मेरी महकती जमीन था |

अभी फूल रंग बिखेरता मगर आ गयी है रुत खिंजा |
मुझे मेरे हाल पे छोड़ दे ,मेरे हमदम ! मेरे हमनवां !

वो घुमावदार रास्ते
तेरे खेत पर जो निकल रहे |
मुझे आ रहे हैं याद वो
जहां साथ हम थे कल रहे |

वो गुजर गया मेरा कल था जो,वो ना आज है ना अब यहाँ |
मुझे मेरे हाल पे छोड़ दे ,मेरे हमदम ! मेरे हमनवां !

तेरी जिंदगी है बहुत बड़ी
उसे देख उसको संवार ले |
मैं नहीं तेरे नसीब में
किसी और को ही पुकार ले |

तू बना किसी को भी हमसफ़र अभी हैं बहुत से कारवां
मुझे मेरे हाल पे छोड़ दे ,मेरे हमदम ! मेरे हमनवां !



















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