सोमवार, 16 अक्तूबर 2017

चौराहे पर खड़ी खड़ी, जनता हुई अधीर 
झोला लेकर आ तो जा, धोखेबाज फ़कीर |



इलाहाबाद आबाद है, गुरुदास भरपूर |
हवाबाज का दोनों ने, तोड़ा खूब गरूर ||




किस ढब रहूँ मैं चैन से रहने नहीं देते 
कुछ भक्त इधर हैं तो हैं कम्बक्त उधर भी |




जब बात की तो मन की की,कभी चाय की कभी गाय की |
कभी बात वो भी बोल दो, जो जय छुपाते आय की |






जिस दिन भक्त नहीं आते हैं हम मन मारे सो जाते हैं | जब तक मिले नहीं सौ गाली हम खाना कम खा पाते हैं |

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