गुरुवार, 19 अक्तूबर 2017

कई घरों के चिराग गुल कर, जला रहे हो चिराग लाखों
ये किस की खातिर है जगमगाहट,ज़रा हमें ये जबाब दे दो |
हमारे बस में नहीं रहा अब, जो झूठी बातों से दें दिलासा
बिलखती माँओं को लाल दे दो, बहु को उसका सुहाग दे  दो ||




दो दो लाख का सोना लेने वाले बे आधार रहे |
हम मुट्ठी भर भात माँगते, मिला ना बिन आहार रहे| 
क्या आधार हमारा होता ? जब सरकार निकम्मी है 
जो सरकार निकम्मी साबित ऐसी ना सरकार रहे |

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