रविवार, 22 अक्तूबर 2017

कैसे हैं ये लोग कह रहे अब टीपू हत्यारा है
जिनकी खातिर उसने चुनकर अंग्रेजों को मारा है |
वो शेरे मैसूर कांपते थे जिससे दुश्मन थर थर 
जो तलवार नहीं छोड़ा था युद्ध भूमि में भी मरकर |
आज अगर ज़िंदा होता गद्दार दिखाई ना देते
अंग्रेजों के पिट्ठू बन सरदार सफाई ना देते |
मुर्दा है वो कौम शहीदों को जो मान नहीं देती
और कौम के गद्दारों को भी पहचान नहीं लेती |
ऐसी कौम बहुत दिन तक रह सकती है आजाद नहीं
अपने हाथों ये खुद को ही कर ना ले बरबाद कहीं |


0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें