सोमवार, 9 अक्तूबर 2017

नाम में क्या रखा है ?


















26-09-2017 को एक ये पोस्ट लिखी थी 'बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के नाम से हिन्दू और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के नाम से मुस्लिम हटाया जाना चाहियें | धर्मनिरपेक्ष लोगों को ये धार्मिक नाम सहज नहीं लगते हैं वैसे भी यदा कदा जैसे कारनामें यूनिवर्सिटियों में हो जाते हैं उससे धर्म वालों का धर्म कलंकित ही होता है|
यूँ इन दोनों युनिवर्सिटियों का शानदार इतिहास है| दोनों से अनेक हस्तियाँ पढ़कर अपनी ऊँचाई तक पहुंची हैं |'
भक्त इस पर बहुत नाराज हो गए थे बोले ' हिन्दुस्तान में हिन्दू शब्द पर ही बैन लगा देना चाहिए, हिन्दू क्यूँ रहे ?' लेकिन अब भक्त क्या कहेंगे जब यू जी सी के एक पैनल ने ऐसी ही सिफारिश मानव संसाधन मंत्रालय से की है ? इस सिपारिश पर जीतनी जल्दी अमल हो उतना अच्छा रहेगा |
इंडियन एक्सप्रेस ने अपने पहले पन्ने पर ही यूजीसी के एक पैनल की सिफ़ारिश को छापा है, जिसने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से मुस्लिम और बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी से हिन्दू शब्द हटाने को कहा है. इस पैनल ने भारत के धर्मनिरपेक्ष कलेवर का हवाला देते हुए यह सलाह दी है.
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में ऑडिट के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश पर यूजीसी द्वारा गठित एक समिति ने यह सिफ़ारिश की है.
इस समिति का गठन 25 अप्रैल को हुआ था. यूजीसी ने ऐसी पांच समितियों का गठन देश के 10 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अनियमितता के दावों की जांच के लिए किया था. हालांकि एएमयू की जांच समिति के दायरे में बीएचयू नहीं थी, लेकिन इस मामले में बीएचयू का भी ज़िक्र किया गया है.
आजादी से पहले ये दोनों विश्वविद्यालय लोगों के चंदे से चलते थे लेकिन आजादी के बाद ये सरकार के अनुदान से चल रहे हैं | अत: अब इनके नाम में हिन्दू या मुस्लिम क्यूँ होना चाहिए ? बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय का नाम बनारस राष्ट्रीय विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम अलीगढ़ नेशनल यूनिवर्सिटी रखने में क्या परेशानी है ? लेकिन सरकार ने यू जी सी के नाम बदलने के प्रस्ताव को सिरे से नकार दिया है | उधर लोगों का भी कहना है कि यदि इनके नाम में बदलाव किया गया तो यह संविधान का उल्लंघन होगा |उनका ये भी कहना है कि ये इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने जैसा है क्यूंकि नाम के पीछे उस संस्था का इतिहास और पहचान जुडी है जो नाम बदलने से मिट जायेगी | मतलब कि अब से पहले जो विभिन्न विश्वविद्यालयों के नाम बदले गए उनका कोई नाम या पहचान ना थी ? तब किसी को ये ख्याल ना आया कि क्यूँ इनका नाम नेस्तनाबूद किया जा रहा है ? मेरठ यूनिवर्सिटी का नाम चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, रोहतक यूनिवर्सिटी का नाम महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी ,आगरा यूनिवर्सिटी का नाम अम्बेडकर यूनिवर्सिटी रखकर क्या उनकी पहचान को नहीं मिटाया गया है ? क्या मेरठ और आगरा नाम कम महत्वपूर्ण थे जो उनके नाम में नामोसी होती थी ? हिन्दू और मुस्लिम शब्द आज जब साम्प्रदायिकता के प्रतीक हो गए हैं और धर्म के द्योतक तो वे हैं ही तो एक धर्म निरपेक्ष देश में उन नामों से मुक्ति पाने में हिचक कैसी है ? लेकिन ये सुझाव या सिपारिश ऐसे वक्त में आई है जो इन विचारों के लिए बिलकुल भी अनूकूल नहीं है | इसीलिए सरकार ने नाम परिवर्तन के इस सुझाव को फ़ौरन नकार दिया है | हाँ अगर ये सिपारिश होती कि विश्वविद्यालयों का नाम वीर सावरकर विश्विद्यालय या नाथूराम गोडसे विश्वविद्यालय रखा जाए तो सरकार उस पर सहर्ष कार्यवाही करती या कोई गौसेवा विश्वविद्यालय, पतंजलि योग विश्वविद्यालय या हर हर गंगें विश्वद्यालय जैसा नाम सुझाता तो उस पर भी विचार किया जाता लेकिन किसी ने ऐसा कुछ नहीं किया है इसलिए सरकार भी कुछ नहीं करने वाली है |अब कोई जवाहरलाल नेहरू का ज़माना थोड़े ही है जो शिक्षा को धर्म के आडम्बरों से मुक्त रखा जाए | अब तो धार्मिक और कर्मकांड, तंत्र मन्त्र षडयंत्र सब पढाये जाने हैं | मेडिकल के नाम पर टोना टोटका, झाड फूंक, गंडे ताबीज, गौमूत्र ,ऊंटनी का पेशाब, चील के पंख ,कबूतर की बीट, सूअर का दांत, बकरे की आंत, रीछ के नाखून, गधी का दूध सबका अनुसंधान और अध्ययन अध्यापन किया जाना है | ऐसे में विश्वविद्यालयों के नाम से हिन्दू और मुस्लिम नाम हटाने की बात करना बड़ी हिमाकत है और ऐसी हिमाकत करने वाला कोई नास्तिक या कम्युनिष्ट ही हो सकता है | इसमें आश्चर्य की कोई बात भी नहीं है |जितनी भी पढ़े लिखे लोगों की ऊंची जगहें हैं उन सब जगह ये लोग जमें बैठे हैं | ऐसे लोगों ने पढ़ने लिखने के अलावा कभी कुछ काम तो किया नहीं है अत:उन्हें क्या पता कि धर्म और संस्कृति बचाने के लिए क्या क्या पापड बेलने पड़ते हैं | कभी गाय बचानी पड़ती है कभी गंगा बचाने का नाटक करना पड़ता है हालाकि ये अलग बात है कि कुछ ख़ास बचता नहीं है | गाय अब भी चौराहे पर जुगाली करती मिल जाती है और गंगा, गंगा ढाबे पर आधी रात को जीमती हुयीमिलती है | ये सब इन छुपे हुए लाल बुझक्कडो की सालों की साजिश का फल है लेकिन अब जल्द ही इन्हें खोज निकाला जाएगा और इन सबको एक एक कर उसी राह पर भेजा जाएगा जिस पर इन्हें भेजा जाना चाहिए | तब तक के लिए सभी भक गणों से जय राम जी की |

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