सोमवार, 25 दिसंबर 2017

'चंगेज खान और उसका धर्म'


चंगेज खान एक विचारधारा शमाबाद को मनाता था जिसे धर्म कहा जा सकता है |शमावाद में नीले आसमान की पूजा होती है | मृत्युपर्यन्त चंगेज खान शमाबाद पर ही टिका रहा |जब भी वह परेशानी में होता वह नीले आसमान की तरफ देखता था | सही मायने में वह प्रकृति पूजक था और किसी धर्म के प्रति विशेष आग्रही नहीं था | चंगेज खान को ये कभी समझ में नहीं आता था कि किसी को उसके धार्मिक विश्वाशों के कारण क्यों मारा जाए ?
उसके उत्तराधिकारी जिस देश में बसे उनहोंने उसी देश का धर्म ग्रहण कर लिया |चंगेज की तरह वे भी धर्म के सम्बन्ध में बहुत उदार रहे |
इतिहास में जितना झूठ चंगेज खान के बारे में लिखा गया है उतना शायद किसी के बारे में नहीं लिखा गया है | इसका कारण शायद यही है कि उसने हर धर्म, हर जाति और अनेक देशों को कुचल दिया | वो एक छोटे से घुमंतू कबीले में पैदा हुआ और अपनी सूझ बूझ और परिश्रम के बल पर दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य का संस्थापक बना |मंगोलों के इतिहास पर सबसे मौलिक क़िताब ‘ए सीक्रेट हिस्ट्री ऑफ़ मंगोल’ में इस घटना का ज़िक्र कुछ यूं है,---- ‘और फिर, जब तंबुओं में रहने वाली सारी जनजातियां एक ताकत के साए तले आ गयीं, उस साल ओनोंन नदी के किनारे सफेद झंडे के नीचे उन्होंने चंगेज यानी तिमुचिन को कैगन के ख़िताब से नवाज़ दिया.’ यही कैगन बिगड़कर बाद में ‘खान’ लफ्ज़ बन गया. और इस तरह तिमुचिन चंगेज खान कहलाया|'
उसकी क्रूरता के अनेक किस्से इतिहास की किताबों में दर्ज हैं, जो उतने ही सच हैं जो किसी भी विजेता के बारे में होते हैं | लेकिन उसकी उदारता, सादगी,भाईचारे और दूरदर्शिता के बारे में चुप्पी साध ली जाती है| वह अपने कबीले के साधारण लोगों के साथ सादा भोजन करता था और सादा जीवन जीता था |
चंगेज खान ने कुछ ऐसे काम किये जो आज की सरकारें भी नहीं कर पा रही हैं | उसने आदेश जारी किया कि जो भी आदमी नदी के बहते हुए जल को गंदा करेगा उसे दण्डित किया जाएगा | जो भी आदमी हरी घास के मैदानों को बरबाद करेगा उसे दण्डित किया जाएगा | वह अनपढ़ आदमी था लेकिन चीन में पहुँच पर जब उसे पढ़ाई लिखाई के बारे में पता चला तो उसे फ़ौरन उसका महत्व समझ में आ गया | उसने अपने सहायकों को तुरंत उसे सीखने का आदेश दिया |
दुनियाभर में जितने भी बड़े महाराजा, सुल्तान या बादशाह रहे उनके मरने के बाद भी मकबरों की शक्ल में उनके निशान बाकी रहे। ये मकबरे शायद इसलिए बनाए गए क्योंकि वो चाहते थे कि लोग उन्हें हमेशा याद रखें। लेकिन हैरत की बात है कि चंगेज खान ने अपने लिए एक अजीब वसीयत की थी। वो नहीं चाहता था कि उसके मरने के बाद उसका कोई निशान बाकी रहे। लिहाजा उसने अपने साथियों को आदेश दिया कि उसके मरने के बाद उसे किसी गुमनाम जगह पर दफनाया जाए।
वसीयत के मुताबिक ऐसा ही किया गया। सैनिकों ने उसे दफनाने के बाद उसकी कब्र पर करीब एक हजार घोड़ों को दौड़ाकर जमीन को इस तरह से बराबर कर दिया ताकि कोई निशान बाकी ना रहे। मंगोलिया के रहने वाले चंगेज खान की मौत के बाद आठ सदियां बीत चुकी हैं। इसे लेकर तमाम मिशन चलाए गए, लेकिन उसकी कब्र का पता नहीं चला। नेशनल जियोग्राफिक ने तो सैटेलाइट के जरिए उसकी कब्र तलाशने की कोशिश की थी। इसे वैली ऑफ खान प्रोजेक्ट का नाम दिया गया था।

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