सोमवार, 22 जनवरी 2018

नहीं माँगते नौजवान



रोटी, कपड़ा और मकान, नहीं माँगते नौजवान |
एक फिल्म से जोड़ रहे हैं अपना मान और अपमान ||
रोटी, कपड़ा और मकान, नहीं माँगते नौजवान ||

कुछ लोगों को मिली सुपारी फिल्म नहीं चलने देना 
तोड़ फोड़ करते रहना है, शामिल हो करणी सेना |
उधर मुनाफाखोर हुए खुश मुफ्त मिला प्रचार घना
मर भी जायें लोग यहाँ कुछ मगर मुनाफा हो दुगना |
इनकी काली करतूतों से शर्मिन्दा है हिन्दुस्तान |
एक फिल्म से जोड़ रहे हैं अपना मान और अपमान ||
रोटी, कपड़ा और मकान, नहीं माँगते नौजवान ||

किसने ये इतिहास लिखा जो वर्तमान को सटक रहा
जिसकी भूल भुलैयों में है पढ़ा लिखा भी भटक रहा |
ना इतिहास रोटियाँ देगा, मरभुक्कों के पेटों को
ये पागल करके छोड़ेगा अपने सारे बेटों को |
ये इतिहास नफरतों वाला नहीं चाहिए है श्रीमान |
एक फिल्म से जोड़ रहे हैं अपना मान और अपमान ||
रोटी, कपड़ा और मकान, नहीं माँगते नौजवान ||

प्यार करें तो नौजवान कहलाते हैं लव जेहादी
नफ़रत फैलाने वाले बन जाते यहाँ राष्ट्रवादी |
बेकारों को काम ना मिलता किस्मत में है बर्बादी 
बड़ी खुली एक जेल बन गयी आज मुल्क में आजादी |

दिल्ली के जंतर मंतर पर मूत्र पी रहा आज किसान |
एक फिल्म से जोड़ रहे हैं अपना मान और अपमान ||
रोटी, कपड़ा और मकान, नहीं माँगते नौजवान ||

किससे भविष्य बनेगा अपना औ किससे मिट जाएगा ?
आज देश के नौजवानों कौन तुम्हें समझायेगा ?
बाबा साहेब नहीं रहे, ना नेहरू,गांधी और सुभाष  
भगत सिंह आतंकवादी है ठप्पा लगा हुआ है ख़ास |

जुमलेबाज मिलेंगे सारे बढ़ कर एक से एक महान |
एक फिल्म से जोड़ रहे हैं अपना मान और अपमान ||
रोटी, कपड़ा और मकान, नहीं माँगते नौजवान ||

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