रविवार, 11 फ़रवरी 2018

कुछ लोगों को काम नहीं है,कुछ को मिलता दाम नहीं है |
कुछ का इतना बुरा हाल है,काम बहुत आराम नहीं है |

बिगड़ी हुई व्यवस्था सारी
और विवशता उसपे भारी |
भाषणबाजी पेल रही है
रोज चुनावों की तैयारी |

सैर सपाटा,भरे फर्राटा,घर रहता हुक्काम नहीं है |
कुछ लोगों को काम नहीं है .........

हाथ हमारे माला दे दी
कभी राष्ट्र की,कभी राम की |
लगा जुबां पे पाबंदी दी
बात करो ना कभी काम की |

भूख धूँप है दोपहरी की,दिखती जिसकी शाम नहीं है |
कुछ लोगों को काम नहीं है .........

अच्छा होता थके बदन को
मेहनत से मुक्ति मिल जाती|
और ढूँढते काम करों को
जीने की युक्ति मिल जाती |

मंजिल पे डेरा लग जाता, यूँ चलना अविराम नहीं है |
कुछ लोगों को काम नहीं है .........



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