गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

बाबरी मस्जिद और प्रिंस याकूब



प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तुसी  जी हाँ मुग़ल बादशाह बाबर के तथाकथित वंशज का यही नाम है | प्रिंस  याकूब का कहना है कि उनका डी एन ए बाबर का है इसलिए वो बाबर के वंशज है | उनका बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर  स्पष्ट कहना है कि 'वो बाबर के वारिस होने के नाते बाबरी मस्जिद की जमीन भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण  को देने को तैयार हैं | वहाँ राम मंदिर ही बनना चाहिए |'
उनका यह भी कहना है कि 'बाबर ने किसी हिन्दू मंदिर को नहीं तोडा है | बाबर ने अपनी वसीयत में हिन्दूओं की आस्था का मान रखने की नसीहत अपने वारिसों को दी है | मंदिर किसी कारिंदे ने तुड़वाया होगा बाबर उसके लिए कतई जिम्मेदार नहीं हैं |'

राम मंदिर बनेगा या नहीं बनेगा ये तो अभी भविष्य के गर्त में है ,बनना चाहिए या नहीं बनना चाहिए इस पर मुख्तलिफ विचार करने के लिए कोई तैयार ही नहीं है किन्तु बाबरी मस्जिद की जगह पर ही बनना चाहिए इस पर लेकर रोज सिर फुटैव्वल जारी है |
 बहरहाल ये मैच चलता रहना चाहिए क्यूँकि  ये क्रिकेट के मैच से भी ज्यादा रोमांचकारी और फायदेमंद है| इससे घोटालों और विफलताओं की तरफ भटक रही राजनीति मुख्यधारा में लौट आती है और पक्ष विपक्ष को इलैक्शन लड़ना आसान हो जाता है |
इस सम्बन्ध में  मेरे कुछ और सवाल हैं जो मैं इस देश के बुद्धिजीवियों और आम नागरिक से पूछना चाहता हूँ |ख़ास तौर से राष्ट्रवादियों से जिनको खुराक राममंदिर ,गौ रक्षा ,लव जेहाद जैसे टॉनिकों से ही मिलती है |
प्रिंस याकूब ने स्वयं को बाबर का वंशज बताते हुए मंदिर  के लिए जमीन देने की बात कही है| क्या वे बाबर के इस कथित वारिस का बाबर का वारिस होने के नाते और स्वयं बाबर का अयोध्या क्या देश की किसी भी जमीन पर मालिकाना हक़ माने को तैयार है ? क्यूंकि अगर मालिकाना हक़ नहीं मानेंगे तो उसके वारिसों को  दान करने का भी कोई हक़ नहीं हो सकता है |
क्या अयोध्या की विवादित भूमि और इमारत पर बाबर के वारिस का हक़ अगर मानते हैं तो क्या ल लाल  किले और ताजमहल पर भी उनका हक़ मानेंगे ?
वैसे प्रिंस याकूब ने कहा है कि 'वे राष्ट्रीय धरोहर हैं और वे एक देशभक्त हिन्दुस्तानी हैं इसलिए उन पर वो कोई अधिकार नहीं मानते हैं |' लेकिन देश में मुग़ल काल में निर्मित हुयी ऐसी बहुत सी इमारतें  हैं जो शायद राष्ट्रीय धरोहर ना हों तो क्या उनका मालिकाना हक़ बाबर के कथित वंशजों का माना जाना चाहिए ?
मंदिर समर्थक उछाल मार रहे हैं कि बाबर का वारिस बाबरी मस्जिद की जमीन छोड़ने को तैयार है तो दूसरा कोई उसमें अड़ंगे लगाने वाला कौन होता है ?
जब बाबर का वारिस कहता है कि बाबर ने ना मंदिर तोडा है ना मस्जिद बनायी है तो फिर वो किस प्रकार इस जगह पर अपना दावा कर सकता है ? क्या सिर्फ इसलिए कि बाबर ने इस मुल्क को जीत लिया था ?
लेकिन इससे उनका कोई अधिकार सदा सदा के लिए नहीं हो जाता है |उन्होंने जिनसे हिन्दुस्तान का तख्त छीना और उन्होंने जिनसे ये मुल्क छीना था उन सबकी दावेदारी है |अब कौन पहला मालिक है इसका फैसला तो कोई हकूमत या कोर्ट भी तय कर नहीं सकती है | इसलिए मालिकाना हक़ की मुकदमेंबाजी का कोई ख़ास मतलब नहीं है |अच्छा हो जन हित  को ध्यान में रखकर सरकार संसद से कोई कानून पास करा दे |जनता का सबसे ज्यादा हित किसमें है इसका फैसला कोर्ट से भी हो सकता है और दानिश्वरों की राय से भी |या इस देश के भूखे नगें आम जनों की रायसुमारी से भी किया जा सकता है |
प्रिंस याकूब आज बाबर के वारिस की हैसियत से अयोध्या कि विवादित जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए देना चाहते हैं | लेकिन वो बाबर के ही नहीं औरंगजेब के भी वंशज  हैं जिसके बारे में कहा जाता है कि उसने काशी विश्वनाथ का मंदिर और मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि मंदिर का विध्वंश  कर मस्जिद का निर्माण कराया था | ऐसे में क्या प्रिंस याकूब उन सबको मंदिर निर्माण के लिए दे सकते हैं ? क्या ये सब देने के वो कानूनी हकदार हैं ?
इसी के साथ ये भी सवाल है कि बाबर की वसीयत दिखाकर तो आप कह सकते हैं कि शहंशाह बाबर ने हिन्दूओं की भावनाओं और धार्मिक विश्वाशों का सम्मान करने का हुकुम अपने वारिसों को दिया था लेकिन औरंगजेब पर तो जबरिया धर्मांतरण का आरोप है | क्या वो औरंगजेब के कथित जुल्मों सितम के लिए भी माफी मागेंगे ? क्या वो कथित तौर पर जबरन मुसलमान बनाये गए  लोगों की घर वापसी कराएंगे ?
वो ऐसा कुछ नहीं कर सकते हैं | वो ज्यादा से ज्यादा इतना कर सकते हैं कि वो बाबर के मूल वतन फरगना लौट जाएँ और अपने को बाबर का वारिस सिद्ध कर बाबर की खानदानी रियासत  फरगाना पर अपना दावा ठोक  दें| | इस मुल्क में वो कहीं के प्रिंस व्रिंस नहीं हैं वो एक आम हिन्दुस्तानी हैं और उनकी हैसियत एक वोटर भर की है | इसलिए बाबर का वारिस होने पर भी बाबरी मस्जिद विवाद में उनकी राय कोई मायने नहीं रखती है |
आज बाबर का वंशज प्रकट हुआ है कल इब्राहिम लोदी, टीपू सुलतान, राणा प्रताप, शिवाजी, चन्द्रगुप्त,अशोक  जाने किस किस के वंशज आ खड़े होंगे और अगर सबने एक साथ अपने अपने मालिएकाना हक़ का  दावा पेश कर दिया तो फिर मुल्क  में महाभारत हो जाएगा | और हाँ महाभारत वाले भी तो आ सकते हैं| तो क्या अब देश में महाभारत ही होता रहेगा ? अरे यार चैन से बैठने दोगे या नहीं  यहां पहले ही बहुत दुखी हैं| देखा नहीं नीरव मोदी सारे बैंक लूट ले गया |ये नीरव मोदी जरूर महमूद गजनवी का वारिस होगा |अबे लुटेरों !लुटेरों के वारिसों! हमारा  पीछा कब छोड़ोगे ?

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