बुधवार, 14 मार्च 2018

बढे जा रहे आज धरती पुत्र किसान

बढे जा रहे आज देश के धरती पुत्र किसान |
अपना हक़ लेने की खातिर उठा के लाल निशान ||

किस किस पे ना किया भरोसा दिल्ली ना पहुँचाया
लेकिन कोई कभी किसानों के कुछ काम ना आया |
करें खुदकुशी लेकिन संतानों का पिंड ना छुटता
बैंक कर रहे तंग की कर्जा अब तक नहीं चुकाया  |

नोटिश नालिश सख्त तकादा सिर्फ किसानों पर है
धन पशुओं को खुली छूट है लेकर भरें उड़ान ||


जो संसद में जा बैठे हैं, चौराहें पर आएं
आम आदमी को भी तो वो युक्ति ज़रा समझाएं
जिससे कारोबारी का दिन रात मुनाफा बढ़ता
और बैठे बैठे ही अपनी मोटी तोंद फुलाएं |

ये सूखा कंकाल बदन सौ झुर्री वाला चेहरा
अपने ही हिस्से में क्यों है बतलाओ श्रीमान ?


हमें पता है तुम चौराहे पर ना दोगे उत्तर
तुम ऊँची कुर्सी पर जाकर बैठ गये हो तनकर |
सुनो तुम्हारा सदन घेर कर हम सवाल पूछेंगे
कैसे बैंक लुटेरे तुमसे निकल गये हैं बचकर ?

चौकीदार रखा जो हमने कहाँ घूमता रहता
हमें बताये किसको ठेके पे है हिन्दुस्तान ?


कभी तोड़ देते हो मस्जिद, कभी तोड़ते बुत हो
कभी होश में भी रहते या सदा नशे में धुत हो |
सुनो भाँग गाँजे का इतना नशा नहीं अच्छा  है
नशा नाश करता तुम इसमें डूबे हुए बहुत हो |

तुमको नहीं दिखाई देता ठाली हैं मजदूर
तुमको नहीं दिखाई देता रोता हुआ किसान ||








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