सोमवार, 30 अप्रैल 2018

बहुत माकूल मौसम हो, फसल तो खूब होती है
मगर मंडी में अक्सर ये फसल बेभाव जाती है | 
हकूमत खुश बहुत होती,कि पैदावार बम्पर है
किसानों को मगर दिन रात ना फिर नींद आती है |





ये नाव बीच में डूबेगी, इसके छेद भी देखो, 
नदी की लहर भी देखो,भंवर देखो,कहर देखो | 
नज़ारे देखते रहने से दिल तो बहल सकता है 
मगर उस पार जाने का कोई पहले हुनर देखो |



'मेरी उम्र में जो ये पिछली सदी है 
घटा दो उमर से ये छिछली नदी है |
बहुत बोझ दिल पर, नहीं डाल सकता 
समझना है बाकी क्या नेकी बदी है |'

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