गुरुवार, 3 मई 2018

अमरनाथ मधुर :-लोग कह रहे हैं कि 'सूअरखोर, शराबी और अय्याश जिन्ना वास्तविक अर्थों में न तो मुसलमान था और न कभी भारत के मुसलमानों का आदर्श रहा।'
मुझे उन के इस कथन पर सख्त आपत्ति है | ये सही है कि जिन्ना न तो मुसलमान था और न भारत में रहने वाले मुसलमानों का आदर्श है लेकिन इससे अगर सहमत  भी हों जाए  तो आपके इस कथन से बिलकुल सहमति नहीं है कि जिन्ना के खाने पीने और जीने के ढंग को लेकर आप उसे हिकारत से देखें और अभद्र  बताएं |  वैसे अगर वो मुसलमान नहीं था तो भी इसमें कुछ खराब बात नहीं है लेकिन  किसी के खान पान को लेकर नाक भौं  सिकोड़ना  और घृणा करना पिछड़ी हुयी मानसिकता  का द्योतक है |क्या सूअर खाने  और शराब पीने वाले बाकी लोगों को भी आप ऐसी ही हिकारत से देखते हैं ? खुशवंत सिंह शराब भी पीते थे और सूअर भी खाते थे तो क्या वो घृणित व्यक्ति   हो गए ? उनके पिता तो भगतसिंह को फांसी दिए जाने में भी सहभागी थे जबकि जिन्ना ने  लोकमान्य तिलक के मुकदमें की पैरवी की थी  और गांधी जी के अफ्रीका  से भारत लौटने से पहले वे कांग्रेस के बड़े नेताओं में थे और सरदार पटेल के साथ कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे थे |
जिन्ना से पहले धर्म के नाम पर भारत में दो राष्ट्र और दो कौम की  थ्योरी देने वाले सावरकर थे | जिन्ना और सावरकर दोनों ने जीवन के पूर्वार्ध में अंग्रेजों से भारत को मुक्ति दिलाने  के लिए संघर्ष किया किन्तु जीवन के उत्तरार्ध में अंग्रेजों के हाथों  का मोहरा बनाकर देश के बंटवारें का काम किया |दोनों गाँधी और नेहरू की लोकप्रियता और अपनी उपेक्षा से कुंठित थे | एक ने गांधी की हत्या की सफल साजिश रची तो दूसरे ने सांप्रदायिक हिंसा का आयोजन किया |
दोनों ने देश का गहरे जख्म दिए हैं |अफसोस एक की तस्वीर यूनिवर्सिटी से हटाई जा रही है और दूसरे की संसद  की शोभा बढ़ा रही है | इससे भी बढ़कर गाँधीजी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के मंदिर बनाये जा रहे हैं | क्या ये सही है ? मैं कहता हूँ देश के गद्दारों को  धर्म के चश्में से न देखा जाए गद्दार को गद्दार ही समझा जाए| दोनों को इतिहास में पूरा पढ़ाया  जाए ना कि आधा अधूरा मनपसंद जनता को परोसा जाए  | जनता खुद तय करेगी कि इस मुल्क में कौन  गद्दार है और कौन देश का असली वफादार है |

मोहम्मद  तनवीर  खान :- हिन्दू महासभा के सावरकर ने कहा था मुझे जिन्नाह से कोई बैर नहीं है, हिन्दू महासभा ने जिन्नाह के साथ मिल कर बंगाल, सिंध और NWFP में गठबंधन सरकार चलाई थी, 1942 क्रांत्ति के वक्त संघ, हिन्दुमहासभा और जिन्नाह, ये तीनो ब्रिटिश का समर्थन कर रहे थे, 22 दिसंबर 1939 को जिन्नाह के साथ हिन्दुमहासभा ने Day Of Deliverance मनाया था, 23 मार्च 1940 को जब लाहौर में फजलुल हक पाकिस्तान का प्रस्ताव पास कर रहे थे, तब श्यामा प्रसाद उसी फजलुल हक के नीचे उपमुख्यमंत्री थे।
फिर भी जिन्नाह का योगदान भारत की आज़ादी में रहा है, वो काकोरी कांड के वकील थे, और भगत सिंह के केस में भगत सिंह सहित स्वतंत्रा सेनानियों के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़े थे, ठीक उसी वक़्त हिंदू महासभा के शोभा सिंह और सादी लाल भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त के ख़िलाफ़ गवाही दे रहे थे।
जिन्नाह के इस काम के लिए पूरा भारत जिन्नाह का शुक्रगुजार है, लेकिन हिन्दू महासभा ने देश को आज़ादी दिलाने के लिए क्या किया? उल्टे सावरकर ने अंग्रेज़ों को सौंपे अपने माफ़ीनामे में लिखा था, ‘अगर सरकार अपनी असीम भलमनसाहत और दयालुता में मुझे रिहा करती है, मैं यक़ीन दिलाता हूं कि मैं संविधानवादी विकास का सबसे कट्टर समर्थक रहूंगा और अंग्रेज़ी सरकार के प्रति वफ़ादार रहूंगा।'
मुस्लिम लीग ने 1940 में भारत के मुसलमानों के लिए पाकिस्तान की शक्ल में अलग देश की मांग का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन सावरकर ने उससे काफी पहले, 1937 में, जब वे अहमदाबाद में हिंदू महासभा के 19वें अधिवेशन में अध्यक्षीय भाषण कर रहे थे, उन्होंने घोषणा किया था हिंदू और मुसलमान दो अलग राष्ट्र हैं।


हिमांशु  कुमार :-

'यह आप बिलकुल अच्छी तरह से जानते हैं कि इन लोगों ने मरने का फैसला कर लिया है |

यह कोई मज़ाक नहीं है | मैं कानून मंत्री को बताना चाहता हूँ कि वो इस बात को समझें कि कोई आम इंसान जान बूझ कर फाका करके मरने का फैसला नहीं कर सकता | आप थोड़ी देर के लिए भी ऐसा करके तो देखिये आपको खुद समझ में आ जाएगा |'

जो इंसान भूख हडताल करता है वह अपनी आत्मा की आवाज़ पर ऐसा करता है | वह अपनी आत्मा की बात सुनता है और उसे विश्वास होता है कि वह सच्चे और इन्साफ के रास्ते पर है |

वह कोई आम इंसान नहीं है जो ठन्डे दिमाग से किये गये दुष्टतापूर्ण अपराध का अपराधी हो '

- मोहम्मद अली जिन्नाह
बॉम्बे असेम्बली में भगत सिंह के पक्ष में बोलते हुए

दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक गोलवरकर भगत सिंह की कुर्बानी के आलोचक थे, देखिये उन्होंने भगत सिंह के खिलाफ क्या लिखा है

‘बंच ऑफ थॉट्स’ (गोलवलकर के भाषण और लेखों का संकलन, जिसे संघ में पवित्र ग्रंथ माना जाता है) के कई अंश हैं जहां उन्होंने शहादत की परंपरा की निंदा की है.
‘इस बात में तो कोई संदेह नहीं है कि ऐसे व्यक्ति जो शहादत को गले लगाते हैं, महान नायक हैं पर उनकी विचारधारा कुछ ज्यादा ही दिलेर है. वे औसत व्यक्तियों, जो खुद को किस्मत के भरोसे छोड़ देते हैं और डर कर बैठे रहते हैं, कुछ नहीं करते, से कहीं ऊपर हैं. पर फिर भी ऐसे लोगों को समाज के आदर्शों के रूप में नहीं रखा जा सकता. हम उनकी शहादत को महानता के उस चरम बिंदु के रूप में नहीं देख सकते, जिससे लोगों को प्रेरित होना चाहिए. क्योंकि वे अपने आदर्शों को पाने में विफल रहे और इस विफलता में उनका बड़ा दोष है.’ (देखें- बंच ऑफ थॉट्स, साहित्य सिंधु, बंगलुरु, 1996, पेज- 283)

अब यह संघी जिन्नाह को सबसे खराब इंसान कह कर उनकी फोटो को भी दीवार पर से हटाने के लिए मार काट मचा रहे हैं

ताकि भारत के लोग मान लें कि संघी बड़े देशभक्त हैं और भाजपा को सत्ता सौंप दें

हम मुसलमानों के साथ नहीं रह सकते यह प्रस्ताव सबसे पहले हिन्दू महासभा ने पारित किया था

भारत पकिस्तान के बंटवारे के लिए हिंदुत्व की राजनीति ज़िम्मेदार है

राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ की स्थापना ही मुसलमानों ईसाईयों कम्युनिस्टों और दलितों के खिलाफ हुई थी

हेडगवार ने खुद कहा था कि हिन्दू धर्म को मलेच्छों और शूद्रों की तरफ से मिलने वाली चुनौती का सामना करने के लिए हम राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ की स्थापना कर रहे हैं

लेकिन मुस्लिम लीग की स्थापना हिन्दुओं के खिलाफ नहीं हुई थी

मुस्लिम लीग ने द्विराष्ट्रवाद का प्रस्ताव हिन्दू महासभा द्वारा प्रस्ताव पारित करने के एक साल बाद पारित किया था

कि ठीक है अगर आप हमारे साथ नहीं रह सकते तो फिर हम भी आपके साथ क्यों रहें ?

लेकिन आज यह संघी भारत पाक के बंटवारे और दंगे फसादों के लिए जिन्नाह और गांधी के ऊपर पूरा टोकरा पलट देते हैं

हिमांशु  कुमार :-

'यह आप बिलकुल अच्छी तरह से जानते हैं कि इन लोगों ने मरने का फैसला कर लिया है |

यह कोई मज़ाक नहीं है | मैं कानून मंत्री को बताना चाहता हूँ कि वो इस बात को समझें कि कोई आम इंसान जान बूझ कर फाका करके मरने का फैसला नहीं कर सकता | आप थोड़ी देर के लिए भी ऐसा करके तो देखिये आपको खुद समझ में आ जाएगा |'

जो इंसान भूख हडताल करता है वह अपनी आत्मा की आवाज़ पर ऐसा करता है | वह अपनी आत्मा की बात सुनता है और उसे विश्वास होता है कि वह सच्चे और इन्साफ के रास्ते पर है |

वह कोई आम इंसान नहीं है जो ठन्डे दिमाग से किये गये दुष्टतापूर्ण अपराध का अपराधी हो '

- मोहम्मद अली जिन्नाह
बॉम्बे असेम्बली में भगत सिंह के पक्ष में बोलते हुए

दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक गोलवरकर भगत सिंह की कुर्बानी के आलोचक थे, देखिये उन्होंने भगत सिंह के खिलाफ क्या लिखा है

‘बंच ऑफ थॉट्स’ (गोलवलकर के भाषण और लेखों का संकलन, जिसे संघ में पवित्र ग्रंथ माना जाता है) के कई अंश हैं जहां उन्होंने शहादत की परंपरा की निंदा की है.
‘इस बात में तो कोई संदेह नहीं है कि ऐसे व्यक्ति जो शहादत को गले लगाते हैं, महान नायक हैं पर उनकी विचारधारा कुछ ज्यादा ही दिलेर है. वे औसत व्यक्तियों, जो खुद को किस्मत के भरोसे छोड़ देते हैं और डर कर बैठे रहते हैं, कुछ नहीं करते, से कहीं ऊपर हैं. पर फिर भी ऐसे लोगों को समाज के आदर्शों के रूप में नहीं रखा जा सकता. हम उनकी शहादत को महानता के उस चरम बिंदु के रूप में नहीं देख सकते, जिससे लोगों को प्रेरित होना चाहिए. क्योंकि वे अपने आदर्शों को पाने में विफल रहे और इस विफलता में उनका बड़ा दोष है.’ (देखें- बंच ऑफ थॉट्स, साहित्य सिंधु, बंगलुरु, 1996, पेज- 283)

अब यह संघी जिन्नाह को सबसे खराब इंसान कह कर उनकी फोटो को भी दीवार पर से हटाने के लिए मार काट मचा रहे हैं

ताकि भारत के लोग मान लें कि संघी बड़े देशभक्त हैं और भाजपा को सत्ता सौंप दें

हम मुसलमानों के साथ नहीं रह सकते यह प्रस्ताव सबसे पहले हिन्दू महासभा ने पारित किया था

भारत पकिस्तान के बंटवारे के लिए हिंदुत्व की राजनीति ज़िम्मेदार है

राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ की स्थापना ही मुसलमानों ईसाईयों कम्युनिस्टों और दलितों के खिलाफ हुई थी

हेडगवार ने खुद कहा था कि हिन्दू धर्म को मलेच्छों और शूद्रों की तरफ से मिलने वाली चुनौती का सामना करने के लिए हम राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ की स्थापना कर रहे हैं

लेकिन मुस्लिम लीग की स्थापना हिन्दुओं के खिलाफ नहीं हुई थी

मुस्लिम लीग ने द्विराष्ट्रवाद का प्रस्ताव हिन्दू महासभा द्वारा प्रस्ताव पारित करने के एक साल बाद पारित किया था

कि ठीक है अगर आप हमारे साथ नहीं रह सकते तो फिर हम भी आपके साथ क्यों रहें ?

लेकिन आज यह संघी भारत पाक के बंटवारे और दंगे फसादों के लिए जिन्नाह और गांधी के ऊपर पूरा टोकरा पलट देते हैं

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