बुधवार, 30 मई 2018

पाकिस्तान को टक्कर देने आये थे 
लेकिन शक्कर लेने वाले बन बैठे |
हम तो केवल प्रेम तराने गाते  हैं 
जाने वे क्यूँ इतना जल भुन कर ऐंठे ?




हम आज देखते हैं कभी कल पे ना रहे 
बंधुआ कभी मजदूर किसी दल के न रहे |
वायदा था जिनका साथ निभाएंगे हम सदा
वो साथ कभी एक भी पल को नहीं रहे |



खंजर से पसलियों का भी रिश्ता जरूर है 
छूकर ही रुक गया न, गया आर पार है |
साँसों को आने जाने में तकलीफ है बहुत 
न जाने उसे किसका बहुत इंतज़ार है |

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