मंगलवार, 8 मई 2018

न जिन्ना के विरोधी हैं, न गाँधी के पुजारी हैं 
इलैक्शन जीतने को ये हमारी मारामारी है |

बहुत चिल्ला रहे हो तुम कि अच्छे दिन नहीं आये 
लगा दी आग लो देखो नजर धुंधली तुम्हारी है |




अनपढ़ फाड़ रहे पन्ने हर पुस्तक के
पढ़ने वाले पढ़कर याद किये जाते |
कैसे कैसे लोग हुए हैं दुनिया में
मरे एक दिन पर हर रोज जिए जाते |


क्या है मुमकिन उन लोगों को भूल सकें ?
मुमकिन भी हो तो अनपढ़ पढ़वा देंगे |
पढ़ने वाले फिर पढ़कर कुछ सीखेंगे
लेकिन अनपढ़ अनपढ़ को लड़वा देंगे |

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