बुधवार, 9 मई 2018


जो सिर्फ दुपट्टा संभालने की दे नसीहत
ऐसे हरेक मर्द की गर्दन को उड़ा दो |

औरत कभी मर्दों से कहीं कम नहीं होती
दीवार पे लिखी ये इबारत को पढ़ा दो |

औरत को बद नजर से जो भी देख रहा हो
उस बदचलन की आँख में आँखों को गड़ा दो |

जो बेवजह कुत्तों की तरह भोंक रहे हैं
सुनकर उन्हें थम जाओ ना,कदमों को बढ़ा दो |

सदियों की सड़ी रूढ़ियों में बाँध रहे जो
अब बांध के उन बांधने वालों को सड़ा दो |







0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें