शनिवार, 14 जुलाई 2018


अपनों की मेहरबानी है बदनाम नहीं कम |
चर्चे हैं सरेआम कि गुमनाम नहीं हम |

हर शख्स ताल ठोक के देता है चुनौती 
हम भी लड़े जाते अभी टूटा नहीं है दम |

कुछ आरजू नहीं है बस आरजू है ये
टूटे भले जोरो सितम से हो न जरा ख़म |

तुमको तो सिर्फ पाँच साल के लिए चुना
तुम क्या समझते तुम गए सदा के लिए जम |


   
  

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