शनिवार, 4 अगस्त 2018

''हम हैं धरती पुत्र ये सारा विश्व हमारा''


मकड़ी के जालों सी सरहद है मुल्कों की,
आने ना देती है,जाने ना देती है।
जाऊँ तो कैसे जाउँ ? जाने में जोखिम ,
उलझाती है गरदन कभी पकड़ लेती है 

बहती रोज  हवायें,गाती चिडियायें हैं,
उड़ने को उनको खुला आसमान है।
उन पर लगाती  नहीं  कोई भी पाबंदी है
उन के लिए बना न कोई भी विधान है |

काश कि हम भी पंछी होते, बादल होते,
ना सरहद के कैदी होते, ना हम इतने पागल होते।
पगलाये लोगों ने सबको बना दिया है पागल
राष्ट्रवाद हैअमृत कह कर जहर पिलाते हर पल |

इसी जहर का असर है,ये हम जीते ना मरते हैं,
रोते भी हैं, गाते भी हैं,पागल से हँसते हैं।
और सुरक्षा की मोटी जंजीरों में फँसते हैं।
जो घेरे से बाहर लपक लपक डसते हैं |

वही सुरक्षा है जो पंछी पिंजरे में पाता है ,
पाकर जिसको खाना खाता, और गाना गाता है |
गाना जो इंसानों का कहलाता राष्ट्रगीत है
जिसको गाते मर मिटने की बनी पुनीत रीत है |

इसको गाते मरें देश से गर लगाव है,
जिन्दा रहने का ना इसमें कहीं भाव है।
हम जिन्दा रहना चाहते हैं ये कसूर है,
मकड़ज़ाल में नहीं फंसे हैं ये कसूर है।

है कसूर तो सजा जरूर भी हम पायेंगें,
लेकिन देश छोड़ दें तो हम कहाँ जायेंगे?
कुदरत ने धरती सोंपी है, देश न सोंपा,
हमने खुद कागज पर खींची है हर रेखा।

धरती पर नक्शे का मन्जर कहीं नहीं है,
देशों की सीमा का अन्तर कहीं नहीं है।
इसलिये सरहद ना माने पंछी, बादल,
इसलिये सरहद ना माने नदिया का जल|

हम पंछी हैं, बादल हैं,नदिया का जल हैं
सरहद में बाँधें जो हमको वो पागल हैं ।
देश ना केवल, सारी धरती अपना घर है
देशों के नक्शे नश्वर हैं, यही अमर है।

नश्वर हैं कानून तुम्हारे, मत इतराओ,
उलझे हुए स्वयं तुम हमको मत उलझाओ।
हम करते हैं सबका स्वागत तुम भी आओ,
आओ इस धरती को मिलकर स्वर्ग बनाओ।

अलग थलग रहने की भी ना कोई वज़ह है,
मिल जुलकर रहने की इस पर बहुत जगह है।
तंग दिमागों, तंग दिलों की बात ना सुनना ,
एक बार सुन चुना, दुबारा फिर मत चुनना ।

वरना लड़ते और झगड़ते उमर कटेगी
किसी पड़ौसी से ना अपनी कभी पटेगी |
तुमको भी रहना है, उसको भी रहना है,
नेता जो कहते, कहने दो, जो कहना है ।

हम सब भाई भाई हैं, हों किसी देश के
भाषा बोली भिन्न हमारी भिन्न वेश के |
रंग रूप बहुरूप हमारा पर इससे क्या
दिल भाव एक जैसे हैं राग द्वेश के |

भूख एक सी लगती प्यास सताती  सबको
और एक सी रहती आस जगाती हमको |
आस यही सारी दुनिया को एक करेंगे 
आस यही आदम के बेटे नहीं लड़ेंगे |

आस यही दुनिया में होगा भाईचारा
और लिखा जायेगा ये इतिहास हमारा | 
हमने नक़्शे मिटा दिए सारे देशों के
हम हैं धरती पुत्र ये सारा विश्व हमारा | 





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