शनिवार, 11 अगस्त 2018

पता नहीं किसने लिखा है पर जबरदस्त लिखा हैः
"रास्ता चलना दूभर हो गया है अब तो, औरतें इस तरह घूर-घूरकर देखती हैं मानों अपनी नज़रों से ही कपड़े उतार लेंगी, मौक़ा मिलते ही बदन पर आगे-पीछे हाथ लगाती हैं, भूल जाती हैं कि मैं भी किसी का भाई, किसी का बेटा, किसी का पोता हूँ और कल को मेरी भी शादी होगी" !!!
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Drpushplata Adhiwaqta Muzaffarnagar वे यूँ नहीं देखती वे देखती ये भी रेपिस्ट तो नहीं

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