शनिवार, 6 अक्टूबर 2012

पुरुषों के कटघरें में औरत



'वेश्या एक माह तक जाएगी मसजिद---------- --------------- --------------- --------पाकिस्तान के अशांत पश्चिमोत्तर क्षेत्र की एक अदालत ने वेश्यालय चलाने वाली एक महिला को इस शर्त पर जमानत दी है कि वह एक माह तक प्रति दिन एक घंटे मसजिद जाकर अपने पापों का प्रायश्चित करेगी।'

  पाकिस्तान की कोर्ट के इस फैसले से सजायाप्ता इस महिला के पाप चाहें ना मिटे लेकिन उम्मीद है कि मस्जिद जाने वाले नमाजियों की संख्या ज
रुर बढ़ जायेगी और मस्जिद भी अब पहले जैसे बेरौनक नहीं रहेगी, हो सकता है कि वो भी वैसी ही गुलज़ार हो जाए जैसा मोहतरमा का कोठा हुआ करता था.अब इमाम साहब भी सुरमा वुरमा लगाकर दाड़ी संवारते हुए दिखाई देंगे. हो सकता है कुछ  इमाम इस मामले को लेकर भिड भी जाये कि मोहतरमा हमारी मस्जिद में ही नमाज पढ़ेंगी क्योंकि कायदे की नमाज पढ़ानी वही जानते हैं. जो लोग बहत्तर हूरें मिलने की बात पर हंसा करते थे अब उनकी हंसी काफूर हो जायेगी . नमूने की हूर खुदा ने भेज दी है. जो पक्का सच्चा नमाजी होगा उसे बहत्तर हूरें जन्नत में मिलेंगी ये इस बात का सबूत है. अब मोहतरमा का पता नहीं कि उन्हें जन्नत मिलेंगी या नहीं. वैसे जन्नत में वे पहले रहती थी अगर मोलाना साहब कि मानें तो जन्नत उनके कोठे से अलग गुलज़ार क्या होगी ? उनके हिस्से में तो वहाँ भी वही काम आएगा जो वे कोठे पर किया करती थीं. अगर मर्द को बहत्तर हूरें मिलेंगी तो वो उनके जैसी ही होंगी. लेकिन इतनी आएँगी कहाँ से ? कहीं ऐसा तो नहीं जो यहाँ पाँचों वक्त कि नमाज पढ़ें जा रहीं हैं और जिन्हें यक़ीनन जन्नत नशीं होना है उनको भी ये जिम्मेदारी दी जाये ?वैसे मर्द को बहत्तर हूरें मिलेंगी तो औरत के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए. मोलाना जरूर यह अन्याय नहीं होने देंगें.


     मोहतरमा को मर्दों की सफा में तो शायद नमाज नहीं ही पढ़ने दिया जाएगा .क्योंकि औरतें मर्दों के बराबर खड़े  होकर नमाज नहीं पढ़ सकती हैं.वैसे अगर  औरतें मर्दों के बराबर खड़े होकर नमाज पढ़ लेंगीं तो कोई आसमान नहीं टूट जाएगा . हाँ जिन नमाजियों की नमाज में खलल पड़ेगा, उनकी नमाज में खलल उसके  वहाँ रहने पर भी पड़ेगा.भले ही  वो चाहें जहां खड़ी  होकर नमाज पढ़ें. वैसे मेरी जानकारी में औरतों को मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं है शायद इसी सिलसिलें में केरल में एक औरत ने इमाम बनकर मस्जिद में नमाज पढ़ानी चालू की थी जिस पर कठमुल्लाओं द्वारा बबेला किया गया था? अब पाकिस्तान कोर्ट ने कैसे महिला को मस्जिद में जाकर पापों का प्रायश्चित करने का निर्देश दे दिया और वो कैसे इसका पालन  करेगी ये बात समझ से बाहर है. 
          इसी के साथ ये सवाल भी है कि कोर्ट ने एक औरत को ही यह सजा क्यों दी ? क्या कोई औरत किसी पुरुष के बिना पतित होती है ? जब उसके पतन में पुरुष शामिल है तो पुरुष क्यूँ बरी कर दिया जाता है ?उसे तो औरत से पहले सजा दी जानी चाहिए क्योंकि औरत मजबूरी में यह गलत काम कर रही है और पुरुष मजे के लिए कर रहा है .या शायद पुरुष पहले ही मस्जिदों में जाकर अपने पापों को माफ़ करवाता रहता है इसलिए केवल स्त्री को दण्डित लिया गया है . वैसे  स्त्री के इस निन्दित कर्म को मैं पाप या पतन नहीं मानता हूँ . यह तो उसी व्यवस्था कि देन है जिसमें आदमी और दूसरे तरह के गुनाह करता है . जैसे लूट  ,डकैती ,रिश्वत खोरी , जमाखोरी .मिलावाटखोरी, तस्करी आदि. जिस व्यवस्था में न्याय के आसन पर बैठकर अन्याय किया जाता हो  व्यवस्था में  ऐसे ही फैसलें लिखें जायेंगें . अगर इन न्यायाधीश महोदय की जगह कोई महिला जज होती तो क्या पुरुष को दण्डित किये बिना किसी औरत को दण्डित करने का ऐसा बेतुका फैसला दे सकती थी ? कदापि नहीं . वास्तव में वो पूरा समाज गुनाह का दोषी है जिसमें एक स्त्री ऐसा गर्हित कर्म करने के लिए मजबूर है.

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طوائف ایک ماہ تک جائے گی مسجد ------------------------------------------- ----- پاکستان کے شورش زدہ شمال مغربی علاقہ کی ایک عدالت نے وےشيالي چلانے والی ایک خاتون کو اس شرط پر ضمانت دی ہے کہ وہ ایک ماہ تک ہر روز ایک گھنٹے مسجد جا کر اپنے گناہوں کا تائب کرے گی. '

  
پاکستان کی عدالت کے اس فیصلے سے سجاياپتا اس خاتون کے گناہ چاہیں نہ مٹے لیکن امید ہے کہ مسجد جانے والے نماجيو کی تعداد ضرور بڑھ جائے گی اور مسجد بھی اب پہلے جیسے بےرونك نہیں رہے گی، ہو سکتا ہے کہ وہ بھی ویسی ہی گلزار ہو جائے جیسا موهترما کا کوٹھا ہوا کرتا تھا. اب امام صاحب بھی سرما ورما لگا کر داڑي سوارتے ہوئے دکھائی دیں گے. ہو سکتا ہے کچھ اس معاملے کو لے کر بھڈ بھی جائے کہ موهترما ہماری مسجد میں ہی نماز پڑھےگي کیونکہ قائد کی نماز پڑھاني وہی جانتے ہیں. جو لوگ بهتتر هورے ملنے کی بات پر ہنسا کرتے تھے اب ان کی ہنسی کاپھور ہو جائے گی.نمونے کی حور خدا نے بھیج دی ہے. جو پکا سچا نماجي ہوگا اسے بهتتر هورے جنت میں ملیں گی یہ اس بات کا ثبوت ہے. اب موهترما کا پتہ نہیں کہ انہیں جنت ملیں گی یا نہیں.ویسے جنت میں وہ پہلے رہتی تھی اگر مولانا صاحب کہ مانیں تو جنت ان کے کوٹھے سے الگ گلزار کیا ہوگی؟ ان کے حصے میں تو وہاں بھی وہی کام آئے گا جو وہ کوٹھے پر کیا کرتی تھیں. اگر مرد کو بهتتر هورے ملیں گی تو وہ ان کے جیسی ہی ہوں گی. لیکن اتنی آئیں گی کہاں سے؟ کہیں ایسا تو نہیں جو یہاں پانچ وقت کہ نماز پڑھیں جا رہی ہیں اور جنہیں یقینا جنت نشي ہونا ہے ان کو بھی یہ ذمہ داری دی جائے؟ ویسے مرد کو بهتتر هورے ملیں گی تو عورت کے ساتھ بھی نا انصافی نہیں ہونا چاہئے. مولانا ضرور یہ نا انصافی نہیں ہونے دےگے.
     
موهترما کو مردوں کی صفا میں میں تو شاید نماز نہیں ہی پڑھنے دیا جائے گا. کیونکہ عورتیں مردوں کے برابر سخت ہوکر نماز نہیں پڑھ سکتی ہیں. ویسے اگر عورتیں مردوں کے برابر کھڑے ہو کر نماز پڑھ لےگي تو کوئی آسمان نہیں ٹوٹ جائے گا. ہاں جن نماجيو کی نماز میں خلل پڑے گا، ان کی نماز میں خلل اس کے وہاں رہنے پر بھی پڑے گا. بھلے ہی وہ چاہیں جہاں کھڑی ہو کر نماز پڑھیں. ویسے میری معلومات میں عورتوں کو مسجد میں جا کر نماز پڑھنے کی اجازت نہیں ہے شاید اسی سلسلے میں کیرل میں ایک عورت نے امام بنا کر مسجد میں نماز پڑھاني شروع کی تھی جس پر كٹھمللاو طرف ببےلا کیا گیا تھا؟ اب پاکستان کورٹ نے کس طرح خواتین کو مسجد میں جا کر گناہوں کا تائب ہونے کا حکم دے دیا اور وہ کس طرح اس پر عمل کرے گی یہ بات سمجھ سے باہر ہے.اسی کے ساتھ یہ سوال بھی ہے کہ کورٹ نے ایک عورت کو یہ سزا کیوں دی؟ کیا کوئی عورت کسی مرد کے بغیر پتت ہوتی ہے؟ جب اس کے زوال میں مرد شامل ہے تو اسے کیوں بری کر دیا جاتا ہے؟ اسے تو عورت سے پہلے سزا دی جانی چاہئے کیونکہ عورت مجبوری میں یہ غلط کام کر رہی ہے اور مرد مجے کے لئے کر رہا ہے. یا شاید مرد پہلے ہی مساجد میں جا کر اپنے گناہوں کو معاف کرواتا رہتا ہے اس لئے صرف عورت کو دڈت لیا گیا ہے. وسے عورت کے اس نندت کرم کو میں گناہ یا زوال نہیں مانتا ہوں. یہ تو اسی نظام کہ دین ہے جس میں آدمی اور دوسرے طرح کے گناہ کرتا ہے. جیسے للوت، ڈکیتی، رشوت کھانا، جماكھوري. ملاواٹكھوري، اسمگلنگ وغیرہ. جس نظام میں انصاف کی کرسی پر بیٹھ کر نا انصافی کی جاتی ہو اسپوجوادي اور پرشوادي نظام میں ایسے ہی پھےسلے بیک جايےگے. اگر ان فاضل جج کی جگہ کوئی خاتون جج ہوتی تو کیا مرد کو دڈت کئے بغیر کسی عورت کو دڈت کرنے کا ایسا بےتكا فیصلہ دے سکتی تھی؟ ہرگز نہیں. اصل میں وہ مکمل سماج گناہ کا مجرم ہے جس میں ایک عورت ایسا گرهت عمل کرنے کے لئے مجبور ہے.

 

1 टिप्पणी:



  1. 1-मणि बाला - प्रायश्चित तो उन्हेँ करना चाहिए जो उस वेश्या के कोठे पर जाते थे अगर वो वहाँ नही जाते तो उस औरत को वेश्या नाम से नही पुकारा जाता और अब भी सजा उस औरत को ही मिल रही है ये कैसा न्याय है।


    2-लवली भाटिया - मुझे इस बात की ख़ुशी है की पाक में ऐसा सोचने वाले भी हैं .


    3-अमरनाथ मधुर जी हाँ आपने बिलकुल सही कहा है अब भी सजा उस स्त्री को ही मिल रही है. मेरी निगाह में ये न्याय नहीं है और न ही ऐसा न्याय करने वाला न्यायाधीश कहलाने के काबिल है.आखिर ये उसने कैसे तयकर लिया कि एक स्त्री बिना किसी पतित पुरुष के कैसे पतित हो गयी ? अगर उसके पतन में किसी पुरुष का हाथ है तो उस पुरुष को क्यों नहीं दण्डित किया जाना चाहिए ? उस समाज को क्यूँ नहीं किया जाना चाहिए जी में ऐसे पुरुष को सम्मान और ऐसे पुरुष को सम्मान और ऐसी स्त्री को अपमान कि निगाह से देख जाता है ?वैसे ये ना पतन है और ना पाप है . इससे ज्यादा गर्हित काम वे हैं जो समाज के ऊँचे लोग करते हैं. रिश्वतखोरी, मिलावटखोरी, शोषण .


    5-मणि बाला - हमेशा ऐसे ही होता है सजा स्त्री को ही मिलती है .


    6-अमरनाथ मधुर - बहुत दिन तक सुनी हमने तेरी तकरीर मोलाना,
    मगर अब तक नहीं बदली मेरी तकदीर मोलाना.
    -मनव्वर राणा


    7-इरशाद खान सिकंदर - अमरनाथ साहब औरतें मर्दों की सफ़ में नमाज़ नहीं पढ़तीं ..नमाज़ के लिये मर्दों की अलग और औरतों की अलग जमात होती है .. अब ये वेश्या मस्जिद किस लिये जायेगी और अपने पाप का प्रायश्चित किस प्रकार करेगी इसकी वज़ाहत अदालत को करना चाहिए ...


    8-अमरनाथ मधुर - सिकंदर साहब औरतें मर्दों के बराबर खड़े होकर नमाज पढ़ लेंगीं तो कोई आसमान नहीं टूट जाएगा . हाँ जिनकी नमाजियों की नमाज में खलल पड़ेगा उनकी नमाज में खलल उसके वहाँ रहने पर भी पड़ेगा.भले ही वो चाहें जहां खड़ी होकर नमाज पढ़ें. वैसे मेरी जानकारी में औरतों को मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं है शायद इसी सिलसिलें में केरल में एक औरत ने इमाम बनाकर मस्जिद में नमाज पढ़ानी चालू की थी जिस पर कठमुल्लाओं द्वारा बबेला किया गया था? अब पाकिस्तान कोर्ट ने कैसे महिला को मस्जिद में जाकर पापों का प्रायश्चित करने का निर्देश दे दिया और वो कैसे इसका पालन करेगी ये बात समझ से बाहर है.

    9-प्रचंड नाग -कम्युनिस्टों के कपड़े उतरने पर अंदर जनेऊ क्यों साफ-साफ नजर आता है !

    10-मंगेश फुल्ज़ेले - @ अमरनाथ मधुर जी , "हिंदुस्तान" के मंदिरो मे "देवदासी" क्या इसलिये ही होती थी ???.... और जहा तक वो खास लोगो को "खास सेवाए" भी जादा ही देती थी .......

    11-अमरनाथ मधुर -मंगेश फुलज़ले जी जी हाँ और अब शायद अदालतें चाहती हैं की आप भी उसी राह चलें .अदालतें धार्मिक भेदभाव नहीं चाहतीं हैं .वैसे भी मुल्ला और पंडित अपनी रूढिगत कट्टरता में एक जैसे होते हैं .
    12-रिशु आर्यन राइ -हा हा हा ...क्या बात है .

    13-राज शर्मा - मस्जिद तो बना ली शब भर में ईमां की हरारत वालों नें,
    मन अपना पुराना पापी है बरसों में नमाज़ी बन ना सका

    14-गोविन्द सिंह परमार - बहुत सही

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