हे राजनीति के हैवीवेट, कितना मोटा तुम लिए पेट,
अरबों का घोटाला करके ली न डकार ओ संघ सेठ.
ओ राम-राम जपने वाले तुम कुंभकर्ण हो, रावण हो
नाभी में तीर तुम्हारी भी मारेगें थोडा करो वेट .
बचना मुश्किल हो जाएगा कितना भी शौर मचाना तुम,
जितने भी काले कर्म किये, सब दर्ज यहाँ हैं फिक्स डेट.
तुमने सबको पीछे छोड़ा उनसे भी बढकर नाम किया,
अग्रज कर गए तुम्हारे जो कुछ कफ़न दलाली रिस्क रेट.
मंदिर-मंदिर का शौर मचा, मन के अन्दर का मैल छुपा,
भावुक जनता को मूर्ख बना, दौलत अपने घर ली समेट.
जनता भी यूँ न छोड़ेगी, उसका भी एक दिन आएगा
जब तुमको वो बतला देगी कितना तुमसे करती है हेट.
-अमरनाथ 'मधुर'
ہے سیاست کے هےويوےٹ، کتنا موٹا تم لئے پیٹ
اربوں کا گھوٹالہ کر لی نہ ڈکار او ایس سیٹھ
او رام رام جپنے والے تم كبھكر ہو، راون ہو
نابھي میں تیر تمہاری بھی مارےگے تھوڑا کرو ویٹ.
بچنا مشکل ہو جائے گا کتنا بھی شور مچانا تم،
جتنے بھی کالے کرم کی، سب درج یہاں ہیں فکس ڈیٹ.
تم نے سب کو پیچھے چھوڑ دیا ان سے بھی بڑھ کر نام کیا،
اگرج کر گئے تمہارے جو کچھ کفن دلالی رسک کی شرح.
مندر مندر کا شور مچا من کے اندر کا میل چھپا،
جذباتی عوام کو بے وقوف بنا، دولت اپنے گھر لی سمیٹ.
عوام بھی یوں نہ چھوڑے گی اس کا بھی ایک دن آئے گا
جب تم کو وہ بتلا دے گی کتنا تم سے کرتی ہے هےٹ.
- امرناتھ 'میٹھی'


1-अमरनाथ मधुर - नदी के घाट पर भी गर सियासी लोग बस जायें
जवाब देंहटाएंतो प्यासे होँठ एक एक बूंद पानी को तरस जायें
गनीमत है कि मौसम पे हुकूमत चल नहीं सकती
नहीं तो मेघ सारे इनके खेतोँ मेँ बरस जायें .
2-बी. एल. 'पारस'- वाह !बहुत सही कहा आपने मधुर साहब ।।
3-अशोक वर्मा- ईनकी नाभियोँ मेँ तीर अवश्य लगेगेँ अमरनाथ जी।
4--बी. एल. 'पारस'- सही वक्त आने पर
5-अमित राज - सही बात .
6-अमर टाक- अमर नाथ माथुर जी आपको लिखने से पहले सोचना चाहिए कि आप क्या लिख रहें हैं ,आपने संघ के स्वयं सेवको की फोटो टैग करके ऐसा लिखा है ,एक दम गलत लिखा है ,
7-अमरनाथ मधुर - संघ के स्वयंसेवकों के लिए ही लिखा है साहब। आपको क्या गलत लगा है यह बता दीजिये ? ये भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी संघ का स्वयंसेवक है और इसके बराबर में इसका गुरु मोहन भागवत है. महाराष्ट्र में जो लूट इन्होंने की है उसके बाद भी क्या आपकी आँख नहीं खुली है ?
8-कुमार पंकज - हा हा हा हा बढ़िया ......सर पोयट कौन है इसका .....पोयट का नाम भी लिखिए.
9-अमरनाथ मधुर - कुमार पंकज जी क्या हमारे कवि होने में संदेह है ?
10-कुमार पंकज - नो डाउट सर जी .....बट आपक o अच्छी रचनाओं को लोगो तक पहुँचाने के लिए भी तो जाना जाता है ....चुन -चुन कर मोती लेन के लिए .
11-अमरनाथ 'मधुर'- सब अपनी पसंद से अच्छा बुरा तय करते हैं. अपनी रचना के साथ चाहे नाम न हो लेकिन दूसरे की रचना के साथ नाम अवश्य रहता है. आपने कमेन्ट लायक समझा यही हमरी उपलब्धि है. आपके शब्द सुमन सर माथे हैं .
12-मोहम्मद अफज़ल ये फॉर रन्स का सिग्नल क्रिकेट से चुराया है .