यू. पी .सरकार ने मान्यवर कांशीराम जी के निर्वाण दिवस की छुट्टी रद्द करके अनावश्यक छुट्टी को ख़त्म करने की शुरुआत की है. उनके इस कदम का स्वागत किया जाना चाहिए . उनसे और हिम्मत की अपेक्षा करते हुए सभी सरकारी छुट्टियों को रद्द करने और उसके स्थान पर प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को साल भर में एक महीने का अनिवार्य अवकाश देने की घोषणा करने का अनुरोध किया जाना चाहिए. अनिवार्य अवकाश इसलिए क्योंकि कुछ रसूखदार कर्मचारी अपनी सुविधानुसार नौकरी करते हुए लगभग हमेशा ही अवकाश पर रहते हैं तथा कुछ कर्मचारी काम के बोझ से दबे रहने के कारण तनाव में रहते हैं . अगर आप सर्वे करायें तो यह पायेंगें कि निचले स्तर के कर्मचारियों के ह्रदयाघात से मरने या अवसाद में रहने के हादसें बढ़ रहें हैं . इसका कारण यही है कि वे काम के बोझ और असहयोगी माहौल में काम करने के कारण तनावग्रस्त रहते हैं. अगर एक महीने का सवेतन अनिवार्य अवकाश हर कर्मचारी को प्रतिवर्ष दिया जाए तो वह उसका उपयोग वे अपनी मानसिक क्षमता को दुरुस्त रखने में कर सकेगें जिससे सरकार के कार्यों कि गुणवत्ता भी बढ़ेगी और सरकारी कर्मचारियों का चिड चिड़ापन ख़त्म हो जाएगा . कुछ लोग समझते हैं कि कर्मचारी को छुट्टी देना अनावश्यक है. निजी क्षेत्र में यह सोच पहले से ही हावी है और अब ज्यादा जोर पकड़ रही है. वे दिखावे का अवकाश देते हैं और .कर्मचारी पर इतना काम लाद देते है कि उसे घर लाकर पूरा करना उसकी मजबूरी बन जाता है .जब से कंप्यूटर और इंटरनेट का ज़माना आया है आदमी मशीन बनकर रह गया है . लेकिन सामाजिक सोहार्द और उत्पादकता बढाने के लिए अवकाश बहुत जरुरी है .आदमी को मशीन बना देने से उत्पादकता बढ़ जायेगी, ये खामख्याली के सिवा कुछ नहीं है .
जवाब देंहटाएं1-अहमद कमल सिद्दिकुई - सहमत..
2-नसीर अहमद अंसारी हम भी सहमत हैं.
आप तो हर बात काइदे की करते हो अमरनाथ जी आप के जज्बे को सलाम.
3-गोविन्द सिंह परमार - आदरणीय ,आपका सुझाव बहुत अच्छा है
4-हिमांशु राय- सही कहा आपने जिन महापुरुषों ने कर्म पर जोर दिया उनकी जन्म या देहावसान तिथि पर अवकाश देना उचित नहीं है....
5-सुधाकर आशावादी शर्मा - कामचोरो के लिए छुट्टियाँ ही छुट्टियाँ है भाई जी
6-अमरनाथ ' मधुर ' सभी साथियों को नमस्कार. मैं कायदे से लेखक या पत्रकार या राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं हूँ. मेरी सैद्धांतिक जानकारी भी कम है. मैं अपनी अनुभूतियों को व्यक्त करता हूँ. जो सही लगता है उसे बिना किसी लाग लपेट के रखा देता हूँ. जब मेरे लिखे को कोई पसंद करता है तो मुझे भी किसी बच्चे की खुशी जैसा एहसास होता है. आप मुझे खुशियाँ देते हैं इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ. धन्यवाद .