शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

' सुना है'-कविता - राजीव चतुर्वेदी

सुना है ...
" सुना है वर्फ की चादर फ़ैली है पहाड़ों पर
सुना है ओस की वारिस हुई है देवदारों पर
सुना है सर्द है सूरज सुबह छुप गयी है कोहरे की रजाई में

सुना है सत्य के संकेत सीमित हैं बयानों तक
सुना है प्यार भी बिकने लगा है अब दुकानों पर
सुना है सड़कें रोनक हैं अँधेरे हैं मकानों पर
सुना है रात है गहरी कातिल बैठे हैं मचानो पर
सुना है इस सदी में न्याय की देवी की आँखें बंद हैं
सुना है मन्थराएं मंत्रणाएं कर रही हैं
सुना है स्वान के स्कूल में अब शेरों को पढ़ना है
सुना है शातिरों को शब्दकोषों पर भरोसा है
सुना है एक बूढ़े बाप ने दहेज़ जोड़ा है
सुना है दहेजखोर दामाद ने रिश्तों को निचोड़ा है
सुना है हमको खुदा से प्यार कम पर खौफ ज्यादा है

सुना है कोहरे में दिया दयनीय सा दिखने लगा है
सुना है पिता पर पैसा कम है पर प्यार ज्यादा है
सुना है मां की ममता खिलौनों की दुकानों से डरती है
सुना है एक मछली प्यासी हो कर पानी में ही मरती है
सुना है जिन्दगी जज़बात में सिमिटी है
सुना है एक तितली फूल के दामन से लिपटी है." -- राजीव चतुर्वेदी








Alpha
سنا ہے ..."سنا ہے ورپھ کی چادر فےلي ہے پہاڑوں پرسنا ہے اوس کی وارث ہوئی ہے دےودارو پرسنا ہے سرد ہے سورج صبح چھپ گئی ہے کہرے کی رجاي میں
سنا ہے سچ کے اشارہ محدود ہیں بیانات تکسنا ہے محبت بھی فروخت ہونے لگا ہے اب دکانوں پرسنا ہے سڑکیں رونك ہیں اندھیرے ہیں مکانوں پرسنا ہے رات ہے گہری قاتل بیٹھے ہیں مچانو پرسنا ہے اس صدی میں انصاف کی دیوی کی آنکھیں بند ہیںسنا ہے منتھراے متراے کر رہی ہیںسنا ہے سوان کے اسکول میں اب اشعار کو پڑھنا ہےسنا ہے شاترو کو شبدكوشو پر بھروسہ ہےسنا ہے ایک بوڑھے باپ نے دهےذ جوڑا ہےسنا ہے دهےجكھور داماد نے رشتوں کو نچوڑا ہےسنا ہے ہم کو خدا سے محبت کم پر خوف زیادہ ہے
سنا ہے کہرے میں دیا قابل رحم سا نظر آنے لگا ہےسنا ہے والد پر پیسہ کم ہے پر پیار زیادہ ہےسنا ہے ماں کی ممتا کھلونوں کی دکانوں سے ڈرتی ہےسنا ہے ایک مچھلی پیاسی ہو کر پانی میں ہی مرتی ہےسنا ہے زندگی جذبات میں سمٹي ہےسنا ہے ایک تتلی پھول کے دامن سے چمٹی ہے. "- راجیو چترویدی

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