किसी के ऑंसुओं में आज मेरे ऑंसू मिल जायें.
चमन को आज मैं भूला
पवन को आज मैं भूला
गगन भी आज मैं भूला
उडा हूँ पंख फैलाये.
कोई रोया यहॉं आकर
कोई रोया वहॉं जाकर
हमारी अँखियाँ रो रोकर
बनी सावन की घटायें.
हमें जब नींद न आती
पता नहीं रात क्यों आती
क्या आधी रात ही भाती
जो उठकर गीत बनाये.
जमाने रोक न राहे
भरेंगें कब तलक आहें
सनम फैला भी दो बाहें
दिनॉंकः 24-12-81
اشر ملن
کسی کے سو میں آج میرے آنسو مل جائیں.
چمن کو آج میں بھولا
پون کو آج میں بھولا
گگن بھی آج میں بھولا
اڑا ہوں ونگ پھےلايے.
کوئی رویا یہاں آ کر
کوئی رویا وہاں جا کر
ہماری اكھيا رو رو کر
بنی ساون کی گھٹايے.
ہمیں جب نیند نہ آتی
پتہ نہیں رات کیوں آتی
کیا آدھی رات ہی بھاتي
جو اٹھ کر گیت بنائے.
زمانے روک نہ راہے
بھرےگے کب تلک آہیں
صنم پھیلا بھی دو باہیں
رہا ہم سے نہیں جائے.
دنك 24-12-81


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