शुक्रवार, 22 जून 2012

गीत प्यार के




सुनाऊं  गीत कौन सा हें सारे गीत प्यार के।
सुनोगे गीत बन्धु तुम सुनोगे गीत प्यार के ।

अभी सुबह के स्वप्न में मदहोश सा मैं हो रहा 
खुली जो ऑंख देखता हूँ अब तो शाम ढल गयी।
लगा कि जैसे हाथ से ये जिन्दगी फिसल गयी
मैं राह में खडा रहा वो रास्ता बदल गयी  ।


मुझे न इतना होश था कि कुछ कहूँ  पुकार के । 
सुनोगे गीत बन्धु तुम सुनोगे गीत प्यार के ।

वो दिन भी थे जब गीत गाती थीं हजारों बुलबुलें
वो दिन भी थे जब भोंरे गुनगुनाया करते फूलों पर।
वो दिन भी थे जब तितलियॉं मॅंडराया करती फूलों पर
सितारे आसमॉं के लुटाते थे मोती फूलों  पर  ।

चमन में छा गयी खिजॉं ये गीत हैं बहार के । 
सुनोगे गीत बन्धु तुम सुनोगे गीत प्यार के ।
                 अमरनाथ 'मधुर' 
                रचना: दिनॉंक 18-07-82
گیت پیار کگیت پیار کے
                               
سناو گیت کون سا هے سارے گیت پیار کے
سنوگے گیت بندھ تم سنوگے گیت پیار کے.

ابھی صبح کے خواب میں مدہوش سا میں ہو رہا
کھلی جو آنکھ دیکھتا ہوں اب تو شام ڈھل گئی
لگا کہ جیسے ہاتھ سے یہ زندگی پھسل گئی
میں راہ میں کھڑا رہا وہ راستہ بدل گئی.

مجھے نہ اتنا ہوش تھا کہ کچھ کہوں پکار کے،
سنوگے گیت بندھ تم سنوگے گیت پیار کے.

وہ دن بھی تھے جب گیت گاتی تھیں ہزاروں بلبلے،
وہ دن بھی تھے جب بھورے گنگنایا کرتے پھولوں پر،
وہ دن بھی تھے جب تتلي مڈرايا کرتی پھولوں پر
ستارے اسم کے لٹاتے تھے موتی پھولوں پر.

چمن میں چھا گئی كھج یہ گیت ہیں بہار کے،
سنوگے گیت بندھ تم سنوگے گیت پیار کے.
                  امرناتھ 'مدھر'


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