सिर को नोचें, मुटठी भींचे
वो ताकत में कहॉं बडा है?
देखो तो किस जगह खडा है.
उसको घेर रही हैं आहें
बेबस और लाचार निगाहें
लाशें चारों और पडी हैं
जली,अधजली,बहुत सडी हैं
बदबू बहुत कुकर्मां की है
करनी इन बेशर्मों की है
शर्मिन्दा पूरा भारत है
इनको लानत है, गारत है
पर देखो इनकी बेहयाई
लाज नहीं इनको है आई
क रहे दिल्ली की राहें
बढते ज्यूँ बढता कबाड है
भूले दिल्ली में तिहाड है
स्वागत है जल्दी से आयें
फैलाये फोलादी बाहें
कोठरियॉं जेलों की खाली
साफ किये हैं लोटा, थाली
तुम्हें गोद में बैठायेंगी
बंगारू के संग गायेंगी
उमा नमस्ते, नमस्ते मोदी,
नमस्ते प्रज्ञा, नमस्ते दारा
नमस्ते लाल कृष्ण आडवाणी
तरसते पी एम पद का मारा
सुलगते दिल के बुझे अंगारे
चले भी आओ तुम्हारी खातिर
सही जगह है ये कैदखाना
चले भी आओ कि राम चर्चा
यही पे करना यहीं पे गाना
न मायूस होना कि मेहनत तुम्हारी
मजे ले रहा नरेंदर मोदी
गया बैठ रथ पर किया तुमको पैदल
बडों की शर्म लाज सारी ही खो दी
जो पथ था दिखाया उसी राह पर तो
तुम्हारा वह मोदी बढा जा रहा है
न पी एम बने तुम, ना वो ही बनेगा
यूँ समझो सीधा तिहाड जा रहा है।




जवाब देंहटाएंइस सार्थक पोस्ट के लिए बधाई स्वीकारें.
कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें , अपना स्नेह प्रदान करें.