बुधवार, 17 अक्टूबर 2012

स्त्री अस्मिता के सवाल -२ عورت اسمتا کے سوال -2

                                  
  अंग्रेजी के प्रसिद्द कवि रादियार्ड किपलिंग ने कभी भारत और इंगलैंड के सन्दर्भ में कहा था कि पूरब पूरब है और पश्चिम पश्चिम .ये दोनों कभी एक नहीं हो सकते हैं. लेकिन अगर आज वो  जीवित होते तो ये अजूबा भी देख लेते. आज महिलाओं के सम्बन्ध  में पश्चिमी भारत के राज्य हरियाणा के चौधरी जिस ढंग से सोचते हैं उसी ढंग से भारत में आधुनिकता का द्वार कहे जाने वाले पूर्वी राज्य प० बंगाल की  मुख्य मंत्री ममता बनर्जी  सोचती हैं. दोनों राज्य में महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाए बढ़ी हैं.जिनके  सम्बन्ध में माननीया    ममता बनर्जी का कहना  है कि सामाजिक खुलेपन के कारण बलात्कार कि घटनाएँ बढ़ी हैं और मीडिया उन्हें बेवजह तूल दे रहा है.
    क्या गजब कि सोच है. हरियाणा के चौधरी कहते हैं कि  चाउमीन, बर्गर खाकर नौजवानों में गर्मी पैदा हो रही है जिसके कारण बलात्कार कि घटनाएँ होती  हैं और ममता दीदी कह रही हैं कि सामाजिक खुलेपन के कारण ऐसी घटनाएँ हो रही हैं. हम तो समझते थे कि बंद समाज होने के कारन ऐसी घटनाएँ होती हैं लेकिन इन्होने तो सारी प्रस्थापनाओं  को ही उलट दिया है.  जब हमारे दिशानायक, हमारे  राजनेता ऐसी सोच रखेंगे तो समझा जा सकता है देश किस दिशा में जा रहा है .विशेषकर जब महिला राजनीतिग्य उसमें  भी सबसे तेज तर्रार  और दबंग महिला नेता ऐसी सोच का प्रदर्शन करती है तो महिलाओं के प्रतिनिधित्व के औचित्य पर भी संशय होने लगता है. आखिर आज देश में सबसे प्रभावशाली राजनेताओं में महिलायें ही हावी हैं, फिर भी महिलाओं के हक़ में आवाज बुलंद होने की बजाय उनकी आवाज महिलाओं के  उत्पीदकों की  सहायक ही  हो रहीं है . हालाकि ये  बात बड़ी गहरी है .असल में जब तक वर्गीय चरित्र को नहीं समझा जाएगा तब तक समस्याएं हल होने वाली नहीं हैं. जो जिस वर्ग से आता है वो चाहे न चाहे उस वर्ग के पक्ष में ही कार्य करता है. जिस प्रकार महिलाओं के हित में काम करने के लिए महिला होना जरुरी नहीं है  उसी प्रकार किसी महिला विशेष के आगे बढ़ जाने से महिलाओं कि स्थिति में बहुत सार्थक बदलाव आना लाजिमी नहीं है.इसे आज के भारत की स्थिति  से बहुत अच्छी तरह समझा जा सकता है.इस विषय को विस्तार से उठाने की आवश्यकता है इसलिए इसे फिर कभी के लिए छोड़ता हूँ .   

इस सम्बन्ध में मुझे राष्ट्र पिता महात्मा गांधी याद आते हैं. एक बार उनसे किसी ने पूछ बापू आप हर बात में अहिंसा को महत्व देते हो. अगर किसी लड़की के साथ कोई बलात्कार करे तो वो लड़की कैसे अपनी रक्षा करेगी. अहिंसा के पुजारी गांधी ने कहा - मेरा कहना है कि ऐसी स्थिति में उस लड़की को चाहिए कि वो वो आतातायी को छुरा भोंक दे.' ये थी अहिंसा के पुजारी बापू की महिलाओं के प्रति आदर ओर अधिकार कि भावना. दूसरी तरफ आज के नेताओंका आचरण ओर विचार देख लीजिये . यूँ नहीं है मेरा भारत महान.      
      
انگریزی کے پرسدد شاعر راديارڈ كپلگ نے کبھی بھارت اور انگلینڈ کے ریفرنس میں کہا تھا کہ مشرق مشرق ہے اور مغرب مغرب. یہ دونوں کبھی ایک نہیں ہو سکتے ہیں. لیکن اگر آج وہ زندہ ہوتے تو یہ عجوبہ بھی دیکھ لیتے. آج خواتین کے بارے میں مغربی بھارت کی ریاست ہریانہ کے چودھری جس طریقے سے سوچتے ہیں، اسی طریقے سے بھارت میں جدیدیت کا دروازہ کہے جانے والے مشرقی ریاست سےخون 0 بنگال کی اہم وزیر ممتا بنرجی سوچتی ہیں. دونوں ریاست میں خواتین کے ساتھ عصمت دری کی گھٹناے بڑھی ہیں. جن کے بارے میں ماننييا ممتا بنرجی کا کہنا ہے کہ سماجی كھلےپن کی وجہ سے عصمت دری کہ واقعات میں اضافہ ہوا ہے اور میڈیا انہیں بے وجہ طول دے رہا ہے.
    
کیا غضب ہے کہ سوچ ہے. ہریانہ کے چودھری کا کہنا ہے کہ چامين، برگر کھا کر نوجوانوں میں گرمی پیدا ہو رہی ہے جس کی وجہ سے عصمت دری کہ واقعات ہوتے ہیں اور ممتا دیدی کہہ رہی ہیں کہ سماجی كھلےپن کی وجہ سے ایسے واقعات ہو رہی ہیں. ہم تو سمجھتے تھے کہ بند سماج ہونے کے کارن ایسے واقعات ہوتے ہیں لیکن انہونے تو ساری پرستھاپناو کو الٹ دیا ہے. جب ہمارے دشانايك، ہمارے سیاسی لیڈر ایسی سوچ رکھیں گے تو سمجھا جا سکتا ہے ملک کس سمت میں جا رہا ہے. خاص طور پر جب خاتون راجنيتگي اس میں بھی سب سے تیز طرار اور دبنگ خاتون لیڈر ایسی سوچ کا مظاہرہ کرتی ہے تو خواتین کی نمائندگی کے جواز پر بھی شک ہونے لگتا ہے. آخر آج ملک میں سب سے بااثر سیاستدانوں میں مہلایں ہی حاوی ہیں، پھر بھی خواتین کے حق میں آواز بلند ہونے کی بجائے ان کی آواز عورتوں کے اتپيدكو کی معاون ہی ہو رہی ہے.حالانکہ یہ بات بڑی گہری ہے. اصل میں جب تک کلاس کردار کو نہیں سمجھا جائے گا اس وقت تک مسائل حل ہونے والی نہیں ہیں. جو جس طبقہ سے آتا ہے وہ چاہے نہ چاہے اس طبقے کے حق میں ہی کام کرتا ہے. جس طرح خواتین کے حق میں کام کرنے کے لئے خاتون ہونا ضروری نہیں ہے اسی طرح کسی خاتون خصوصی کے آگے بڑھ جانے سے خواتین کہ صورتحال میں بہت مثبت تبدیلیاں آنا لاجمي نہیں ہے. اسے آج کے بھارت کی صورتحال سے بہت اچھی طرح سمجھا جا سکتا ہے. اس موضوع کو تفصیل سے اٹھانے کی ضرورت ہے اس لئے اسے پھر کبھی کے لئے چھوڑتا ہوں.اس بارے میں مجھے متحدہ والد مہاتما گاندھی یاد آتے ہیں. ایک بار ان سے کسی نے پوچھ باپو آپ ہر بات میں عدم تشدد کو اہمیت دیتے ہو. اگر کسی لڑکی کے ساتھ کوئی زیادتی کرے تو وہ لڑکی کس طرح اپنی حفاظت کرے گی. عدم تشدد کے پجاری گاندھی نے کہا - میرا کہنا ہے کہ ایسی صورت میں اس لڑکی کو چاہیے کہ وہ وہ اتاتايي کو چھرا بھوك دے. ' یہ تھی عدم تشدد کے پجاری باپو کی خواتین کے لئے عزت اور حق کہ جذبہ.دوسری طرف آج کے نےتاوكا رویہ اور خیال دیکھ لیجیے. یوں نہیں ہے میرا بھارت مہان.


2 टिप्‍पणियां:

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  2. 1-मणि बाला - वाकई यह सब मेरे भारत में ही हो सकता है , इसीलिए मेरा भारत महान है .


    2-अब्दुल ह खान आज कल के नेताओं से यही उम्मीद है,ममता जी कुछ तो शर्म करो नारी हो कर नारी का अपमान ,सुना था ओरतों की दुश्मन ओरतें ही होती हैं .सिद्ध कर दिया आप ने.


    3-अमरनाथ मधुर -सुना है बंगाली दुर्गा पूजा बड़ी धूमधाम से मनाते हैं .दुर्गा तो नारी शक्ति का प्रतीक है. ये कैसी दुर्गा भक्त हैं जो औरतों को सामाजिक स्वतंत्रता नहीं देना चाहती है ?


    4-आक्रोश कुमार -शेम यु ममता बनर्जी .

    शैल त्यागी बेज़ार - लोग सिर्फ गाँधी को कोसना जानते हैं जबकि ये नहीं समझते कि समझ में , विचार में , दूरदर्शिता आज का कोई भी नेता या तथा कथित समाज सेवी उनके आस पास भी नहीं फटकता
    है

    दरअसल इन लोगों का मानसिक स्तर इतना है ही नहीं कि ये निष्पक्षता और समानता के स्तर पर बात कर सकें , पशु लाख जगह बेहतर हैं इनसे


    अमरनाथ मधुर - जो नहीं समझते हैं उनको ये बात हमें समझानी है ...


    शैल त्यागी बेज़ार - जी बिलकुल कोशिश तो करनी ही है बाकी किसी के दिमाग के अन्दर घुसा नहीं जा सकता है.

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