सोमवार, 29 अक्टूबर 2012

पशु वध और बकर ईद

बकर ईद पर फेस बुक पर जो आलेख 'बकर ईद' के नाम से पोस्ट किया और जो यहाँ ब्लॉग  पर भी है उस परफेसबुक के विभिन्न ग्रुपों में  काफी प्रतिक्रिया हुई। इस सम्बन्ध में मेरा कहना है कि मेरा मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस  पहुंचाना नहीं रहता लेकिन वक्त की जरुरत के हिसाब से सही बात पर ध्यान दिलाना मैं  अपना कर्तव्य मानता हूँ .इसके कारण कुछ लोगों को बुरा लगता है और कुछ को अच्छा. मेरे लिए सभी  महत्व पूर्ण है. आईये उनके विचारों को जाने और परखें की बात  कितनी दूर तक पहुंची है .

1-कुमार पंकज - क्या कहूँ .............मार्क्स ने सही कहा था.......

2-बी. एल. 'पारस' -पशुओँ के साथ नैतिकता की भी बलि समझो ।।
3-अमित कुमार मिश्र - इंसान तो अब है ही नहीं .

4-बी. एल. 'पारस' -ताउम्र भार ढोता रहा पशु,
बिन कहे सब सहता रहा पशु ।
झुका बदन,कांपते पैर,मजबूर आंखेँ,
जिँदा होकर भी बेजान समझा जाता है पशु ।

5-मनीष कुमार -आहत दिल पर होते अघात को किसने देखा है
हमने तो धर्म के नाम पर मुल्क को टूटते देखा है
धार पर जान रख लोग करते है जाने कितनी रस्मे
हमने बिन रस्मो के आदम को बलि पर चढ़ते देखा है
--इश्मन --

6-बी. एल. 'पारस'- देवताओँ को खुश करने की खातिर,
बलि चढा दिया जाता है पशु ।
मरने के बाद फेँक दी लाश सङक पर,
क्योँ आज इंसान भी बन गया है पशु ।

7-राहुल प्रजापति - अमरनाथ जी सही कहा आपने पर आप बकराईद मनाने वालो के लिए इंसान और धर्म जैसे पवित्र शब्दो का इस्तेमाल मत करो |
सतयुग मे देव, असुर, मानव, किन्नर, दानव आदि जातिया होती थी, आज कलियुग मे भी है...बस फर्क इतना है कि सब के सब अपने आप को इंसान बता रहे है |
मांस खाने वाले असुर है...हिंदुत्व की रक्षा करने वाले देव |धर्म रक्षको की सहायता से जीने वाले मानव,आतंकवादी दानव है |किन्नर तो आप सब जानते ही हो.....सेकूलर |
कल किस जाति का त्योहार है....सब समझ सकते है |और इन असुरो का विनाश हर युग मे निश्चित है |

8-शैल त्यागी बेज़ार - यही इन सब तथाकथित धर्मों का असली रूप है .

10-मनीष कुमार - 'अखबार की खबर है कुर्बानी के लिए लाये गए ऊंट का उत्पात | अब ऊंट भला क्या उत्पात कर रहा है | आदमी उसकी जान ले रहा है और वह जान बचाकर भाग रहा है '|........ यह खूब रहा ....

9-शैल त्यागी बेज़ार - राहुल जी मगर ये पोस्ट किसी धर्म विशेष को लक्षित नहीं करती और जहाँ तक मानस का सवाल है तो फिर अधिकाँश हिन्दू भी इसी श्रेणी में आते हैं

11-राहुल प्रजापति - तो मैने कब कहा कि हिंदुओ मे असुर प्रकृति के लोग नही है....?

12-बी. एल. 'पारस' -मैँ तो पशु बलि का विरोधी हूँ फिर चाहे ये घृणित काम कोई मुस्लिम करे या हिन्दू ।।

13-शैल त्यागी बेज़ार - माफ़ी चाहता हूँ राहुल जी लेकिन मुझे आपके कमेन्ट से ऐसा लगा था इसलिए कहा मैंने , आशा है आप इसे अन्यथा नहीं लेंगे.

14-राहुल प्रजापति - @ साहिल जी अगर कोई हिंदुत्व के लिए कुछ बोल भी दे क्या ये गलत है ?


15-शैल त्यागी बेज़ार - राहुल जी सही और ग़लत कदाचित तर्क और संवेदना के आधार पर ही निर्धारित किया जा सकता है फिर चाहे वह किसी भी जाती या धर्म से संबंद्धित हो .

17-अमरनाथ मधुर - माँसाहार पर चिंतन धर्म के दायरे में न किया जाये. माँसाहार न अपने में सही है और न गलत है.कहा गया है जीव जीवस्य भोजनम. किसी पशु क्या मुझे किसी पेड़ पौधे के काटे जाने में भी आपत्ति है. लेकिन जरुरत के मुताबिक़ दुसरे के अस्तित्व कि रक्षा करते हुए कैसे जीवन यापन किया जाये ये विचारणीय है ?

18-राहुल प्रजापति - मनुष्यो मे भगवान ने सबसे ज्यादा समझ और भावनाए दी है..|जीव जीवस्य भोजनम को हम अपने संदर्भ मे ले ही....क्या यह जरूरी है ?


19-कॉम्प बिरोहर - काश ये सब ख्याल दंगों के वक़्त भी आये ........... काश इन पशुओं के बारे में भी कुछ सोचा जाये .....

20-मंज़र  अब्बास  रिज़वी  
बकरी बोली बकरे से मेमने हमारे .
कितने सुन्दर कितने कोमल प्यारे प्यारे .
बकरा बोला हम तुम और मेमने हमारे .
इक दिन सब होँ जाएँगे अल्लाह को प्यारे. ***
शिक्षित सभ्य समाज से अपना सम्बोधन है.
माँस हमारा ही क्या सबसे प्रिय व्यन्जन है?
इसी विषय पे आज हमारा ये चिन्तन है.***
परिचर्चा मेँ एक भेडिया भी आया था .
बकरे का भाषण सुन कर वो चिल्लाया था.
हमने तो तुमको जस का तस ही खाया था.
मानव ने तो मिर्च-मसाला मिलवाया था.
तलवाया था भुनवाया था पकवाया था.***
बकरा बोला वोट आप को दिलवाएँगे .
इन्सानोँ की जब्त जमानत करवाएँगे/***


21-जावेद  अली  खान - क्षमा करें, मांसाहार हिन्दू धर्म से भी जुड़ा हुआ है, बलि प्रथा, कामाक्षा मंदिर , हिमाचल में मंदिरों में, गुजरात में मोक्षी माता, गोरखपुर में तर्कुल्हावा देवी, मुमाबी में जीवदानी माता, होली पर मांस का सेवन, बंगाल में मछ्ली, साऊथ में मंदिरों में बलि यह सब हिन्दू धर्म का पाखण्ड और गलत बाते हैं जिन्हें बंद होना चाहिए.सौभाग्य की बात है कि भारत में बीफ का ज्यादा चलन नहीं है तो साहब एक बात की ओर मे भी आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा की बेशक भारत मे बीफ खाने का ज़्यादा चलन नही है लेकिन आप यह जानकर हैरान हो सकते हैं कि 2012 में भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा गोमांस निर्यात करने वाला देश बन जाएगा।
यूएसडीए की विदेशी कृषि सेवा के आंकड़े के मुताबिक इस साल के अंत तक भारत ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़ते हुए 15 लाख मीट्रिक टन गोमांस का निर्यात करेगा। जानकारों के मुताबिक भारत से गोमांस के निर्यात के आंकड़े में तीन सालों में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है। तीन साल पहले भारत ने 6.5 लाख मीट्रिक टन से भी कम गोमांस का निर्यात किया था।

22-हसन  इकरार - अमरनाथ  मधुर - जी  भारत  मैं  लाखों  इन्सान  मारे  जाते  हैं  , जिंदा  जलाये  जाते  हैं  .. कभी  उनके  बारे  में  सोचा ? सिर्फ  जानवरों  के  बारे  में  ही  सोचते  हो  ..?

23-अमरनाथ मधुर -भाई जी ऊपर मैंने कहीं गाय का नाम भी नहीं लिया है आप क्यूँ सफाई दे रहें हैं मैंने तो ऊंट का जिक्र किया है और मैं अंधाधुंध  पशु वध के विरुद्ध हूँ . मेरा इस या उस धर्म से कोई सरोकार नहीं है. 

24-अनिश  शर्मा -सीधी बात नो बकवास जो बच्चा किसी बेजुबान जानवर का गला अपने सामने रेतते देखेगा उस पर इन द्रश्यों का क्या असर पड़ेगा....

25-परवेज़  अहमद   -1000 साल  तक  हिन्दू  धर्म  के  लोगो  ने  गौ -मांस  खाया  और  कितिने   आज  भी  खाते  हैं . कितने  नेताओं  की  आमदनी  जानवरों  के  मैटीरियल  से  ही  चलती  है .. जैसे  की  लेदर    एक्सपोर्ट . उसमें  आपके  लीडर्स  भी  शामिल  हैं . दलित  समाज  की  भी  परंपरा  ये  है  कि  गौ -मांस  खाते  हैं . लेकिन  आप  होते  कौन  हो  उन्हें  रोकने  वाले . गौ , भैंस , आदि  कि  बलि  भी  दी  जाती  है  आपके   यहाँ , कभी  उनके  खिलाफ  कुछ  कर  पाए  हो ? या  पेंट  गीली  हो  जाती  है  उन्हें  रोकने  से ?
पहले  आपने  लोगों  को  रोकने  कि  हिम्मत  दिखाओ  फिर  मुसलमानों  को  और  दुसरो  को  कुछ  कहना .
और  ये  बुजदिल  लोग  जो  आये   दिन  मुसलमानों  पर  अटैक  कर  रहें  हैं  और  उनके  जानवर  चीन  ले  रहें  हैं , साथ  ही  इन्हें  जान  से  मार  रहें  हैं  और  उनसे  लूटपाट  कर  रहें  हैं . शर्म  आनी  चाहिए  आपको  कि  aap दूसरों  के  मामलों  में  अदंगें  डालते  हो .
और  पहले  ये  सब  लिखने  से  पहले  इस्लाम  को  डीटेल  में  पढो . अपने  विचार  से  आप  दूसरो  को   राज़ी  नहीं  कर  सकते . आप  अपने  साथ  साथ  दूसरो  का  ज़ेहन  भी  बिगाड़  रहे  हो  अमरनाथ  भाई .


26-अमरनाथ  मधुर - आप बहुत नाराज हो गए हैं परवेज भाई .एक बात बताईये जो बुराईयाँ हमारे हिन्दू समाज में हैं अगर वही इस्लाम में भी हैं तो आपको उसे कबूलने की जरुरत क्या थी .हम तो समझते हैं जरुर आपको कुछ अच्चायियाँ दिखाई दी होंगी जो हमें नहीं दिखाती हैं. वैसे मैं इस या उस धर्म के न पक्ष में हूँ न खिलाफ हूँ .मुझे तो सर्वहित की दरकार है जिसमें हिन्दू मुसलमान ही नहीं जानवर भी शामिल हैं.जियो और जीने दो.


27-परवेज़ अहमद - मैं  नाराज़  बिलकुल  नहीं  हूँ  अमरनाथ  भाई . ये  कोई  बुरे  का  काम  नहीं  है . जैसा  कि  मैंने  कहा  कि  इस्लाम  के  बारे  में  लिखने  से  पहले  आपको  इस्लाम  को  समझना  होगा . क़ुरबानी  क्यूँ  करी  जाती  है  ये  अक्सर  मुस्लमान  बताने  में  असफल  रहते  हैं . फिलहाल  मैं  भी   हूँ . लेकिन   अगर  मैं  आपको  किस्सा  बता  भी  दूँ  तब  भी  मैं  जानता  हूँ  कि  आप  नहीं  मानने  वाले . खैर  उसमें  मेरा  कोई  नुकसान  नहीं .मैं  बस  इतना  कहना  चाहता  हूँ  कि  अगर  आप  उन  लोगों  को  रोक  सकते  हो   जो   बलि  चढाते  हैं  तो  रोको , उन  नेताओं  को  रोक  सकते  हो  जिनका  कारोबार  जानवरों  कि  खाल , आदि  चीज़ों  से  चल  रहा   है  तो  रोको . अगर  नहीं  रोक  सकते  तो  ये  अनाप -शनाप  भी  मत  लिखो .
जैसे  कि  आपने  कहा , मैं  भी  कहता  हूँ , जीयो  और   जीने दो .


28-अमरनाथ  मधुर - भाई जी ऊपर मैंने कहीं गाय का नाम भी नहीं लिया है आप क्यूँ सफाई दे रहें हैं मैंने तो ऊंट का जिक्र किया है और मैं अंधाधुंध पशु वध के विरुद्ध हूँ . मेरा इस या उस धर्म से कोई सरोकार नहीं है.


  • 29-भूपट शूट -पोस्ट तो बहुत बढ़िया हैं. मगर मुझे तो इस भी हेरानी हैं कि इस जमाने में भी लोग बछड़े के ऐसे पहनाये गए कपड़े भी पसंद करने के साथ सहन भी कर रहें हैं क्या.





30परवेज़  अहमद-  हमारे  यहाँ  ऊंट   की  क़ुरबानी  जायज़  है  चाहे  आप  उसे  ठीक  समझो  या  नहीं .

समुंदर  सिंह  कंडेरा  ये  बल  ठाकरे  है  क्या ?

31-निज़कत  खान - अमरनाथ  मधुर  भाई - मुबारकबाद और आलोचनाओ का संगम लिए ईद का दिन खत्म हो गया ! अगले साल फिर ईद का दिन आएगा और ऐसे ही धूम धाम से मनेगा ! अमेरिका में मनाये जाने वाला त्योहार “थैंक्स गिविंग डे” जो हर साल नवंबर के चौथे बृहस्पतिवार को मनाया जाता है ! इस अवसर पर लगभग हर अमेरिकी परिवार में टर्की (एक प्रकार का पक्षी) पकाया जाता है और उसकी पार्टी होती है। अब यदि मान लें कि 20 करोड़ अमेरिकी परिवारों में यह थैंक्स गिविंग डे मनाया जाता है और एक परिवार में यदि औसतन चार सदस्य हों तो कम से कम 5 करोड़ टर्कियों को इस दिन मारकर खाया जाता है… यदि किसी को पता हो कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने कभी टर्कियों के इस बड़े पैमाने पर संहार के खिलाफ़ कुछ छापा हो या किसी फेस्बुकिये आलोचक का कोई लेख मिले तो अवश्य बताएं !


32-निज़कत  खान - दुनिया के तमाम धर्मो और संस्कृतिओं को इस्लामिक संस्कृति से खतरा है, इस्लामिक संस्कृति में तमाम धर्मों, संस्कृतिओं को तार्किक आधार पर खत्म करने की शक्ति है, ये बात सब पर ऐयाँ है, इसीलिए अमेरिका की किसी बात का विरोध नही होता, क्योंकि अमेरिका इस्लाम विरोध का अगुआ है, इंसानों से ज्यादा पशु पक्षियों की रखवाली 'peta' ने कभी इस फेस्टिवल का विरोध नही किया, लेकिन ईद पर कुर्बानी के बारे में बड़े बड़े लेख मिल जायेंगे, अमेरिका में गाय उनका प्रमुख पशु है जिसका मांस खाया जाता है, लेकिन भारत की हिन्दू तंजीमों की तरफ से कभी कोई आवाज़ नही उठी, बल्कि अमेरिका उनकी नज़र में उनका सहयोगी है,


33-सुल्तान  बख्श - एक  प्राचीन  घोटाला , क्या  आप  जानते  हैं  की  राम  जब  14 साल  के  लिए  वनवास  गये  तो  अपने  साथ  भरी  मात्र  में  अयोध्या  से  सोने  और  चंडी  के  अभोसन  ले  गये  थे , राम  ने  योधन  को  लूट  लूट  कर  खोखला  कर  दिया   था  और  Ram  राज्य  में  जनता  त्रस्त  रही , न   इस्त्री  सुरछित  रही  न  किसी  को  न्याय  मिला , न  इंसाफ  होता  था  न  अयोध्या  का  विकाश  ही  करवाया ... जबकि  रावन  एक  भ्रस्चार  मुक्त  रजा  था  .. उसने  लंका  का  इतना  विकास  किया  था  कि  पूरी  कि  पूरी  लंका  को  सोने  कि  बना  दिया  था ... राम  राज्य  में  सभी  प्रेषण  रहे . राम  कि  वजह  से  रजा  दशरथ  कि  मृत्यु  हो  गयी , लछमन  कि  ज़िन्दगी  बर्बाद  हो  गयी , लछमन  कि  पतनी  भी  परेशां  रही , सीता  का  भी  राम  के  होते  हुए  कि दफ़न   हो  गया  (यानि  रामराज्य  में  जनता  सुरछित  नहीं  थी  स्त्रियों  का  किडनैप   असुर  कर  लेते  थे ) राम  राज्य  में  सीता  को  एक  भी  दिन  रानियों  वाला  नसीब  नहीं  हुआ  पहले  14 साल  tak     जंगल  में  कष्ट   में  जीवन   व्यतीत  की  फिर  दुबारा  उनको  जंगल  में  राम  ने  गर्व्भ्वती  अवस्था  में  खेद  दिया , रामायण  के  युद्ध  में  राम  और  हनुमान  ने  मिलकर  खूब  भारस्ताचार  किया  और  अयोध्या  से  सैनी को  को  बुलाकर  लंका  से  युद्ध  करने  के  बजे  बंदरो  को  लेकर  लडाई  किया  और  युद्ध  में  खर्चा  दिखाकर  काफी  सारा  धन  घपला  कर  लिया ... राम  जे  लंका  को  लूटा , सुग्रीव  को  लूटा , बलि  को  लूटा , लेकिन  अयोध्या  की  जनता  को  एक  फूटी  कोडी  भी  नहीं  दिया ... इसलिए  दिवाली  पर  इस  भ्रस्ताचारी  रजा  राम   की  वापसी  में  घी  के  दिए  जलना  मूर्खता  होगी ...

34-Abdaal   Khan -  I   think  hindu religion is made by only human...
Q k iske kanoon aajtak badalte jarahe hai...agar ye kisi god ka hota to itni galtiya nahi hoti aur log isse divert nahi hote.
1)vidhwa aurat ki dobara shadi nahi kar sakte.
2)admi dusri shadi nahi kar sakta.
3)talaak ka wajood nahi phir bhi aaj ise hindu religion ke log use karte hai......!
4)non-veg ki parmission nahi phir bhi 70% hindu khate hai......!
5)Sati ki rasm.
6)unch neech .zaat paat isi dharm ki den hai......!
And much more..............



35-मुबारिक  मंसूरी - अमरनाथ  मदुर  फेस  बुक  पर  अच्छे  कमेन्ट  करते  हैं  आप  क़ुरबानी  को  पशु  क्रूरता  का  नाम  देने  वाले  आपको  मैं  याद  दिलाना  चाहूँगा  की  इंडिया  में  89% लोग  नॉन  वेज  हैं  और  इतनी   आबादी   इंडिया  में  मुसलमानों   की  नहीं   ये   वो   लोग  हैं  जो   स्वाद   के  लिए   मीत   खातें   हैं  जबकि   इस्लाम   और इसाई   के  अलावा   सभी    धर्मों   में  नॉन  वेज   प्रतिबंधित   है   फिर  क्या   वजह   है   जो   आपके   लोग  अपने    को  रोक   नहीं  पाते   और  पाप करते  हैं  .....हमारा    तो    धर्म    किरबानी    मांगता    है .  हुकुम    है   शरियत    का  तो    हम    करते    थे    और  करते    रहेंगे        


36-मुबारिक  मंसूरी - शायद  आपको   किसी  ने  दावत  पर  नहीं  बुलाया      इसलिए  आपको  .....?





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