सोमवार, 17 दिसंबर 2012

कविता -दिसम्बर लौट आया है !

कविता -दिसम्बर लौट आया है !

[लाहौर से दोस्त 'उस्मान मुनीर' ने पैगाम भेजा है|]

'उससे कहना दिसम्बर 

लौट आया है !

हवाएं सर्द हैं और वादियाँ 

भी धुंध में गुम हैं !

पहाड़ों ने बरफ की शाल

फिर से ओढ़ रखी है !

... सभी रस्ते तुम्हारी याद 

में पुर 'नम से लगते हैं !

जिन्हें शरफ -ए - मुसफत था !

वो सारे कार्ड्स , वो परफूम , 

वो छोटी सी डायरी !

वो टेरिस , वो चाय , 

जो हम ने साथ में पी थी !

तुम्हारी याद लाते हैं 

तुम्हें वापिस बुलाते हैं !

उससे कहना के देखो यूँ 

सताओ न !

दिसम्बर लौट आया है !

सुनो !

तुम लौट आओ न ....!

نظم - دسمبر لوٹ آیا ہے! 

[لاہور سے دوست 'عثمان منیر نے پیغام بھیجا ہے |] 

'اس سے کہنا دسمبر 

لوٹ آیا ہے! 

ہوائیں سرد ہیں اور واديا 

بھی دھدھ میں گم ہیں! 

پہاڑوں نے برپھ کی شال 

پھر سے اوڑھ رکھی ہے! 

.. تمام رستے تمہاری یاد 

میں زیادہ 'نم سے لگتے ہیں! 

جنہیں شرپھ - اے - مسپھت تھا!

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