शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

हाथ में पत्थर

              
  हम लोग एक पल जो जरा हँस हँसा लिए, लोगों ने अपने हाथ में पत्थर उठा लिए

         'प्रेमिका के साथ बन्द कमरे में रंगरेलिया मनाते प्रेमी युगल गिरप्तार', 'खाली मकान में रंगरलियॉं मनाते छात्र-छात्रा को मौहल्ले वालों ने धुना', 'प्रेमी प्रेमिका को आपत्ति जनक स्थिति में पुलिस ने बन्द कमरे से पकड हवालात में बन्द किया', आजकल ऐसे समाचार अखबारों की रोज ही सुर्खियॉं बनते हैं। लोग चटकारें ले लेकर पढ़ते हैं और मुँह बिचकाते रहते हैं कि क्या जमाना आ गया है, लाज शर्म तो बची ही नहीं है। पुलिस ऐसे लोगों का कुछ इलाज क्यूँ नहीं करती है। जबकि पुलिस जितनी तत्परता से ऐसे मामलों में कार्यवाही करती है उतनी तत्परता से सामुहिक बलात्कार, हत्या, डकैती या अपहरण के मामले में भी नहीं करती है। बल्कि यूँ कहिये कि सबसे ज्यादा तेजी इसी मामलें में दिखाती है। अब सोचने की बात है कि एक प्रेमी और प्रेमिका बन्द कमरे में मिल रहे हैंकोई जुर्म तो नहीं कर रहें हैं .सब चुपचाप हो रहा है.  जाहिर है  अपनी मर्जी से ही मिल रहें होंगें कोई जोर जबरदस्ती तो हो नहीं रही है। भला इसमें कानून की कोन सी धारा भंग हो रही है जिसके अपराध में पुलिस पकडकर ले जा रही है और मौहल्ले वाले पहलवानी के दॉंव दिखा रहे हैं? क्या ये अपराध है? लोग कहते हैं कि इसके कारण उनके घर की बहु बेटियॉं बिगड जायेंगी?इसका मतलब है कि उनके घर का वातावरण दूषित है वरना जब वो इतने नैतिक आचरण वाले हैं तो उनके घर की बेटियॉं क्यूँ बिगड जायेंगी? यानि कि विश्वास खुद पर नहीं है और सजा दूसरों को दे रहे हैं। ऐसे लोग अपनी बहु बेटियों के चरित्र पर भी शंका कर रहे है वरना ऐसी नौबत ही नहीं आती कि उन्हें उनकी पहरेदारी करनी पड़े . और ये पुलिस जो हर वक्त सोयी रहती है वो कभी कोई सही काम करेगी या कभी नहीं करेगी ? मैं पूछता हूँ कि किसी के बन्द कमरे में घुसना, उसके अन्तरंग पलों में हस्तक्षेप करना अपराध है या नहीं है? मेरी समझ में ऐसा करना अपराध है। किसी के घर में इकटठे होकर जबरन घुसना बलवा करना है। अपराधी वो लोग हैं जो किसी को बन्द कमरे में भी चैन से नहीं रहने देते है। ऐसे लोगों के खिलाफ तो कोई कार्यवाही होती नहीं है और  जो पीड़ित हैं उल्टे उन्हें ही अपमानित किया जाता है ,उन्हें ही जेल भेज जाता है .इसके खिलाफ भी युवा एक दिन जरूर उठ खड़े होंगे. ये तालिबानी बर्ताव ज्यादा दिन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा .
                मैं वकील नहीं हूँ जन कवि हूँ.इसलिए साफ़ कहता  हूँ मैं क़ानून की धारा नहीं जानता, मैं आमजन की बात जानता हूँ . कुछ  ऐसे  लोग जो नैतिकता के स्वयंभू पहरेदार बने हैं उनसे मेरा सीधा सवाल है कि उन्हें किस क़ानून के अंतर्गत ये अधिकार प्राप्त है कि वे किसी के मकान में जबरन घुसकर प्रेमी युगल  के साथ  दुर्व्यवहार  करें ? या  पुलिस  ऐसे मुठमर्द लोगों के  खिलाफ  कार्यवाही  न कर के मासूम प्रेमियों को सताए और उन्हें ही जेल भेज दे ? नाबालिग से बलात्कार, मंदबुद्धि  से बलात्कार, बहला  फुसलाकर  बलात्कार ये जो कानूनन और सामाजिक अपराध  हैं उनके लिए अपराधियों को दुसरे अपराध की तरह कानूनी के अनुसार सजा मिलेगी .लेकिन इसका ये मतलब  नहीं है कि आप किसी घर में घुसकर ये जांच करे कि जो प्रेमी युगल मिल रहें हैं वे बालिग़ हैं या नाबालिग ? न ही आपको ये जानने का हक़ है कि वे सहमति से मिल रहे  हैं या असहमति से मिल रहें हैं ?  जबरिया सहवास जुर्म है और पीड़ित के बिना मांगें भी पीड़ित कि मदद  करना सबकी जिम्मेदारी बनती है लेकिन निन्यानवे प्रतिशत मामलों में पीड़ित की मदद नहीं होती बल्कि निर्दोषों का उत्पीडन ही  होता है . फिर ये तो जग जाहिर है कि समाज या पुलिस गैर शादी शुदा के मिलन को सहर्ष स्वीकृत नहीं देगा. इस मामले में तमाम तरह के दक्षिण पंथी एक हैं वो चाहे इस्लामी हों या हिन्दू, संघी हो या तालिबानी. मैं भी इस साम्प्रादायिक एकता को बेनकाब करने में जुटा हूँ. और ये समझाने में लगा कि ओ प्रेम करने वालो! प्रेम का न कोई धर्म है न जाति, न कोई देश है न संस्कृति. प्रेम इन सारे बंधनों में जकड़ा है और आप को ये सारे बंधन तोड़ कर ही अपने सपनों का नया संसार बसाना है. आप कोई क़ानून नहीं तोड़ रहे हो . प्रेम के लिए स्वीकृति किसी क़ानून में जरूरी नहीं है  .प्रेम के लिए तुम्हारे दिलों कि स्वीकृति काफी है उसका सम्मान तुम भी करना हम भी करेंगें .

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