आँख मूँद कर करो ना भक्ति खोलो आँख उजाले में
भारत मुर्दाबाद जो बोले बंद करो वो ताले में |
अब नकाब इनके चेहरे से रोज सरकता जाएगा
ये शिक्षालय में आये हैं, बैठे नहीं शिवाले में |
रोज पियें ये चिलम बैठ कर गांजे भांग धतूरे की
शौचालय की सोच लिए हैं, बात करेंगे घूरे की |
ये गरीब गुरबा के बेटे पढ़ते देख नहीं सकते
ये चाहेंगे भैंस चरावें जा के मुखिया भूरे की |
भारत मुर्दाबाद जो बोले बंद करो वो ताले में |
अब नकाब इनके चेहरे से रोज सरकता जाएगा
ये शिक्षालय में आये हैं, बैठे नहीं शिवाले में |
रोज पियें ये चिलम बैठ कर गांजे भांग धतूरे की
शौचालय की सोच लिए हैं, बात करेंगे घूरे की |
ये गरीब गुरबा के बेटे पढ़ते देख नहीं सकते
ये चाहेंगे भैंस चरावें जा के मुखिया भूरे की |
0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें