आजकल केंद्र सरकार की खूब बखिया उधेडी जा रहीं हैं. रोज एक न एक घोटाला उजागर हो रहा है. मीडिया केजरीवाल को हीरो बनाए है .बनाए भी क्यूँ न जो काम मुख्य विपक्षी दल को करना चाहिए था उसे कभी मीडिया, कभी रामदेव, कभी केजरीवाल, और कभी अन्ना हजारे जैसे गैर राजनीतिक लोग कर रहें हैं. कांग्रेस की छीछी लेदर होने भाजपा खुश होती है लेकिन उसकी ख़ुशी के गुब्बारे की हवा तभी निकालने लगती है जब अगले ही दिन भाजपा के नेताओं के नाम भी ऐसे घोटालों में शामिल पाये जाते हैं या पहले से ही वे अपने घोटालों में लिप्त मिलते हैं.इसमें कोई शक नहीं है कि मीडिया काफी अच्छा काम कर रहा है लेकिन टी वी चैनल की बहसें देखकर कभी कभी लगता है कि वह निष्पक्ष नहीं है. वह पहले से ही तय कर लेता है कि किसे स्याह दिखाना है और किसे सफ़ेद दिखाना है. फिर वह वैसे ही बहस को संचालित करता है. अक्सर ऐसा देखा गया है कि टी वी पर बहस का एंकर स्वयं लम्बा भाषण देता है फिर जबाब से भी लम्बा सवाल करता है और जब उस सवाल का जबाब दिया जाता है तो उसे सुनने की बजाय एंकर बीच में ही स्वयं तर्क करने लगता है.आरोपी को अपनी बात कहने ही नहीं दी जाती है. मिडिया न तो नेता विपक्ष है, न मजिस्ट्रेट है, न वकील है लेकिन उसका व्यवहार ऐसा होता है जैसे वह धर्मराज है सारा सच उसे ही पता है और वही न्याय कर सकता है वही सुशासन दे सकता है. पता नहीं मिडिया ने इतनी सारी जिम्मेदारी क्यूँ अपने कन्धों पर उठा ली है. क्या यह बेहतर न होगा कि वह सिर्फ संवाद का एक बेहतर मंच उपलब्ध कराये जहां हर कोई बिना किसी दबाव के अपनी बात कह सके ?
آج کا میڈیا
Manish Kumar, Ganesh Gupta, Moumita Bhattacharya and 14 others like this.
जवाब देंहटाएं1-Aar Ravi Vidrohee लम्बा भाषण देता है ? जी नहीं....मधुर जी, सबसे जिय्दा तो वो ही ची चिलप्पो मचाता हैं ....पुरे प्रोग्राम में ऐसे नांचता रहेगा जैसे तेल पर जलेबी... बल्कि ऐसा लगता हैं एंकर जो चाहता हैं वैसा ही बुलवाना चाहता हैं.. ...कम्बखत काम की बात आते ही ' दो मिनिट बाद फिर मिलते हैं " कहकर विज्ञापनों की बौछार करवा देता हैं ....
2-Amarnath Madhur 'ऐसे नांचता रहेगा जैसे तेल पर जलेबी... ' हा हा कवि जी बिलकुल मौलिक उपमा ढूंड कर लाये हो बहुत खूब, मजा आ गया .
3-Shraddhanshu Shekhar Sab prayojit programme hai
4-himanshu Rai बिना प्रायोजक कि खबर :
"हिमांशु राय ने कहा कि फिर ना कहना बताया नहीं............"
पढते और सुनते हों नहीं और तैयार हों जाते हों विचारक, भाषण बाज और ना जाने क्या क्या बनने.....
अब् जिसे देखो खता है इलेक्ट्रोनिक मीडिया भांड है..... बिका हुआ है ......... अगर ये सच होता तो अभी तक तो मीडिया बजा ही देता सब कहने वालो कि बेंड........... पर ये हिमांशु राय कुछ नया ही बता रहे है देखिये :
प्रेस अधिनियम के दायरे से बहार हें इलेक्ट्रोनिक मीडिया और सारे समाचार चेनल.....
और फिर भी इनका बडप्प्न देखिये इतने आक्रोश के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं देते ...जानते है क्यों.....
उनके पास रिकॉर्ड किया हुआ होता है वैधानिक चेतावनी कि तरह कि : " खबर के इस भाग के प्रायोजक है बिरला व्हाईट सीमेंट " .......
अब् भला बताओ उसमे उनकी क्या गलती उन्होंने तो कह दिया कि प्रायोजित खबर है.....
वे इतने पारदर्शी है कि समाचार संक्षेप और दिन भ्रर कि खबरों कों बताने में जितनी देर नहीं करते जितनी देर उस खबर के पहले ये दिखाते है कि दिन भ्रर कि खास खबरों के प्रायोजक है "झटाक परफ्यूम"...
सो आल इज वेल........ जेसी प्रजा वेसा राजा और वेसा ही उसका तन्त्र........... जय हों....... झटाक ......
5-Pankhuri Sinha umda article
ji haan, roz naye ghotale,
6-Manish Kumar behatrin hai ........ ekdum sahi kaha aapne,... vipksh hi kyo koi neta ho Ghotala uska janmsidh adhikaar hai islie chup rehte hai ...... aur media ke baare me ek dum satik jaan padta hai ...