रविवार, 14 अक्टूबर 2012

आज का मिडियाآج کا میڈیا


      आजकल केंद्र सरकार की खूब बखिया उधेडी जा रहीं हैं. रोज एक न एक घोटाला उजागर हो रहा है. मीडिया केजरीवाल को हीरो बनाए है .बनाए भी क्यूँ न जो काम मुख्य विपक्षी दल को करना चाहिए था उसे कभी मीडिया, कभी रामदेव, कभी केजरीवाल, और कभी अन्ना हजारे जैसे गैर राजनीतिक लोग कर रहें हैं. कांग्रेस की छीछी लेदर होने भाजपा खुश होती है लेकिन उसकी ख़ुशी के गुब्बारे की हवा तभी निकालने लगती है जब अगले ही दिन भाजपा के नेताओं के नाम भी ऐसे घोटालों में शामिल पाये जाते हैं या पहले से ही वे अपने घोटालों में लिप्त मिलते हैं.इसमें कोई शक नहीं है कि मीडिया काफी अच्छा काम कर रहा है लेकिन टी वी चैनल की बहसें देखकर कभी कभी लगता है कि वह निष्पक्ष नहीं है. वह पहले से ही तय कर लेता है कि किसे स्याह दिखाना है और किसे सफ़ेद दिखाना है. फिर वह वैसे ही बहस को संचालित करता है. अक्सर ऐसा देखा गया है कि टी वी पर बहस का एंकर स्वयं लम्बा भाषण देता है फिर जबाब से भी लम्बा सवाल करता है और जब उस सवाल का जबाब दिया जाता है तो उसे सुनने की बजाय एंकर बीच में ही स्वयं तर्क करने लगता है.आरोपी को अपनी बात कहने ही नहीं दी जाती है. मिडिया न तो नेता विपक्ष है, न मजिस्ट्रेट है, न वकील है लेकिन उसका व्यवहार ऐसा होता है जैसे वह धर्मराज है सारा सच उसे ही पता है और वही न्याय कर सकता है वही सुशासन दे सकता है. पता नहीं मिडिया ने इतनी सारी जिम्मेदारी क्यूँ अपने कन्धों पर उठा ली है. क्या यह बेहतर न होगा कि वह सिर्फ संवाद का एक बेहतर मंच उपलब्ध कराये जहां हर कोई बिना किसी दबाव के अपनी बात कह सके ?

آج کا میڈیا

آج کل مرکزی حکومت کی خوب بكھيا ادھےڈي جا رہیں ہیں. روز ایک نہ ایک گھوٹالہ اجاگر ہو رہا ہے. میڈیا كےجريوال  کو ہیرو بنائے ہے. بنائے بھی کیوں نہ جو کام کی مخالف جماعت کو کرنا چاہئے تھا اسے کبھی میڈیا، کبھی رام دیو، کبھی كےجريوال، اور کبھی انا ہزارے جیسے غیر سیاسی لوگ کر رہے ہیں. کانگریس کی چھيچھي لےدر ہونے بی جے پی خوش ہوتی ہے لیکن اس کی خوشی کے غبارے کی ہوا اس وقت نکالنے لگتی ہے جب اگلے ہی دن بی جے پی کے لیڈروں کے نام بھی ایسے گھوٹالوں میں شامل پائے جاتے ہیں یا پہلے سے ہی وہ اپنے گھوٹالوں میں ملوث ملتے ہیں. اس میں کوئی شک نہیں ہے کہ میڈیا کافی اچھا کام کر رہا ہے لیکن ٹی وی چینل کی بحثیں دیکھ کر کبھی کبھی لگتا ہے کہ وہ غیر جانبدار نہیں ہے. وہ پہلے سے ہی طے کر لیتا ہے کہ کسے سیاہ دکھانا ہے اور کسے سفید دکھانا ہے. پھر وہ ویسے ہی بحث کو چلایا کرتا ہے. اکثر ایسا دیکھا گیا ہے کہ ٹی وی پر بحث کا اینکر خود طویل تقریر کرتا ہے پھر جواب سے بھی لمبا سوال کرتا ہے اور جب اس سوال کا جواب دیا جاتا ہے تو اسے سننے کی بجائے اینکر درمیان میں ہی خود دلیل کرنے لگتا ہے. ملزم کو اپنی بات کہنے ہی نہیں دی جاتی ہے. میڈیا نہ تو لیڈر اپوزیشن ہے، نہ مجسٹریٹ ہے، نہ وکیل ہے لیکن اس کا رویہ ایسا ہوتا ہے جیسے وہ دھرمراج ہے سارا سچ اسے ہی پتہ ہے اور وہی انصاف کر سکتا ہے وہی حکومت دے سکتا ہے. پتہ نہیں میڈیا نے اتنی ساری ذمہ داری کیوں اپنے کندھوں پر اٹھا لی ہے. کیا یہ بہتر نہ ہوگا کہ وہ صرف بات چیت کا ایک بہتر پلیٹ فارم فراہم کرائے جہاں ہر کوئی بغیر کسی دباؤ کے اپنی بات کہہ سکے؟

1 टिप्पणी:

  1. Manish Kumar, Ganesh Gupta, Moumita Bhattacharya and 14 others like this.

    1-Aar Ravi Vidrohee लम्बा भाषण देता है ? जी नहीं....मधुर जी, सबसे जिय्दा तो वो ही ची चिलप्पो मचाता हैं ....पुरे प्रोग्राम में ऐसे नांचता रहेगा जैसे तेल पर जलेबी... बल्कि ऐसा लगता हैं एंकर जो चाहता हैं वैसा ही बुलवाना चाहता हैं.. ...कम्बखत काम की बात आते ही ' दो मिनिट बाद फिर मिलते हैं " कहकर विज्ञापनों की बौछार करवा देता हैं ....

    2-Amarnath Madhur 'ऐसे नांचता रहेगा जैसे तेल पर जलेबी... ' हा हा कवि जी बिलकुल मौलिक उपमा ढूंड कर लाये हो बहुत खूब, मजा आ गया .

    3-Shraddhanshu Shekhar Sab prayojit programme hai
    4-himanshu Rai बिना प्रायोजक कि खबर :

    "हिमांशु राय ने कहा कि फिर ना कहना बताया नहीं............"

    पढते और सुनते हों नहीं और तैयार हों जाते हों विचारक, भाषण बाज और ना जाने क्या क्या बनने.....

    अब् जिसे देखो खता है इलेक्ट्रोनिक मीडिया भांड है..... बिका हुआ है ......... अगर ये सच होता तो अभी तक तो मीडिया बजा ही देता सब कहने वालो कि बेंड........... पर ये हिमांशु राय कुछ नया ही बता रहे है देखिये :

    प्रेस अधिनियम के दायरे से बहार हें इलेक्ट्रोनिक मीडिया और सारे समाचार चेनल.....

    और फिर भी इनका बडप्प्न देखिये इतने आक्रोश के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं देते ...जानते है क्यों.....

    उनके पास रिकॉर्ड किया हुआ होता है वैधानिक चेतावनी कि तरह कि : " खबर के इस भाग के प्रायोजक है बिरला व्हाईट सीमेंट " .......

    अब् भला बताओ उसमे उनकी क्या गलती उन्होंने तो कह दिया कि प्रायोजित खबर है.....

    वे इतने पारदर्शी है कि समाचार संक्षेप और दिन भ्रर कि खबरों कों बताने में जितनी देर नहीं करते जितनी देर उस खबर के पहले ये दिखाते है कि दिन भ्रर कि खास खबरों के प्रायोजक है "झटाक परफ्यूम"...

    सो आल इज वेल........ जेसी प्रजा वेसा राजा और वेसा ही उसका तन्त्र........... जय हों....... झटाक ......

    5-Pankhuri Sinha umda article
    ji haan, roz naye ghotale,


    6-Manish Kumar behatrin hai ........ ekdum sahi kaha aapne,... vipksh hi kyo koi neta ho Ghotala uska janmsidh adhikaar hai islie chup rehte hai ...... aur media ke baare me ek dum satik jaan padta hai ...

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