संघ को लगता था कि भाजपा उसके आदर्श हिंदुत्व के रास्ते से भटक गयी है,उसके नेता संघ के निर्देशों का पालन नहीं करते हैं. इसीलिए उसने अपने आज्ञाकारी जनाधारहीन नेता [जो नेता कम व्यवसायी ज्यादा है] नितिन गडकरी को भाजपा के अध्यक्ष पद पर बिठा दिया. कहीं न कहीं ये बात भी मन में रही होगी कि वो काफी भरकम हैं किसी के हिलाये आसानी से हिलेंगें भी नहीं .[ जिसका कारोबार इतना बड़ा है उसके आर्थिक और व्यावसायिक वजन का अंदाजा लगाया जा सकता है ] उसके दूसरे कार्यकाल की ताजपोशी की भी पूरी तैयारी हो चुकी हैं लेकिन जब इस गडकरी के गड़बड़झाले उजागर हुए तो मोहन भागवत की भागवत कथा पर भी शंका होने लगी है . आखिर शुचिता, सेवा और समर्पण का राग अलापने वाले संगठन के प्रमुख के खासमखास इतने भ्रष्ट हैं तो उसके प्रमुख ही नहीं पूरे संगठन की नैतिकता सवालों के घेरा में हैं . अब भागवत कथा कैसे चलेगी ? अब इसका बस एक ही रास्ता है कि मोहन भागवत स्वयं भाजपा की कमान संभाल लें .उधर राजनीति का शातिर खिलाड़ी नराधम मोदी बड़ी चतुराई से अपनी गोटी आगे बढ़ा रहा है .वो यह एहसास करने में सफल हो गया है कि भाजपा और संघ के पास उससे बेहतर राजनीतिक खिलाड़ी कोई नहीं है. आज की तारीख में संघ कि सारी शक्ति एक तरफ है और नरेन्द्र मोदी एक तरफ है . तब भी उसका पलड़ा भारी दिखता है. लगता है आडवानी को तो अटल बिहारी बनने से संघ ने रोके रखा लेकिन मोदी अड़ियल टट्टू की तरह उसके काबू में आने वाला नहीं है.भारत की राजनीति में सबसे बड़ी बात इस समय यह देखने में आ रही कि विपक्ष का दायित्व निभाने में पूरी तरह विफल भाजपा कि राह सत्ता पाने के लिए जितनी आसान होती जाती है उसके नेता उसके रास्ते में उतने ही बड़े गड्ढे खोदते दिखाई देते हैं . उनमें होड़ लगी है कि कौन किसको पहले धक्का दे कर गड्ढे में गिराये. दूसरी तरफ देश का यह हाल है कि जनता चाहती है कि सारे नेता किसी बड़े गड्ढे में गिरा दिए जाएँ और कोई केजरीवाल कोई अन्ना उसके ऊपर बड़ा पत्थर ढक दे.
आपको मालूम ही है कि आर एस एस ने फेसबुक पर भी अपनी शाखाएं खोल दी हैं जहां उसके दुष्प्रचारक रात दिन जहर उगलते रहते हैं . उसकी जेल में भी शाखाएं संचालित हैं .बंगारू लक्षमण अब तक उनका कामकाज देख रहे थे. वो बाहर आ गए हैं, अब गुजरात के बहादुर प्रचारक उनके काम
को संभाल रहें हैं जल्दी ही उनकी मदद के लिए भारी भरकम नितिन गडकरी जी भी पहुँचने वाले हैं .वैसे जाना तो नराधम मोदी को भी था लेकिन वो अभी पैंतरेबाजी दिखा रहा है उसके लिए थोडा इंतज़ार करना पड़ेगा. अभी तो उसने नितिन गडकरी को ठिकाने लगाने का काम शुरू किया है .संघ और भाजपा का कोई बड़ा नेता गडकरी के बचाव में आगे नहीं आ रहा है .
गुजरात के एक छुटभैये ने कहा है कि जैसा गडकरी जी ने भी कहा है जांच होनी चाहिए और क़ानून के अनुसार कार्यवाही की जानी चाहिए इसका मतलब है कि गडकरी कि बलि चढ़ती है तो चढ़ जाए. पहले जब केजरीवाल ने नितिन गडकरी के भ्रष्टाचार का भांडा फोड़ने का ऐलान किया था तो सारे भाजापाई नेकर की बेल्ट कस कसाकर मुस्तैद हो गए थे कि केजरीवाल जैसे ही उनके अध्यक्ष नितिन गडकरी जी के बारे में कुछ कहें वो पलट कर वार करें. लेकिन जब उनकी उम्मीदों के अनुरूप कोई बड़ा विस्फोट नहीं हुआ तो सबने बड़ी राहत कि साँस ली और सब हँस हँस कर कहने लगे कि हमारे खिलाफ तो कोई आरोप हो ही नहीं सकता .हम बिलकुल पाक साफ़ हैं. अब जब १८ फर्जी कंपनियों का खुलासा हुआ है और यह बात सामने आई है कि नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र में लोक निर्माण मंत्री रहते हुए अपने ड्राईवर, लेखाकार आदि को डाईरेक्टर बनाकर फर्जी कंपनियों में सरकारी धन लगाया और फिर उससे अपनी पूर्ती ग्रुप को लाभ पहुंचाया तब से कोई भी नेता उनका बचाव नहीं कर रहा है. अब यह तय है कि नितिन गडकरी का भाजपा में कोई भविष्य नहीं है. कफ़न चोरों की यह पार्टी भ्रष्टाचार में अपनी मिसाल आप है. फिर भी इसके समर्थक शुचिता .समर्पण और सेवा के झूठे संघी प्रचार के कायल हैं. अंधों को आँखें दी जा सकती हैं लेकिन जो आँखें होते हुए भी सच न देखना चाहें उन्हें क्या कहा जा सकता है ? अफसोस यह है कि भारत राजनीतिक विकल्पहीनता कि स्थिति में है जो गहरी चिंता का विषय है .
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जवाब देंहटाएं1-Ashok Kumar Gautam Absolutely right.
2-Animesh Tiwari Long live bjp.....much better than congressies
this.
3-Neetu Singh logical
4-Girijesh Tiwari एकात्म मानववाद से चल कर गाँधीवादी समाजवाद तक की भा.ज.पा. आर.एस.एस. की समझ में कितने पेंच हैं और जनसंघ को भारतीय जनता पार्टी में क्यों अपना कायान्तरण करना पड़ा - इसे समझने से ही कहानी साफ़ हो जाती है.
5-Govind Singh Parmar "विपक्ष का दायित्व निभाने में पूरी तरह विफल भाजपा कि राह सत्ता पाने के लिए जितनी आसान होती जाती है उसके नेता उसके रास्ते में उतने ही बड़े गड्ढे खोदते दिखाई देते हैं . उनमें होड़ लगी है कि कौन किसको पहले धक्का दे कर गड्ढे में गिराये. दूसरी तरफ देश का यह हाल है कि जनता चाहती है कि सारे नेता किसी बड़े गड्ढे में गिरा दिए जाएँ और कोई केजरी वाल कोई अन्ना उसके ऊपर बड़ा पत्थर ढक दे." आदरणीय ,बहुत सटीक
6-Umesh Yadav bhagwat andha ho gya hai, garkari ka kukarm nahi dikhta.......... mota maal khaya hoga..andha banane ke liye... moral kaha hai bjp ke pass... ek se badhkar ek ghotala aa rha hai bjp se bhi..congress aur bjp dono ek jasie
विपक्ष का दायित्व निभाने में पूरी तरह विफल भाजपा कि राह सत्ता पाने के लिए जितनी आसान होती जाती है उसके नेता उसके रास्ते में उतने ही बड़े गड्ढे खोदते दिखाई देते हैं . bilkul sahi kaha amarnath ji aapne .bhajpai satta के itne bhookhe hain ki apnee rah में rode ये khud ही khade karte hain
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