बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

एक और तहलका


                                                          
   संघ को लगता था कि  भाजपा उसके आदर्श हिंदुत्व के रास्ते से भटक गयी है,उसके नेता संघ के निर्देशों का पालन नहीं करते हैं. इसीलिए उसने अपने आज्ञाकारी जनाधारहीन नेता [जो नेता कम व्यवसायी ज्यादा है] नितिन गडकरी को भाजपा के अध्यक्ष पद पर बिठा दिया. कहीं न कहीं ये बात भी मन में रही होगी कि वो काफी भरकम हैं किसी के हिलाये आसानी से हिलेंगें भी नहीं .[ जिसका कारोबार इतना बड़ा है उसके आर्थिक और व्यावसायिक वजन का अंदाजा लगाया जा सकता है ] उसके दूसरे कार्यकाल की ताजपोशी की भी पूरी तैयारी हो चुकी हैं लेकिन जब इस गडकरी के गड़बड़झाले उजागर हुए तो मोहन भागवत की भागवत कथा पर भी शंका होने लगी है . आखिर शुचिता, सेवा और समर्पण का राग अलापने वाले संगठन के प्रमुख के खासमखास इतने भ्रष्ट हैं तो उसके प्रमुख ही नहीं पूरे संगठन की नैतिकता सवालों के घेरा में हैं . अब भागवत कथा कैसे चलेगी ? अब इसका बस एक ही रास्ता है कि मोहन भागवत स्वयं भाजपा की कमान संभाल लें .उधर राजनीति का शातिर खिलाड़ी नराधम मोदी बड़ी चतुराई से अपनी गोटी आगे बढ़ा रहा है .वो यह एहसास करने में सफल हो गया है कि भाजपा और संघ के पास उससे बेहतर राजनीतिक खिलाड़ी कोई नहीं है. आज की तारीख में संघ कि सारी शक्ति एक तरफ है और नरेन्द्र मोदी एक तरफ है . तब भी उसका पलड़ा भारी दिखता है. लगता है आडवानी को तो अटल बिहारी बनने से संघ ने रोके रखा लेकिन मोदी अड़ियल टट्टू की तरह उसके काबू में आने वाला नहीं है.भारत की राजनीति में सबसे बड़ी बात इस समय यह देखने में आ रही कि विपक्ष का दायित्व निभाने में पूरी तरह विफल भाजपा कि राह सत्ता पाने के लिए जितनी आसान होती जाती है उसके नेता उसके रास्ते में उतने ही बड़े गड्ढे खोदते दिखाई देते हैं . उनमें होड़ लगी है कि कौन किसको पहले धक्का दे कर गड्ढे में गिराये. दूसरी तरफ देश का यह हाल है कि जनता चाहती है कि सारे नेता किसी बड़े गड्ढे में गिरा दिए जाएँ और कोई केजरीवाल कोई अन्ना उसके ऊपर बड़ा पत्थर ढक दे.
                    आपको मालूम ही है कि आर एस एस ने फेसबुक पर भी अपनी शाखाएं खोल दी हैं जहां उसके दुष्प्रचारक रात दिन जहर उगलते रहते हैं . उसकी जेल में भी शाखाएं संचालित हैं .बंगारू लक्षमण अब तक उनका कामकाज देख रहे थे. वो बाहर आ गए हैं, अब गुजरात के बहादुर प्रचारक उनके काम
 को संभाल रहें हैं जल्दी ही उनकी मदद के लिए भारी भरकम नितिन गडकरी जी भी पहुँचने वाले हैं .वैसे जाना तो नराधम मोदी को भी था लेकिन वो अभी पैंतरेबाजी दिखा रहा है उसके लिए थोडा इंतज़ार करना पड़ेगा. अभी तो उसने नितिन गडकरी को ठिकाने लगाने का काम शुरू किया है .संघ और भाजपा का कोई बड़ा नेता गडकरी के बचाव में आगे नहीं आ रहा है .

               गुजरात के एक छुटभैये  ने  कहा है कि जैसा गडकरी जी ने भी कहा है जांच होनी चाहिए और क़ानून के अनुसार कार्यवाही की जानी चाहिए इसका मतलब है कि गडकरी कि बलि चढ़ती है तो चढ़ जाए. पहले जब केजरीवाल ने नितिन गडकरी के  भ्रष्टाचार का भांडा फोड़ने  का ऐलान किया था तो सारे भाजापाई नेकर की बेल्ट कस कसाकर मुस्तैद हो गए थे कि केजरीवाल जैसे ही उनके अध्यक्ष नितिन गडकरी जी के बारे में कुछ कहें वो पलट कर वार करें. लेकिन जब उनकी उम्मीदों के अनुरूप कोई बड़ा विस्फोट नहीं हुआ तो सबने बड़ी राहत कि साँस ली और सब हँस हँस कर कहने लगे कि हमारे खिलाफ तो कोई आरोप हो ही नहीं सकता .हम बिलकुल  पाक साफ़ हैं. अब जब १८ फर्जी कंपनियों का खुलासा हुआ है और यह बात सामने आई है कि नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र में लोक निर्माण  मंत्री रहते हुए अपने ड्राईवर, लेखाकार आदि को डाईरेक्टर बनाकर फर्जी कंपनियों में सरकारी धन लगाया और फिर उससे अपनी पूर्ती  ग्रुप को लाभ पहुंचाया तब से कोई भी नेता उनका बचाव नहीं कर रहा है. अब यह तय है कि नितिन गडकरी का भाजपा में कोई भविष्य नहीं है. कफ़न चोरों की यह पार्टी भ्रष्टाचार  में अपनी मिसाल आप है. फिर भी इसके समर्थक शुचिता .समर्पण  और सेवा के झूठे संघी प्रचार  के कायल हैं. अंधों को आँखें दी जा सकती हैं लेकिन जो आँखें होते हुए भी सच न देखना चाहें उन्हें क्या कहा जा सकता है ? अफसोस यह है कि भारत राजनीतिक विकल्पहीनता कि स्थिति में है जो गहरी चिंता का विषय है .   

                                                     

Alpha
ایک اور تہلکہ                                                                 متحدہ کو لگتا تھا کہ بی جے پی اس مثالی ہندوتو کے راستے سے بھٹک گئی ہے، اس کے سربراہ ایس کے ہدایات پر عمل نہیں کرتے ہیں. اسی لئے اس نے اپنے فرمانبردار جنادھارهين لیڈر [جو لیڈر کم تاجر مزید ہے] نتن گڈکری کو بی جے پی کے صدر کے عہدے پر بٹھا دیا. کہیں نہ کہیں یہ بات بھی ذہن میں رہی ہوگی کہ وہ کافی بھرکم ہیں کسی کے هلايے آسانی سے هلےگے بھی نہیں. [جس کا کاروبار اتنا بڑا ہے اس کے اقتصادی اور کاروباری وزن کا اندازہ لگایا جا سکتا ہے] اس کے دوسرے دور اقتدار کی تاج پوشی کی بھی پوری تیاری ہو چکی ہیں لیکن جب اس گڈکری کے گڑبڑجھالے صاف ہوئے تو موہن بھاگوت کی بھاگوت افسانے پر بھی تشویش ہونے لگی ہے. آخر شچتا، خدمت اور ایثار کا راگ الاپنے والے تنظیم کے سربراہ کے كھاسمكھاس اتنے کرپٹ ہیں تو اس کے سربراہ ہی نہیں، پورے تنظیم کی اخلاقی سوالوں کے گھیرے میں لے لیا میں ہیں. اب بھاگوت افسانے کیسے چلے گی؟ اب اس کا بس ایک ہی راستہ ہے کہ موہن بھاگوت خود بی جے پی کی کمان سنبھال لیں. ادھر سیاست کا شاطر کھلاڑی نرادھم مودی بڑی سدھی سے اپنی گوٹي آگے بڑھا رہا ہے. وہ یہ احساس کرنے میں کامیاب ہو گیا ہے کہ بی جے پی اور متحدہ کے پاس اس سےبہتر سیاسی کھلاڑی کوئی نہیں ہے. آج کی تاریخ میں سنگھ کہ ساری طاقت ایک طرف ہے اور نریندر مودی ایک طرف ہے. تب بھی اس کا پلڑا بھاری نظر اتا ہے. لگتا ہے اڈواني کو تو اٹل بہاری بننے سے یونین نے روکے رکھا لیکن مودی اڑيل ٹٹٹو کی طرح اس کے قابو میں آنے والا نہیں ہے. بھارت کی سیاست میں سب سے بڑی بات اس وقت یہ دیکھنے میں آ رہی کہ اپوزیشن کی ذمہ داری ادا کرنے میں پوری طرح ناکام بی جے پی کہ راہ اقتدار حاصل کرنے کے لئے جتنی آسان ہوتی جاتی ہے اس کے سربراہ اس کے راستے میں اتنے ہی بڑے گڑھے كھودتے دکھائی دیتے ہیں. ان میں دوڑ لگی ہے کہ کون کس کو پہلے دھکا دے کر گڑھے میں گرايے. دوسری طرف ملک کا یہ حال ہے کہ عوام چاہتی ہے کہ تمام رہنما کسی بڑے گڑھے میں گرا دیے جائیں اور کوئی كےجريوال کوئی انا اسکے اوپر بڑا پتھر ڈھانپ دے.آپ کو معلوم ہی ہے کہ آر ایس ایس نے فیس بک پر بھی اپنی شاخیں کھول دی ہیں جہاں اس کے دشپرچارك رات دن زہر اگلتے رہتے ہیں. اس جیل میں بھی شاخیں چلتی ہیں. بنگارو لکشمن اب تک ان کا کام دیکھ رہے تھے. وہ باہر آ گئے ہیں، اب گجرات کے بہادر پرچارک ان کے کام کو سنبھال رہے ہیں جلد ہی ان کی مدد کے لئے بھاری بھرکم نتن گڈکری جی بھی پہنچنے والے ہیں. ویسے جانا تو نرادھم مودی کو بھی تھا لیکن وہ ابھی پےترےباجي دکھا رہا ہے اس کے لیے تھوڑا انتظار کرنا پڑے گا. ابھی تو اس نے نتن گڈکری کو ٹھکانے لگانے کا کام شروع کیا ہے. سنگھ اور بی جے پی کا کوئی بڑا لیڈر گڈکری کے دفاع میں آگے نہیں آ رہا ہے. گجرات کے ایک چھٹبھےيے نے کہا ہے کہ جیسا گڈکری جی نے بھی کہا ہے جانچ ہونی چاہئے اور قانون کے مطابق کارروائی کی جانی چاہیے اس کا مطلب ہے کہ گڈکری کہ قربانی چڑھتي ہے تو چڑھ جائے. پہلے جب كےجريوال نے نتن گڈکری کے بدعنوانی کا راز پھوڑنے کا اعلان کیا تھا تو سارے بھاجاپاي نےكر کی بیلٹ کس كساكر مستےد ہو گئے تھے کہ كےجريوال جیسے ہی ان کے صدر نتن گڈکری جی کے بارے میں کچھ کہیں وہ پلٹ کر وار کریں. لیکن جب ان کی توقعات کے مطابق کوئی بڑا دھماکہ نہیں ہوا تو سب نے بڑی راحت کہ سانس لی اور سب ہنس ہنس کر کہنے لگے کہ ہمارے خلاف تو کوئی الزام ہو ہی نہیں سکتا. ہم بالکل پاک صاف ہیں. اب جب 18 فرضی کمپنیوں کا انکشاف ہوا ہے اور یہ بات سامنے آئی ہے کہ نتن گڈکری نے مہاراشٹر میں لوک تعمیر وزیر رہتے ہوئے اپنے ڈرائیور، اکاؤنٹنٹس وغیرہ کو ڈايرےكٹر بنا کر فرضی کمپنیوں میں سرکاری پیسہ لگایا اور پھر اس سے اپنی پورتي گروپ کو فائدہ پہنچایا تب سے کوئی بھی لیڈر ان کا دفاع نہیں کر رہا ہے. اب یہ طے ہے کہ نتن گڈکری کی بی جے پی میں کوئی مستقبل نہیں ہے. کفن چوروں کی یہ پارٹی بدعنوانی میں اپنی مثال آپ ہے. پھر بھی اس کے حامی شچتا. ایثار اور خدمت کے جھوٹے سگھي تشہیر کے قائل ہیں. اندھوں کو آنکھیں دی جا سکتی ہیں لیکن جو آنکھیں ہوتے ہوئے بھی سچ نہ دیکھنا چاہیں انہیں کیا کہا جا سکتا ہے؟افسوس یہ ہے کہ بھارت سیاسی وكلپهينتا کہ حالت میں ہے جو تشویش کا موضوع ہے.

         


2 टिप्‍पणियां:


  1. 1-Ashok Kumar Gautam Absolutely right.

    2-Animesh Tiwari Long live bjp.....much better than congressies
    this.

    3-Neetu Singh logical

    4-Girijesh Tiwari एकात्म मानववाद से चल कर गाँधीवादी समाजवाद तक की भा.ज.पा. आर.एस.एस. की समझ में कितने पेंच हैं और जनसंघ को भारतीय जनता पार्टी में क्यों अपना कायान्तरण करना पड़ा - इसे समझने से ही कहानी साफ़ हो जाती है.

    5-Govind Singh Parmar "विपक्ष का दायित्व निभाने में पूरी तरह विफल भाजपा कि राह सत्ता पाने के लिए जितनी आसान होती जाती है उसके नेता उसके रास्ते में उतने ही बड़े गड्ढे खोदते दिखाई देते हैं . उनमें होड़ लगी है कि कौन किसको पहले धक्का दे कर गड्ढे में गिराये. दूसरी तरफ देश का यह हाल है कि जनता चाहती है कि सारे नेता किसी बड़े गड्ढे में गिरा दिए जाएँ और कोई केजरी वाल कोई अन्ना उसके ऊपर बड़ा पत्थर ढक दे." आदरणीय ,बहुत सटीक

    6-Umesh Yadav bhagwat andha ho gya hai, garkari ka kukarm nahi dikhta.......... mota maal khaya hoga..andha banane ke liye... moral kaha hai bjp ke pass... ek se badhkar ek ghotala aa rha hai bjp se bhi..congress aur bjp dono ek jasie

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  2. विपक्ष का दायित्व निभाने में पूरी तरह विफल भाजपा कि राह सत्ता पाने के लिए जितनी आसान होती जाती है उसके नेता उसके रास्ते में उतने ही बड़े गड्ढे खोदते दिखाई देते हैं . bilkul sahi kaha amarnath ji aapne .bhajpai satta के itne bhookhe hain ki apnee rah में rode ये khud ही khade karte hain

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