बुधवार, 21 नवंबर 2012

कसाब को फांसी


           कसाब को फांसी हो ही गयी . लोग बड़े बेसब्र थे कि कमबख्त को फाँसी पर क्यूँ नहीं चढ़ाया जा रहा है .लेकिन शायद ऊपर वाले को यह मंज़ूर नहीं था कि कोई दुर्दांत आतंकवादी उसके यहाँ आकर गड़बड़ी करे। शायद इसीलिए पहले बाला साहब को ऊपर बुलाया गया, फिर कसाब के प्राण हरण का परवाना जारी किया गया . अब तक बाला साहब ने अपना आसन जमा लिया होगा. कसाब  पहुँच भी जाए तो कुछ गड़बड़ी नहीं कर सकेगा .वहाँ धर्म निरपेक्ष सरकार भी नहीं है जो सारी अव्यवस्थाओं की जिम्मेदार ठहरायी जा सके . 
                                           
       बाला साहब के भक्त उन्हें भेंट भेजना चाहें तो कसाब को दे सकते हैं वो उन्हें सोंप देगा . वैसे पोंटी चड्ढा भी पहुँच गया है उसने पहले ही काफी जगह घेर ली होगी ये  लोग आराम से रह सकते हैं.आजकल बड़े बड़े फैसले बड़ी जल्दी हो रहें हैं अगर सारे काम इतनी जल्दी जल्दी होने लगे तो ये जमीन ही स्वर्ग हो जाए .
         सुबह से सारे टी वी चैनल कसाब के हिसाब को परोस रहें हैं . लेकिन  कुछ लोग शंका कर रहें हैं कि कहीं ऐसा तो नहीं कि कसाब डेंगू से मर गया हो और उसे फांसी की औपचारिकता भर निभायी गयी हो .यह शंका  इसलिए भी है कि उसे हाल ही में डेंगू हुआ था. कोई भी यह नहीं बता रहा है कि  कसाब का अंतिम दिन व्यवहार कैसा था ? उसने क्या कहा सुना ? यह संभव नहीं लगता कि कसाब जिंदगी के आखिरी घंटों में बिलकुल चुप रहा हो. बहरहाल इससे आतंक वाद तो शायद ही ख़त्म हो. बल्कि ज्यादा संभावना यही है कि आतंकवाद एक बार पुन :जोरो से भड़क उठे .यद्यपि वह बुझते दिये की अंतिम झलमलाहट ही साबित हो सकती है . लेकिन इस कदम से बाल ठाकरे के निधन पर हो रही प्रतिक्रियाओं पर विराम लग जाएगा .वैसे ही जैसे बाल ठाकरे की म्रत्यु के अवसाद और विवाद में पोंटी चड्ढा की हत्या बिना हंगामा पैदा किये हो गयी .अगर पोंटी चड्ढा कुछ दिन आगे पीछे मारा गया होता तो उस पर भी गरमागरम बहसें चलती. क्योंकि वह भी राज नेताओं के भ्रष्टाचार की उपज था और वो नेता भारत की राजनीति में प्रभावी भूमिका रखते हैं .
                                     
           यद्यपि फांसी से किसी गुनाह का इन्साफ नहीं होता है और न ही गुनाहगार को उसके किये की सजा मिलती है बल्कि एक तरह से वह सारी सजाओं से आजाद हो जाता है .भारत सरकार ने वैसे भी संयुक्त राष्ट्र संघ में फांसी की सजा के खिलाफ मतदान किया था, लेकिन दुनिया के बहुत से दूसरों की तरह उसने फांसी की सजा को ख़त्म नहीं किया .मेरी  समझ में फांसी की सजा को ख़त्म कर देना चाहिए और कड़ी मशक्कत की आजीवन कारावास की सजा दी जानी चाहिए . 
                           

1 टिप्पणी:


  1. Mohammad Anas
    चलिए आप सबको इस सवाल के साथ छोड़े जा रहा हूँ ,मिलते हैं ब्रेक के बाद -
    ऊपर बाल ठाकरे जी और कसाब जी में यदि कबड्डी होगी तो कौन जीतेगा ?
    आप बने रहे हमारे साथ ,जल्द ही हाजिर होंगे :P :D
    यदि आपमें से कोई भी ,हाँ भाई कोई भी यदि अपने प्रीय बाल ठाकरे जी के लिए कोई गिफ्ट /विफ्ट देना चाहे तो वो कसाब के माध्यम से भेज सकते हैं ,वो जनाब वहीँ जा रहे हैं ,लेते जायेंगे ,इत्ता दिन हम सबके टैक्स से नमक खाया है ,ये काम भी नही करेंगे क्या :P

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