मंगलवार, 1 जनवरी 2013

ओ नूतन वर्ष के पाहुन




अभी कुछ दिन नहीं आते
अभी कुछ दिन ठहर जाते.
यहाँ बिगड़े हुए हालात
थोडा तो संवर जाते .

ओ नूतन वर्ष के पाहुन
मैं  जाता वर्ष मेरी सुन .

नहीं क्या कुछ सहा मैंने
नहीं क्या कुछ कहा मैंने.
समय की गर्म भट्टी में
बहुत खुद को दहा मैंने .

मेरी आहें जमाने को लगी
संगीत की नव धुन .

मैं हँसता, खेलता आया
ख़ुशी में झूमता आया .
गगन से मैं धरातल तक
महकता घूमता आया .

मुझे भी देख लो हैं खा रहें
अब काल के कुछ घुन .


ابھی کچھ دن نہیں آتے.
ابھی کچھ دن ٹھہر جاتے
یہاں بگڑے ہوئے حالات
تھوڑا تو سںور جاتے.

او نوتن سال کے پاهن
میں جاتا سال میری سن.

نہیں کیا کچھ سہا میں نے
نہیں کیا کچھ کہا میں نے.
وقت کی گرم بھٹی میں
بہت خود کو دها نے.

میری آہیں زمانے کو لگی
موسیقی کی نئی دھن.

میں ہنستا، کھیلتا آیا
خوشی میں جھومتا آیا.
گگن سے میں سطح تک
مهكتا گھومتا آیا.

مجھے بھی دیکھ لو ہیں کھا رہیں
اب دور کچھ گھن.



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