जब अक्ल है तेरे पास में तो अक्ल की कोई बात कर
तू सवाल का भी जबाब दे मेरी शक्ल पे ना सवाल कर |
जो कहा गया उसे सुन समझ, जो नहीं कहा उसे छोड़ दे
यही गुप्तगू का है कायदा ना बिना वजह के बबाल कर |
अच्छी से अच्छी और सच्ची से भी सच्ची बात में
सोच रहा है शकुनि कुछ तो राज छुपा खैरात में |
अर्थी को कांधा देने को शायद लोग मिलें ना चार
जिस तिस को भरकर बस में ले तो आये बारात में |
तू सवाल का भी जबाब दे मेरी शक्ल पे ना सवाल कर |
जो कहा गया उसे सुन समझ, जो नहीं कहा उसे छोड़ दे
यही गुप्तगू का है कायदा ना बिना वजह के बबाल कर |
अच्छी से अच्छी और सच्ची से भी सच्ची बात में
सोच रहा है शकुनि कुछ तो राज छुपा खैरात में |
अर्थी को कांधा देने को शायद लोग मिलें ना चार
जिस तिस को भरकर बस में ले तो आये बारात में |
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