खेतों पर ......
फौजी वर्दी पहन मरा जो, बेटा है अपना ,
फौजी मार रहे जिसको वो अपना भाई है |
दोनों तरफ हमीं शामिल वो कहीं नहीं दिखता,
परदे के पीछे बैठा जो क्रूर कसाई है |
हल्की कही कभी ढंग की न बात कहीं तुमने ,
तुमसे तो अच्छी कलवा की बूढी ताई है |
तुमसे तो अच्छी कलवा की बूढी ताई है |
सोना उपजाना था पर बम उगल रही धरती,
दंतेवाड़ा नई इबारत तेलंगाना की,
पढो उसे उससे अब तक क्यूँ आँख चुराई है |
पढो उसे उससे अब तक क्यूँ आँख चुराई है |
हम ही क्यों खाएं गोली कुछ तुम भी स्वाद चखो,
'मधुर ' हमारा नाम लिखाकर ना वो लाई है |
bahut sundar . ise fb par bhee deejiye, agar n diyaa ho. hamaare samay kee apanee kavitaa. badhaayee.
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