बुधवार, 20 सितंबर 2017

रोहिंगा शरणार्थी

 
हिंदी के न्यूज चैनल एक न एक फड़कती भड़कती सत्यकथा टाईप कहानी परोसने में लगे रहते हैं | वे उस कहानी को तब तक खींचते रहते हैं जब तक उसका दम ना निकल जाए | कई बार तो उस कहानी की कभी की मौत हो चुकी होती है उससे बदबू भी उठने लगती है लेकिन न्यूज चैनल हैं कि उस कथा को दोहराते ही रहते हैं | लेकिन जैसे ही उन्हें ये पता चलता है कि दर्शक अब उनकी कथा का नाम आते ही चैनल बदल देते हैं या उन्हें दिखता है कि दुसरे चैनल किसी और मुद्दे को हाईजैक कर चुके हैं तो वे बिना किसी निष्कर्ष के उस प्रकरण को छोड़ देते हैं | 

आजकल न्यूज चैनल पर सबसे ज्यादा हनीप्रीत राम रहीम सीरियल चल रहा है| बीच में रेयान स्कूल प्रकरण चलने लगा था | एक चैनल तो केवल आतंकवाद और मुस्लिम पाकिस्तान आई एस एस पर ही बोलता रहता है | उसके प्रचार के आगे सच झूठ का फैसला करना मुश्किल हो जाता है |अक्सर उसका सच भी झूठ जैसा लगता है | इसलिए उसकी कही गयी बातों की अन्य न्यूज चैनलों से पुष्टि करनी पड़ती है | इन सबके शौर में गौरी लंकेश की हत्या का प्रकरण एकदम दब गया है | यद्यपि वो किसी भी तरह भुला देनी वाली घटना नहीं थी, लेकिन घटना चक्र इतनी तेजी से घूमता रहता है और निहित स्वार्थ के कारण न्यूज चैनल भी ऐसे प्रकरण को दबाने के लिए दूसरी घटनाओं को इतनी जोर से हवा देते हैं कि चुप रहने के अलावा कुछ हो नहीं पाता है | 




अब ताजा प्रकरण रोहिंगा मुसलमानों का है | दशकों से बर्मा से विस्थापित रोहिंगा मुसलमान शान्तिपूर्वक इस देश में रह रहे थे | कहीं भी कोई समस्या नहीं थी, कहीं भी किसी थाने में उनके खिलाफ आतंकवाद या अन्य कोई गंभीर अपराध का मुक़दमा दर्ज नहीं था लेकिन जैसे ही बर्मा में उनका उत्पीडन शुरू हुआ और उनहोंने जान बचाने के लिए भागकर भारत सहित दुसरे देशों में शरण लेना शुरू किया उन्हें बिना किसी प्रमाण के आतंकवाद ,पाकिस्तान और आई एस एस से जोड़ा जाने लगा है | अभी ये सब बिना किसी तैयारी के किया जा रहा है इसलिए लोग उनसे रोहिंगाओं के आतंकवादी होने का प्रमाण माँगते हैं | प्रमाण उनके पास होता नहीं है इसलिए वे बगले झांकने लगते हैं | लेकिन कल जब देश के दूसरे कमजोर तबकों की तरह रोहिंगाओं के खिलाफ भी फर्जी ऍफ़ आई आर होने लगेगी और उन्हें फजी मुठभेड़ों में मारा जाने लगेगा, उन पर हथियारों और ड्रग की फर्जी तरीके से बरमादगी दिखाई जाने लगेगी तब उनके खिलाफ लिखने के लिए मीडिया के पास काफी मसाला होगा | आम लोग भी मीडिया के द्वारा परोसे जाने वाले उन गढे गढ़ाए झूठ को उसी तरह प्रमाण के रूप में पेश किया करेंगे जैसे वे अदालत से दस दस साल में दोष मुक्त पाए गए कथित आतंकवादियों के बारे में करते रहते हैं |
          
लेकिन ये तो भविष्य की बात है |अभी तो सवाल ये है कि शरणार्थियों को भारत में अस्थायी रूप से रखने में क्या समस्या है ? लोग कहते हैं कि उन्हें अपने बच्चों का पेट काटकर हम क्यूँ खिलाएं ? इसका जबाब यही है कि हमारा संविधान सबको जीने का हक़ देता है देशी को भी और विदेशी को भी | वैसे भी शरण माँगने वाले को शरण देने की हमारी पुरानी परंपरा है | हमने पारसियों को शरण दी है, हमने तिब्बतियों को शरण दी है ,हमने चक्माओं को शरण दी है| हमने श्रीलंकाई तमिलों को शरण दी है | हमने अफगानिस्तानी,पाकिस्तानी और बंगलादेशी हिन्दू शरणार्थियों को शरण दी है | हमने उन सबको इसलिए शरण दी है क्यूंकि वे अपनी जन्मभूमि से अपनी जान बचाकर भागे थे | उनमें कोई भी लौटकर वापिस अपनी जन्म भूमि को नहीं गया है लेकिन उनके कारण हमारे देश में कोई समस्या भी नहीं पैदा हुई है | रोहिंगाओं से भी कोई समस्या पैदा नहीं हुई है और होगी भी नहीं | लेकिन वे अधिकांशत मुसलमान हैं और भारतमें मुस्लिम द्वेषी राजनेता हावी हैं इसलिए वे रोहिंगाओं को शरण देने के मुद्दे पर शौर मचा देते हैं | सरकार भी उनकी है वो भी शरण नहीं देना चाहती है | ये वो लोग हैं जो खुद को राम भक्त कहते हैं | उनसे पूछा जाना चाहिए जब विभीषण ने राम से शरण मांगी थी तो क्या राम ने शरण नहीं दी थी ? विभीषण लंका से क्यूँ भागकर आया था ? इसीलिए ना क्यूंकि वहाँ उसके प्राणों को खतरा था | क्या उसे वापिस मौत के मुंह धकेल देना राम के लिए सही होता ? क्या तब भी हम उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहते ? निश्चय ही अगर राम विभीषण को शरण ना देते तो उनकी कीर्ति को दाग लगता और वे शायद लंका जय भी नहीं कर पाते |
                                         
राम भक्तों की यह दलील भी अगर मान भी ली जाए कि रोहिंगाओं को शरण देने से देश के संसाधनों पर भारी बोझ पड़ेगा तो उन्हें पता होना चाहिए कि देश के संसाधनों पर बोझ तो सन इकहत्तर में पूर्वी पाकिस्तानियों के भारत में आने से भी पड़ा था | लेकिन तब प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी थी, सरदार पटेल द्वीतय नहीं थे | इंदिरा गांधी ने पूर्वी पाकिस्तान को आजाद बंगलादेश बनाकर शरणार्थी समस्या भी सुलझा ली और भविष्य के लिए पाकिस्तान की नकेल भी कस दी थी | क्या आज ऐसा नहीं हो सकता है | उस समय पाकिस्तान के साथ तो अमेरिका जैसी महाशक्ति थी| तमाम मुस्लिम जगत था| बर्मा के साथ कौन है ? पिद्दी सा देश बर्मा इंसानियत का खून कर रहा है और भारत चुपचाप शरणार्थियों की मार झेल रहा है ? क्या दुनिया भर में दूर तक फेंकने के लिए शौहरत पा चुके भक्तों के परमप्रिय सरदार पटेल द्वीतय अपने लौह ईरादों और छप्पन इंची सीने का थोडा सा परिचय म्यांमार को सबक सिखाने में दिखाएँगे या बोलने में जो उन्हें महारत हासिल है उसका इस्तेमाल संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी संस्था में म्यांमार पर रोहिंगाओं का उत्पीडन रोकने तक प्रतिबन्ध लगाने में करेंगे ? इससे पहले की फ्रांस, जर्मनी,स्वीडन जैसे देश मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आगे आयें हमें अपनी गौरवशाली परम्परा और पडौसी धर्म का निर्वहन करते हुए रोहिंगाओं के जानमाल की रक्षा के लिए जो भी संभव हो वो सब करना चाहिए |