सोमवार, 14 मई 2012

कहानी -अपराधी कौन?

                         
             राजीव अपनी बेटी को सुबह 9 बजे स्कूल छोड़ने जाता था। आज उसने कुछ जल्दी मोटर साईकिल घर से निकाली और अपनी पत्नि से बोला- सुनती हो तुम कई दिन से अपने सीने में दर्द बता रही हो चलो आज तुम्हें डॉक्टर को दिखा देता हूँ ।
उसकी पत्नि सुनीता ने उसकी ओर नजर उठाकर देखा और कुछ सोचते हुये बोली तुम जाओ बेबी को स्कूल छोड देना फिर तुम्हें ऑफिस भी जाना है तुम्हें देर हो जायेगी।मामूली ही तो दर्द है ठीक हो जायेगा।
राजीव जानता है कि ऑफिस की देरी का तो बहाना है असल में उसकी पत्नि उसकी कम आमदनी और कमरतोड मंहगाई के कारण डॉक्टर के पास जाने से इसलिये बच रही है कि वो पता नहीं कितना खर्च करा दे। 

        
मामूली दर्द है राजीव बोला ये तो डॉक्टर बतायेगा ना कि दर्द मामूली है या गैर मामूली है। डॉक्टर को तो दिखाना ही पडेगा एक दिन थोडा ऑफिस देर से चला जाउगा।

नहीं ऐसी कुछ जरूरत नहीं है। डॉक्टर के पास जायेंगें तो कुछ ना कुछ बतायेगा ही और नही तो दस तरह के टेस्ट बता देगा। सुनीता बोली -चार पॉंच सौ रूप्ये फीस तो कही गई ही नहीं। मैं ठीक हो जाउगी थोडा मौसम ठीक हो जाये।

राजीव ने सोचने लगा इन औरतों में यही बात है। हर वक्त पैसे बचाने में लगी रहती हैं।उसने फिर कहा अरे बाबा यह सुनते सुनते तो तीन महीने हो गये। अब चलो भी डॉक्टर को जल्दी दिखाना ही ठीक रहता है। पता नहीं शरीर में क्या बीमारी पल रही हो। फिर तो ओर ज्यादा खर्चा होगा। 

अच्छा  चलो  पहले बेबी को उसके स्कूल छोड देंगें पता नहीं डॉक्टर के यहॉं कितना वक्त लग जाये। सुनीता जल्दी से तैयार होकर बेबी को अपनी गोद में लेकर राजीव की मोटर साईकिल पर पीछे बैठ गयी।

   राजीव मोटर साईकिल लेकर चल पडा। उसका दिमाग बहुत तेजी से अपने काम का बॅटवारा करने लगा। स्कूल में बेबी को छोडकर सुनीता  को डॉक्टर के पास ले जायेगा। एक घन्टा  डॉक्टर के यहॉं लग ही जायेगा| चार पॉंच टेस्ट भी जरूर कराने पडेंगें|  डॉक्टर  के यहॉं से आकर वह रास्ते में पैथेलोजी पर सुनीता के टेस्ट भी करा देगा नही तो इसी काम के लिये फिर किसी दिन दप्तर से छुटटी लेनी पडेगी। आजकल अफसर भी ऐसे आ गये हैं काम सब एन0जी0ओ0 को दे दिया है और दप्तर की चौकीदारी हमसे करवाते रहते हैं। स्वयं तो क्षेत्र का दौरा बताकर घर जाकर सो जायेंगें| हम बैठे हुये हैं कि पता नहीं कब कौन अधिकारी आ जाये? अगर थोडा भी इधर उधर हुये तो तुरन्त निलम्बित हो जायेंगें। फिर बहाल होने के कम से कम 50000रू0 तो देने ही पडेंगे।

            अफसरों को भी कुछ काम नहीं है।दप्तर में बैठे हुये सोते रहते हैं और इस इन्तजार में रहते हैं कि कैसे कोई कर्मचारी चंगुल में फॅंसे और फिर उसका खून निचोडकर पी जायें। और नही तो एक दिन की तनख्वाह ही काठ देंगें। अब उस एक दिन की तनख्वाह लेने के लिये पॉंच दिन से कम की तनख्वाह क्या खर्च होगी और वो भी कई महीने बाद मिलेगी। कोई फाईल सरकती ही नहीं जब तक उस पर भेंट ना चढ जाये। ऐसी मॅंहगाई में जब महीने का खर्च पूरा करना मुश्किल जो जाता तब इस तरह के खर्चे सिर मोल लेना मूर्खता ही कहलायेगी।अब ये देखो बैठे बिठाये डॉक्टर के पास जाना पड गया कि नहीं। पतानहीं डॉक्टर किजना खर्चा करायेगा1000-1500 रू0 तो अभी गये समझो।

पी. पी. अरे रूको एक होमगार्ड वाला सीटी बजाते हुये बोला। राजीव ने चोंककर देखा कि वो चौराहे के पास है तथा एक होमगार्ड वाला उसे मोटर साईकिल एक किनारे पर लगाने का ईशारा कर रहा हैं। राजीव झॅंझलाते हुये मोटर साईकिल को सढक के  किनारे पर उस ओर ले गया जहॉं एक इन्सपैक्टर और दो सिपाही स्कूटर मोटर साईकिलों के कागजात चैक कर रहे थे।

  राजीव को अन्य मोटर साईकिल स्कूटर वालों की तरह अपनी बारी के इन्तजार में रूकना पडा।इन्सपैक्टर एक मोटर साईकिल वाले से उलझे हुये थे। मोटर साईकिल वाला कह रहा था मेरा ड्राईविग लाईसेंस ठीक है, टैक्स जमा है, प्रदूषणमुक्त का भी प्रमाण पत्र है बीमा अभी दो दिन पहले एक्सपायर हुआ है मैं उसे करा लूँगा ।
इन्सपैक्टर बोला तुम्हें नही पता कि कब तुम्हारा बीमा एक्सपायर होगा। पहले क्यों नहीं कराया। चालान कटेगा।

मोटर साईकिल वाला अकड गया बोला क्यूँ  कटेगा चालान? इतनी गाडियॉं जो तुमने बिना चालान काटे पैसे लेकर छोड दी उनका चालान  क्यूँ नहीं काटा?  मैं पैसे नहीं दे रहा तो चालान कटेगा।

हॉं चालान कटेगा। तुम्हारे कागज पूरे नहीं हैं।

और वो जो इतनी सारी कारें निकल रही हैं तुमने किसी के कागज चैक किये? या सिर्फ हम सकूटर मोटर साइकिल वालों के कागज चैक करोगे।

हम क्या करें जिसे  चैक करने  उपर से आदेश हैं उसे कर  रहे  हैं । शहर में चैन खींचकर लुटेरे मोटर साईकिल पर भागे हैं चैक तो करनी ही पडेंगी।

अरे तो लुटेरे चैक कर रहे हो या कागज चैक कर रहे हो? वो जो कार वाले निकले हैं चाहे किसी का अपहरण करके ले जा रहे हों उन्हें नहीं चैक करोगे? ट्रक वाले जो तुम्हें 50-100 रूप्ये देकर जा रहे हैं उन्हें नहीं चैक करोगे?

अरे नहीं करते चैक हमारी मरजी |तेरा चालान जरूर कटेगा| बहुत भाषण दे रहा है।

क्या भाषण दे रहा हूँ  ?मेरे पास तुम्हें देने के लिये पैसे नहीं हैं, मुझे अपनी मॉं की दवाई लानी है। 

हम कुछ नही जानते गाडी के कागज जमा कर दो। 

कई लोग चिल्लाने लगे हमें क्यों रोका है? हमें देर हो रही है। अच्छी तानाशाही  है जब चाहे चौराहे पर रोककर  बैठ जाते हैं। रोज इन्हें कागज दिखाओ।

     इन्सेक्टर ने पहले मोटर साईकिल वाले के कागज लेकर उसे एक तरफ खडा किया और दूसरों के कागज देखने लगा।कई लोगों ने अपने कागज  चैक कराये| कुछ ने पुलिस के सिपाहियों की मुटठी गरम की और खिसक गये। राजीव का भी जैसे ही  नम्बर आया उसने अपने कागज चैक कराये और बेबी के  स्कूल की ओर चल पडा। 

     स्कूल में पहुचते ही स्कूल की प्रिसीपल ने स्कूल में देरसे आने के लिये बेबी पर सौ रूप्ये जुर्माना कर दिया और राजीव को चेतावनी दी कि यदि बच्ची समय से स्कूल नहीं आयेगी तो उसे स्कूल से निकाल दिया जायेगा। राजीव ने अपनी मजबूरियॉं बताते हुये कहा कि मैडम मैं तो पहले ही बच्ची को लेकर घर से चला था लेकिन रास्ते में गाडी के कागज चैक हो रहे थे इसलिये देर हो गयी ।

   प्रिसीपल बोली ये आपकी समस्या है इसे आप जाने। हम अपने स्कूल का अनुशासन खराब नहीं कर सकते। आपको बता दिया गया है आईन्दा बच्ची को समय से स्कूल लायें। 

राजीव ने चुपचाप 100रू0 जुर्माना भरा और सुनीता को लेकर वापिस लौट पडा। उसका मूड पूरी तरह से बिगड चुका था। 

सुनीता ने उसके मूड को देखा ओर बोली अब सीधे घर चलते हैं फिर किसी दिन डॉक्टर को  दिखा लेंगे।
राजीव बहुत खिन्न था । वह बोला फिर कभी क्यों आज ही दिखायेंगें। 

लेकिन तुम्हें बहुत देर हो जायेगी, सुनीता बोली इन पुलिस वालों ने तो एक घन्टा पहले  ही खराब कर दिया है।

अरे छोडो सुनीता ये जो रोज का किस्सा है। राजीव बोला -वैसे वो मोटर साईकिल वाला आदमी  ठीक रहा था ये पुलिस वाले  कारों, ट्रको वालों को कुछ नहीं कहते बस छोटे वाहन वालों के पीछे पडे रहते हैं।

 सुनीता बोली हॉं उस दिन हम जब शाम को पूनम की शादी में जा रहे तो पुलिस वालों ने ऐसे ही एक घन्टा बरबाद कर दिया था।

अरे चैकिंग क्या करते हैं पैसे कमाने में लगे रहते हैं। जब दप्तरवालों का समय होता है तभी ये चैंकिंग करने बैठ जाते हैं।

सुनीता ने पूछा-ये इतनी लूट करते हैं इन्हें कोई  रोकता नहीं |

कौन रोके इनके अधिकारी इन्हें ऐसा करते हुये देखकर गर्दन घुमाकर निकल जाते हैं।सबका हिस्सा जाता है जी । ये फिर क्यों न लूट करें?

                                        
        राजीव अभी यह  बात कहकर रूका ही था कि मोटर साईकिल पर सवार दो लडके बडी तेजी से उसके बराबर से निकले| उनमें से पीछे बैठे लडके ने सुनीता के गले पर झपटटा मारकर चेन खींच ली। सुनीता धडाम से सडक पर गिर पडी |उसका सिर जमीन से टकराया और खून का फव्वारा सडक पर बह  निकला।

      राजीव भी लडखडाते हुये सडक पर गिरा और तुरन्त खडा भी हो गया। लेकिन उसने सुनीता का जो हाल देखा तो उसकी ऑंखें फटी  की फटी रह गयी। सब कुछ पलक झपकते ऐसा हुआ कि किसी को कुछ पता ही नहीं चला कि ये क्या हो गया? कुछ राहगीर रूक गये और आसपास के दुकानदार इकटठे होने लगे।

     भीड में चेंमेंगोईयॉं शुरू हो गयी। एक सज्जन बोले कुछ ना पूछो  सहाब पूरा गुन्डाराज हो गया है। बहु बेटियों का घर से निकलना हराम हो गया है।

दूसरे बोले कुछ न कहो सहाब। अब देख लो बदमाश उसी चौराहे की और से आयें हैं  जिधर पुलिस चैकिंग  कर रही है।


तीसरे बोले हॉं सहाब पुलिस चैकिंग कर रही है या पैसे वसूल रही है।

चौथे सज्जन बोले अरे सहाब उधर पुलिस वाले वसूली कर रहे हैं इधर बदमाश अपनी वसूली में लगे हैं आम आदमी मरता है तो  मरता रहे।

 राजीव के शरीर में दर्द बढता जा रहा था उधर सुनीता अचेत थी और उसके प्राण संकट में थे। सुनीता को तुरन्त मेडिकल सहायता की जरूरत थी लेकिन भीड में कोई आदमी इसके लिये तत्पर दिखायी न दिया। राजीव ने अपने मोबाईल से फोन करने के लिये जेब में हाथ डाला तो मोबाईल भी गायब था।असल में एक्सीडेन्ट के समय मोबाईइल दूर सडक पर जा  पडा था और भीड में से किसी ने उसे पार कर दिया था। एक सज्जन  ने अपना मोबाईल दिया| राजीव ने उस मोबाईल से अपने दप्तर के साथियों को एक्सीडेन्ट के बारे में बताया।वो तुरन्त चल पडे। भीड में से एक से एक बढकर सलाह मिल रही थी। 

बाबुजी अस्पताल जाओ इलाज कराओ। पुलिस वुलिस के चक्कर में मत पडना।

हॉं सहाब ये पुलिस ही कराती है क्या करोगे उसके चक्कर में पडकर। मेरी पत्नि की चैन छीनकर ले गये इसी चौराहे पर । मैं तो भैया चुप बैठ गया अपने घर ।कोन चक्कर में पडे। 

हॉं जी ठीक कहते हो चक्कर में पडते तो फिर चक्कर ही काटते रहते। घन चक्कर  तो तुम्हारा रिपोर्ट लिखवाने में ही बन जाएगा । पुलिस तो डकैती , कत्ल की रिपोर्ट नहीं लिखती, ये चेन वेन की लूट तो कोई बात ही नहीं।

   जब तक राजीव के दप्तर के लोग पहुच गये। उन्होंने टैक्सी में दोनों को बिठाया और अस्पताल को ले गये। चौराहे पर वार्तालाप जारी था। कुछ लोग वहॉं मजदूरी की तलाश में सुबह से खडे थे और अब घर वापिस जाने का मन बना रहे थे। कुछ रेहडी फेरी वाले थे जो  प्लास्टिक का सामान या फलादि बेचे रहे थे। दुकानदार थे जो सारा फुटपाथ सामान से रखे  थे और कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को कोस रहे थे। 

अब चर्चा अपने-अपने दायरे में हो रही थी। एक दुकानदार ने अपने पडोसी दुकानदार से कहा कि सहाब भले लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। आदमी घर से निकलता है चलो बीवी को कुछ चीज दिलाकर लायेंगें और रास्ते में लुट जाता हैं।

हॉं जी कानून नाम की तो चीज ही नहीं रह गयी है। ऐसे में आदमी क्या कमा ले। सुबह से बोहनी नहीं हुई| शाम तक चार ग्राहक भी मिलने मुश्किल हो गये हैं।

वही तो मैं की रहा हूँ  तीसरा दुकानदार बोला सेठजी लेडीज ही ठीक से खरीददारी करती है आदमी तो पैसे मलमल कर जेब से निकालता है। लेडीज को ये चेन लुटेरे और शोहदे घर से बाहर नहीं आने देते।

चैन लुटेरे? सब हराम खोर हैं। अब इन्हें देखो सुबह से खडे हैं घर से आये हुये मजदूरी के लिये। इनसे बात करो तो दो की जगह पॉंच मॉंगें काम फिर भी नहीं करेंगें। कुछ कभी कभाक कर लिया तो दारू पी जायेंगें।

हॉं जी इनके लडके ही आवारा हैं। यही चैन भी लूटते हैं और लडकियॉं भी छेडते हैं। सब सलमान खान और शाहरूख खान बनते हैं। उसके लिये तो पैसा चाहिये । वो पेसा कहॉं से आयेगा सब ऐसे ही आता है। 

    एक रिक्शा वाला हॉंपता हुआ आकर ठेले वाले के पास रूका। रिक्शे में बैठ आदमी ने ठेले वाले कहा - सेव क्या भाव दिया है?

90 रूपये किलो है। ठेले वाला बोला। 

क्या कहते हो इतना मंहगा?

मंहगा ?ये तुम्हें मंहगा दिखता है? पता  है यहॉं खडे होने का कितना खर्चा है?

खर्चा ?क्या खर्चा है। सडक पे खडे हो, कौन सा शोरूम बनाकर बैठे हो?

हॉं सडक पे खडा हूँ ? जरा सुबह से शाम तक  धूंप  में खडा हो के देखो? शाम तक खडा रहता हूँ तब जाकर  मुश्किल से मजदूरी निकलती है।जो कमाओ  सब तहबजारी वाले, मस्जिद वाले, मजार वाले,  बाजार कमेटी वाले, पुलिस वाले, दादा भैया छीन ले जाते हैं| शाम तक मुश्किल से 150-200 सौ रूप्ये बचते हैं |। पुलिस वालों के डन्डे खाने पडते हैं अलग से।

डन्डे काहे के? एक जगह पक्की कर लो जब सबको पैसा देना है।

जगह ? कौन जगह पक्की करने देगा?  वो मोटा लाला देख रहे हो ना? जिसने फुटपाथ पर अपना सामान फैला रखा है| अपनी दुकान के सामने सडक पर ठेला खडा करने का किराया भी वही लेता है। बल्कि अब तो ठेले भी बाजार के दुकानदार अपने खडे करवाने लगे हैं ओर अपने नौकरों से माल बिकवाते हैं। 

फिर तुम कैसे करते हो?

करते क्या  हैं? सारे दिन धूंप  में इधर से उधर धक्के खाते  रहते हैं।

अच्छा भाई ये तो बडा अन्याय है। अच्छा  चलो तुम मुझे एक किलो सेव तोल दो।

देखना ठीक -ठीक तोलना तुम लोग गडबड बहुत करते हो?

हॉं जी हमीं गडबड करते हैं बाकि  सारी दुनियॉं ठीक काम कर रही है?

तभी रिक्शे वाले का ध्यान एक कोने में खड़ी  भीड पर गया वो ठेले वाले से बोला उधर भीड क्यों है भैया? 

ठेले वाला बोला वही रोज का ड्रामा है। किसी मेम सहाब की चेन लुट गयी है।

चैन लुट गयी है? सेव खरीदने वाला ग्राहक बोला किसने लूट ली?

हमने लूट ली? ठेले वाला झल्लाकर बोला  - लूट ली उन्होंने जो लूटने वाले  हैं ।

अरे उधर तो पुलिस चैक कर रही है फिर इधर चैन कैसे लुट गयी?

चैन कैसे लुट गयी? चैन  ऐसे लुट गयी कि पुलिस गाडी के कागज चैक करती है जेवरात के कागज चैक नहीं करती। अगर पुलिस जेवरात के कागज चैक करे तो घर से जेवरात पहनकर चलने से पहले  मेम  साहब  दस बार सोचे कि पहन जाउ या ना पहन जाउ? अगर पुलिस वाले ने कागज मॉंग लिये कि बहिन जी जरा रसीद दिखाना ये चैन आपने कब खरीदी थी तो मेमसहाब तो मेमसहाब मियॉं जी को भी पसीना छूट  जायेगा।

सेव खरीदने वाला ग्राहक ठेले वाले की बात में ध्यान देने लगा| वो बोला हॉं भाई तुम ठीक कहते हो इस अमीरी के दिखावे ने तो सत्यानाश कर दिया। सरकार को चाहिये कि जो भी जेवर पहनकर सडक पर आये उससे उसकी खरीदने की रसीद और  उसकी आमदनी का हिसाब मॉंगें| एक जेवरात प्रदर्शन टैक्स भी वसूल करे ताकि उसकी सुरक्षा पर होने वाले खर्च को पूरा किया जा सके। अब ये क्या कि गरीब जनता टैक्स भरे उस टैक्स से वेतन पाने वाले उसकी हिफाजत न करके अमीरजादों की सेवा में लगे रहें?

अब बोले ना आप  बाबुजी नेक बात। लेकिन हमारी कौन सुनेगा आप पढे लिखें हैं आप सरकार हैं आप ही ऐसा कोई कानून बना दीजिये।

अब तुम क्या जानो भाई कानून हम नहीं बनाते| कानून तो वही बनाते हैं जो लालाजी के पेसे से चुनाव लडते हैं। हम तो सरकार के नौकर हैं आधे गुलाम।जिस दिन हमें भी पूरी आजादी मिल जायेगी उस दिन ऐसा कानून जरूर बनेगा।  

  चैन लूट के साथ एक्सीडेन्ट से मजदूरों को भी घर पर सुनाने के लिये नई कहानी  मिल गयी थी। दिन के बारह बज गये थे| अब मजदूरी तो मिलनी नहीं थी, बस उन्हें किसी तरह दो तीन घन्टे ओर पूरे करने थे फिर कुछ घर और कुछ ठेके की राह पकडने वाले थे। 

एक ने कहा कि राजेन्दर आज का दिन तो बेकार जायेगा।सुबह से दोपहर हो गयी काम कुछ नहीं मिला। हमसे अच्छे तो ये चैन छीनने वाले हैं थोडी देर में ही कई हजार का माल मार दिया।

दूसरा बोला  धरमू क्या बात करते हो भैया तुम क्या समझते हो ये चैन छीनने वाले बडे चैन  से रहते हैं। भैया बावले कुत्ते की तरह भागते रहते हैं और एक न एक दिन बावले कुत्ते की तरह पुलिस के हाथों मारे जाते हैं। 

तीसरा बोला हॉं राम सिंह तुम ठीक कहते हो ये चेन छीनने वाले कभी चैन से नहीं रह सकते।ये चेन छीनकर भागे हैं , शाम को सर्राफे में आधे तिहाई दाम में बेच देंगें और आधा तिहाई इलाके की पुलिस को देंगें। बाकि में गिरोह  का सरदार जो पुलिस का दलाल होगा वो ले लेगा| मुश्किल से ही हमारी तुम्हारी मजदूरी लायक पैसे उसके पास बचेंगें।

हॉं जयपाल भैया तुमने बात सही कही है धरमू बोला- कभी कभी मोबाईल फैंटम पुलिस घेर कर मार भी देती है। भागो कहॉं तक भागते हो? कोई बचाने वाला नहीं मिलता।

राजेन्द्र ने कहा भैया ये भागने मारने का नाटक तो पब्लिक को यह दिखाने के लिये है कि सरकार और पुलिस भी काम कर रही है। क्या पुलिस नहीं जानती कि ये लूट के गहने कहॉं जाकर खपेंगें? उसी सर्राफा बाजार में ना जहॉं मोट मोटे सर्राफ बादशाहों जैसी गददी पर पडे रहते हैं।

धरमू बोला-हॉं भैया राजेन्दर और पुलिस उनकी हिफाजत में बैठी रहती है। वही चोरी का माल बिकता है और लाला खरीदता है।किसी को नहीं दिखायी देता कि ये चोरी का माल बिक रहा है और चोरों का आदमी बेच रहा है।

राजेन्द्र ने कहा यही कानून है भैया एक भूखा आदमी 100 रूपये की लूट करे 90 रूपये कानून को चलाने वाले और खरीदने वाले ले ले और दस रूपये रखने वाला अपराधी कहलाये, जेल जाये।

ये तो कोई बात न हुई राजेन्द्र भैया जयपाल बोला एक भूखों आदमी को सरकार सजा देती है और इन मोटे पेट वालों को जो चोरी का माल खरीद बेचकर दिन पर दिन मोटे होते जाते हैं| ना उन्हें पुलिस पकडती है ना चारी का सामान बरामद करती है।

जयपाल भैया उनहें कौन पकडेगा? राजेन्द्र बोला ये तो हर थाने, हर नेता को पैसे देते हैं। कोई ईमानदार अधिकारी तंग करेगा तो अभी बाजार बन्द करके नारे लगाने लगेंगे। तुमने देखा नहीं  बाजार बन्द करने में सारे मिलवाटखोर,सारे जमाखोर कैसे एक हो जाते हैं?

हॉं ये तो है जयपाल भैया धरमू कहने लगा ये सारे लोग चैन लुटने पर, जेब  कटने पर ही शौर मचाते  हैं और खुद जो सारा दिन ग्राहक की जेब काटते रहते हैं उस पर कुछ नहीं कहते।

कहेंगें क्या कददू? जयपाल बोला उसे तो ये व्यापार कहते हैं। व्यापार जिसमें मुनाफे के लिये कम तोलना, मिलावट का सामान बेचना, ग्राहक से सारे टैक्स लेना और कोई बिल ना देकर सारा सरकारी टैक्स भी हजम कर जाना सब जायज है |इससे ही मुनाफा कमाया जाता है |और व्यापार में मुनाफा ना होगा तो व्यापार कैसे करेंगें?

यहॉं सुबह से शाम तक काम करो तब कोई मुश्किल से घर का खर्च चलाने लायक पैसे देता हैऔर ये बैठे बिठाये लूट रहे हैं।ये बढिया व्यापार है। धरमू बोला।

ओर नही तो क्या पैसा ऐसे ही आता है। और तू क्या समझता है ये गाडी ये बगलें ये सोने के गहने मेहनत मजदूरी के पैसे से आते हैं? राजेन्दर ने कहा।

ना भैया हम तो घरवाली के लिये एक चॉदी का छल्ला भी नहीं खरीद सकते । धरमू ने जबाब दिया।

यही तो मैं कहता हॅं जयपाल बोला- यहॉं किसी को पेट भरने को नहीं मिलता और किसी को अपने गहनों के दिखावे का शौक चढा है। 

राजेन्दर ने कहने लगा भाई तुम्हारे पास गहने हैं तो हम गरीबों का दिल क्यूं जलाते हो? अपना सोना चॉंदी अपने घर पर रखो । 

हॉं यार राजेन्दर यहॉं तो जिसे देखो गहनों में लदी फदी दीखती है। धरमू ने कहा उस दिन मैं अपनी घरवाली को नौचन्दी घुमाने क्या ले गया तब से गहनों और साडियों की ही बात किये जा रही है। मैं बोला भागवान तू अच्छी नौचन्दी गयी, मुझे कई कई दिन मजदूरी नहीं मिलती  और तुझे जेवरात की पडी है। भैया उस दिन से ही घर में राड है।

ठीक कहते हो धरमू ये सबका हाल है रामसिंह ने कहा जिसकी खरीदने की हैसियत नहीं है उसे भी खरीदना पडता है। जब खरीद लिया तो पहनना भी पडता है।


 'फिर लुटना भी पडता है' राजेन्द्र ने कहा भैया राम सिंह जहॉं बेकारों  लोगों को रुजगार नहीं मिलता  हो, भूखों  को रोटी नहीं मिलती हो, बीमारों को दवा नहीं मिलती हो वहॉं अमीरी की  ऐसी भोंडी नुमायश? ये  गरीबों का उपहास करना नहीं तो क्या है ? उनकी लूट होनी ही चाहिये इसमें कुछ गलत नहीं है।थोडा बहुत लुट जाने से ये भूखे नहीं मर जायेंगें। 

धरमू बोला तुम जानते हो भैया तुम क्या कह रहे हो ? तुम ऐसी बात कहोगे तो पुलिस तुम्हें ही चैन लुटेरा बताकर चालान कर देगी। मैं तो चलता हूँ  मुझे तो बहुत डर लग रहा है।

भाग लिया साले डरपोक भाग जा। अभी तो कुछ किया ही नहीं अभी से डर गया। तुम सब ऐसे ही डरते रहो |राजेन्द्र उत्तेजित होकर भाषण देने की मुद्रा में आ गया -मजदूर हो ना ?डरते हो पुलिस पकडकर ले जायेगी बच्चे भूखे मर जायेंगें।  वो सामने वाला लाला तो नहीं डरता। तुम डरते हो| कोई तुम्हारा क्या छीन लेगा? क्या है तुम्हारे पास? एक डर ही तो है जिससे तुम चिपके हुये हो। जिस दिन ये डर तुम्हारे दिल  से निकल जायेगा उस दिन तुम जोर से चिल्लाआगे। जब तुम एक साथ जोर से चिल्लाओगे तो ये डर तुम्हारे अन्दर से निकलकर उनके अन्दर समा जायेगा जिनसे तुम डरते हो। इसलिये मैं कहता हूँ तुम  चीखो चिल्लाओ -जहां  सच ना चले वहॉं झूठ सही जहॉं हक ना मिल वहॉं लूट सही। जहॉं चोर हैं सब कोई साध नहीं हक छीनना कुछ अपराध नहीं।


राजेंदर अपनी मस्ती में गाने लगा |  उसका एक साथी बोला -ये तो आज बिना पिये ही मस्त हो गया |मैं तो चलता हूँ बच्चे की दवा ले जानी है |

द्सरा  बोला मैं भी चलता हूँ  किसी से उधार पैसे  लाऊंगा घर  में आटा  नहीं है | राजेंदर गाता रहा और सब एक एक कर अपनी राह  चलते  बने |

           शाम को जब अपने बचे हुये सेव बेचने के लिये ठेले वाला रामनगर कालोनी में पहुंचा तो उसने देखा एक बडे मकान के सामने लोग जमा हैं और जो बाबुजी दोपहर उससे सेव खरीदते हुये बाते कर रहे थे वो  रूऑंसे खडे हैं |लोग  उन्हें दिलासा दे रहे थे, होनी को कौन टाल सकता है शर्मा जी। बेचारी कितनी भली बहु थी। कालोनी में सबसे हॅंस कर बात करती थी। 

                हुआ ये कि शर्माजी जब सेव खरीदकर घर पहॅंचे तो उन्हें पता चला कि उनके छोटे पुत्र राजीव का एक्सीडेन्ट हो गया है और वो अस्पताल में भर्ती है। वे तुरन्त अस्पताल पहुचे। राजीव अपनी पत्नि के कारण कई साल से अपने मॉं बाप से अलग ही रहता था। अस्पताल पहॅंचकर पता चला कि राजीव तो होश में है लेकिन उसकी पत्नि की हैड इन्जरी से मौत हो गयी है।

जब ठेली वाला अपने  घर पर पहुंचा तो उसे  उसकी  पत्नी  आयशा  ने   बताया   कि उसका बेटा  इरफान  सुबह  से घर नहीं आया  है | उसके पड़ोस के  मजदूर राजेन्द्र बेटा भी घर पर  नहीं   था | सारी रात वो दोनों अपने बेटों के बारे में इधर उधर पूछताक्ष करते रहे | 

  
 अगले दिन सुबह अखबार में राजीव की पत्नि की मौत के साथ- साथ यह भी  खबर छपी कि एक चैन लुटेरा पुलिस ने भगते हुये मार गिराया जिसका  बूढा बाप  ठेला लगाकर अपने परिवार को पालता था। दूसरा लुटेरा सर्राफ की दुकान पर लूट के  जेवर बेचते हुये पकडा गया जो एक मजदूर का बेटा  था|  चोरी के जेवर खरीदने वाला सर्राफ भी पकडा गया लेकिन उसके समर्थन में व्यावार संघ ने बाजार बन्द करने की धमकी दी तो पुलिस प्रशासन बैकफुट पर आ गया और उसने सर्राफ को थाने से ही छोड दिया।

   यह आम चर्चा थी कि पुलिस को सर्राफा व्यापारी से अच्छी रकम मिल गयी, किन्तु दोनों गरीब नौजवानों के  परिवारों से जिनका लुटेरा होना भी सदिग्ध बताया गया है उन्हें पैसा नहीं मिला|  यह भी पता लगा है कि अपने प्रमोशन के लिए अपने अधिकारियों को खुश करने के लिए  एक दरोगा ने लूट की घटना को फर्जी तरीके से खोल दिया|  उसके प्रमोशन और पुरस्कार के लिये विभागीय अधिकारियों द्वारा संस्तुति कर दी गई है।          

                                                                                                    --अमर नाथ मधुर

       




1 टिप्पणी:

  1. Vinod Hauslewala Baagee कुल मिलकर एक सच्चा लेखन जिसमे जरा भी, झूठ का मिश्रण नहीं, एक आम इंसान की लाइफ....जवाब नहीं लेख का.
    22 hours ago · Unlike · 2

    Mragesh Jaiswal यही कानून है भैया एक
    भूखा आदमी 100 रूपये की लूट करे 90 रूपये
    कानून को चलाने वाले और खरीदने वाले
    ले ले और दस रूपये रखने
    वाला अपराधी कहलाये, जेल जाये।

    Badhiya....
    19 hours ago via mobile · Like

    Neer Gautam bilkul sach.....
    19 hours ago · Unlike · 1

    MaNish Kr YaDav I was absorbed during reading..... trully effective !
    19 hours ago · Unlike · 1

    Sanjay Dixit ह्रदयविदारक यही आज का सच है
    6 hours ago · Unlike · 1

    Suvek Kumar Prajapati Aaj kal ki kanoon ki yahi dasha hai...........
    9 hours ago · Like

    Suvek Kumar Prajapati Ek dum sahi likha hai....
    9 hours ago · Like

    Ashok Kumar Vartaman samaj ki arajak sthitiyon ka jiwant chitran .samajh nahi aata sudhar kaise ho.do char nahi karodon ke bich naitikata aur eemamdari ke sachchey amal ko kaun atmsat karaye-yah prashna hai ab.
    9 hours ago via mobile · Unlike · 1

    Faraz Ali जहां सच ना चले वहॉं झूठ सही जहॉं हक ना मिल वहॉं लूट सही। जहॉं चोर हैं सब कोई साध नहीं हक छीनना कुछ अपराध नहीं।................ बहुत ही बेहतरीन बात कही है....लाजवाब
    6 hours ago · Unlike · 1

    Anshu Som exatly true sr.its happens daily infront of our eyes and we never took any step. trully
    6 hours ago · Unlike · 2

    Siraj Faisal Khan ‎:-):-):-):-):-):-):-) Bahut sundar aur rochak kahani...badhayi...aapne apna keemti waqt kharch kar k ek badi aur umda kahani ko type kar k hum logo tak pahuchaya uske liye alag se dhanyawaad kehna chahunga...bahut umda.
    8 hours ago via mobile · Like · 1

    Ashok Rathod बहोत खूब.वाकई दिल को छु लेने वाली कहानी है....
    8 hours ago · Like · 1

    DrRakesh Srivastava Roj marra ki sacchi ghtnaaon ki kahaani . saral , jivan se judi , rochak , behtareen va sochne par baadya karne vaali .

    अमरनाथ मधुर _सभी मित्रों को कहानी की सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद | आपका एक एक शब्द मेरे लिये बड़े बड़े से पुरस्कार और सम्मान से ज्यादा कीमती है | मैं मूलत: कवि हूँ |लेकिन जब से नेट पर लिखने की सहूलियत मिली है साहित्य की हर विधा में हाथ आजमा रहा हूँ | कहानी लिखना मुझे बड़ा कठिन लगता है |बस हिम्मत करके जैसा जैसा देखता रहता हूँ वैसा वैसा जोड़कर लिखा |कहानी में कुछ भी घटाया बढ़ाया नहीं हैं सब सच घटनाएँ हैं | अभी तक इससे पहले एक कहानी 'समय नहीं है ' और लिखी थी जो जलेस मेरठ. ब्लागस्पाट.कॉम पर प्रकाशित है | एक बार फिर सभी दोस्तों का शुक्रिया |

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