शुक्रवार, 18 मई 2012

'गोरक्षा' रक्षा कैसे?



साम्प्रदायिक संगठनों का एक बड़ा मुद्दा है 'गोरक्षा' | रक्षा  कैसे? कोई गाय या बैल ले जा रहा है उसे रास्ते में रोक लो फिर शोर मचा दो ये गाय बैल काटने के लिए ले जा रहा है |बस या तो वो उन्हें ही हप्ता बाँध  देगा  नहीं तो पुलिस  वालों   को  ले  दे  के अपना  पीछा  छुडायेगा | अगर किसी कारण से ऐसा नहीं हो  पता है तो उसके पशु लूट लिए जाते है | उसके बाद गाय माता की कैसे सेवा होती है इसका हाल भी सुन लीजिये | पहले तो वो किसी कमजोर निर्धन ब्राह्मण के सर मढ़ने  की कौशिश की जाती है इस  हिदायत के साथ की वो इसे  बेचेगा नहीं | अब बूढ़ी गाय या ऐसी गाय जो बाँझ है जिसे उसके मालिक ने नहीं रखा  उसका पंडित जी क्या करेंगें ? उसे माताजी समझकर  उसके चरण दबायेंगें या  लुगाई बनाकर बिस्तर  पर सुलायेंगें ?  पंडित जी कुछ दिन तक उसे यूँ ही आवारा घूमने  के लिए छोड़ देंगें |शहर में जो गायें घूमती रहती हैं वो इसी  गौसेवा का सबूत हैं | भारत में सूअर और गाय के अलावा  कोई जानवर  आवारा घूमता नहीं दिखाई देता | ये गायें  आपको शहर में पोलीथीन  और सड़ी गली झूठन आदि खाती और भक्तों के डंडे खाती हुयी खूब दिखाईं देंगी | गाँव में ये किसानों की फसल उजाडती मिलेगीं |
खासतौर से सांड ऐसा करते दिखाई देंगें जिनसे किसान बड़े त्रस्त रहते हैं | जब शिकायतें ज्यादा आने लगती हैं तो पंडित जी उसे कसाई को बेच देते हैं |  सोचने की बात है जब तुमने उसका दूध पीकर बेकार हो जाने पर कसाई को बेच दिया तो दूसरा  उसका क्या  करेगा ? वो भी कसाई को बेच देता है | अब कसाई कोई पुजारी तो है नहीं जिसके खाने के लिए चढ़ावा आता हो उसकी तरफ से  बुड्ढा मरे या जवान उसे तो  हत्या से काम | वैसे ये बात भी ज्यादा सही  नहीं है | कोई कसाई २० किलो दूध की गाय या  भैंस भी नहीं काटता| वो तो उसे ही काटता है जिसे नकारा समझकर  उसके मालिक ने बेच दिया है | उसे खाता कोन है ? सब खाते हैं | लेकिन शोर मचाया जाएगा मुसलमानों ने गाय काट ली| या कहीं मीट ले जाते  पकड़ लिया तो कहेंगें ये गाय का मीट है | ये नहीं देखते की मुसलमान तो जमीन का गिद्ध है| जैसे गिद्ध प्रकृति का सफाई कर्मचारी है वैसे ही वो सड़े गले मांस तक को खाकर वो अपना पेट भर लेता है | अगर वो नहीं खाता तो  पता नहीं गाय माता की कितनी दुर्गति होती |
                             
 आखिर जब हम गाय को माता मानते हैं तो उसका ध्यान क्यों नहीं रखते ? क्या माँ को बुढापे  में सडकों पर डंडे खाने के लिए छोड़ देना चाहिए ? वैसे आधुनिक  सभ्यता    में ऐसा ही हो रहा है | मुसलमान बकरा  बकरी  खाते  हैं  उसे कितने  देखभाल   से पालते  हैं | बकरईद    के बकरे  को तो तमाम  तरह  के मेवा  खिलाये  जाते हैं |आखिर वो उनका  भोजन  है उसे अच्छा  क्यों न  खिलायेंगें?  वो बाद में  उनके    ही पेट में जाएगा | हम जो रोज  गाय की   हड्डियों  से दूध निचोड़कर   पीते  हैं, उसके साथ क्या बढ़िया बर्ताव करते हैं ? उससे  दूध लेने के बाद सडकों पर डंडें खाने के लिए खदेड़ देते हैं | अच्छा तो ये है कि पशुपालन  व्यावसायिक  तरीके से हो | उन्हें अच्छा चारा,रातब, दवाई  आदि समय  से मिले  तथा  बगैर  धार्मिक  भावना के उसके समुचित   उपयोग हो | लेकिन यहाँ तो सबसे  निठल्ले  और परजीवी  लोग  धर्म   का झंडा  उठाकर  हर  काम में अपनी नाक घुसेड देते हैं | फिर हर बात को अपनी नाक का सवाल  बनाकर  दंगें  पर उतारू  हो जाते हैं | दुनिया के बाकी देशों में किसी पशु के प्रति ऐसा भाव नहीं मिलता जैसा हमारे यहाँ गाय के प्रति मिलता है | मैं मांसाहार के समर्थन में यह सब नहीं कह रहा हूँ|  मैं मांसाहार नहीं करता, लेकिन उसे नापसंद भी नहीं करता | इसलिए मेरा कहने का मतलब  बस इतना है कि गाय हो या अन्य पशु उसे समुचित देखभाल के साथ पाला जाना चाहिए तथा  उसे पालने और खरीदने वाले को उसके मनमाफिक उपयोग का अधिकार होना चाहिए |

فرقہ پرست تنظیموں کا ایک بڑا مسئلہ ہے 'گوركشا' | حفاظت کیسے؟ کوئی گائے یا بیل لے جا رہا ہے اسے راستے میں روک لو پھر شور مچا دو یہ گائے بیل کاٹنے کے لئے لے جا رہا ہے | بس یا تو وہ انہیں ہی هپتا باندھ دے گا نہیں تو پولیس والوں کو لے دے کے اپنا پیچھا چھڈايےگا | اگر کسی وجہ سے ایسا نہیں ہو پتہ ہے تو اس کے جانوروں کی لوٹ لئے جاتے ہیں | اس کے بعد گائے ماتا کی کس طرح خدمت ہوتی ہے اس کا حال بھی سن لیجئے | پہلے تو وہ کسی کمزور غریب برہمن کے سر مڑھنے کی كوشش کی جاتی ہے اس ہدایت کے ساتھ کی وہ اسے بےچےگا نہیں | اب بوڑھی گائے یا ایسی گائے جو باجھ ہے جسے اس کے مالک نے نہیں رکھا اس کا پنڈت جی کیا کریں گے؟اسے ماتاجي سمجھ کر اس کے مرحلے دبايےگے یا لگاي بنا کر بستر پر سلايےگے؟پنڈت جی کچھ دن تک اسے یوں ہی آوارہ گھومنے کے لئے چھوڑ دےگے | شہر میں جو گائں گھومتی رہتی ہیں وہ اسی گوسےوا کا ثبوت ہیں | بھارت میں سور اور گائے کے علاوہ کوئی جانور آوارہ گھومتا نہیں دکھائی دیتا | یہ گائں آپ کو شہر میں پوليتھين اور سڑی گلی جھوٹھن وغیرہ کھاتی اور بھکتوں کے ڈنڈے کھاتی ہوئی خوب دكھاي دیں گی | گاؤں میں یہ کسانوں کی فصل اجاڈتي ملےگي |خاص طور سے ساڈ ایسا کرتے دکھائی دےگے جن سے کسان بڑے پریشان رہتے ہیں | جب شکایتیں مزید آنے لگتی ہیں تو پنڈت جی اسے كساي کو بیچ دیتے ہیں | سوچنے کی بات ہے جب تم نے اس کا دودھ پی کر بیکار ہو جانے پر كساي کو بیچ دیا تو دوسرا اس کا کیا کرے گا؟ وہ بھی كساي کو بیچ دیتا ہے | اب كساي کوئی پجاری تو ہے نہیں جس کے کھانے کے لئے چڑھاوا آتا ہو اس کی طرف سے بڈڈھا مرے یا جوان اسے تو قتل سے کام | ویسے یہ بات بھی مزید صحیح نہیں ہے | کوئی كساي 20 کلو دودھ کیگائے یا بھینس بھی نہیں کاٹتا | وہ تو اسے ہی کاٹتا ہے جسے انکار سمجھ کر اس کے مالک نے بیچ دیا ہے | اسے کھاتا کون ہے؟ سب کھاتے ہیں | لیکن شور مچایا جائے گا مسلمانوں نے گائے کاٹ لی | یا کہیں میٹ لے جاتے پکڑ لیا تو كهےگے یہ گائے کا گوشت ہے | یہ نہیں دیکھتے کی مسلمان تو زمین کا گددھ ہے | جیسے گددھ فطرت، قدرت کا صفائی ملازم ہے ویسے ہی وہ سڑے گلے گوشت تک کو کھا کر وہ اپنا پیٹ بھر لیتا ہے | اگر وہ نہیں کھاتا تو پتہ نہیں گائے ماتا کی کتنی حالت ہوتی |

                            
 
آخر جب ہم گائے کو ماتا مانتے ہیں تو اس کا خیال کیوں نہیں رکھتے؟ کیا ماں کو بڈھاپے میں سڑکوں پر ڈنڈے کھانے کے لئے چھوڑ دینا چاہئے؟ ویسے جدید تہذیب میں ایسا ہی ہو رہا ہے | مسلمان بکرا بکری کھاتے ہیں اسے کتنے دیکھ بھال سے پالتے ہیں | بكريد کے بکرے کو تو تمام طرح کے میوہ كھلايے جاتے ہیں | آخر وہ ان کا کھانا ہے اسے اچھا کیوں نہ كھلايےگے؟ وہ بعد میں ان کے ہی پیٹ میں جائے گا | ہم جو روز گائے کی ہڈیوں سے دودھ نچوڑكر پیتے ہیں، اس کے ساتھ کیا اچھا برتاؤ کرتے ہیں؟اس سے دودھ لینے کے بعد سڑکوں پر ڈڈے کھانے کے لئے كھدےڑ دیتے ہیں | اچھا تو یہ ہے کہ پشپالن کاروباری طریقے سے ہو | انہیں اچھا چارہ، راتب، دوائی وغیرہ وقت سے ملے اور بغیر مذہبی جذبات کے اس کے مناسب استعمال ہو | لیکن یہاں تو سب سے نٹھللے اور پرجيوي لوگ مذہب کا پرچم اٹھا کر ہر کام میں اپنی ناک گھسیڈ دیتے ہیں | پھر ہر بات کو اپنی ناک کا سوال بنا کر دگے پر آمادہ ہو جاتے ہیں | دنیا کے باقی ممالک میں کسی جانور کے فی ایسا احساس نہیں ملتا جو ہم یہاں گائے کے فی ملتا ہے | میں ماساهار کی حمایت میں یہ سب نہیں کہہ رہا ہوں | میں ماساهار نہیں کرتا، لیکن اسے ناپسند بھی نہیں کرتا | اس لئے میرا کہنے کا مطلب بس اتنا ہے کہ گائے ہو یا دیگر جانوروں اسے مناسب دیکھ بھال کے ساتھ پالا جانا چاہئے اور اسے پالنے اور خریدنے والے کو اس کے مرضی کے مطابق استعمال کا حق ہونا چاہیے |

3 टिप्‍पणियां:

  1. 1-म्रगेश जैसवाल बढ़िया
    आँखें खोल देने वाला लेख ....


    2-डंडा लखनवी - एक निःपक्ष विवेचन ...
    Girijesh Tiwari, भूपट शूट and Nilakshi Singh like this.
    3-भूपट शूट लोकतंत्र पर खड़े पूंजीवाद में पशुधन के अस्तित्व पर ही संकट हैं. पूंजीवाद स्वतन्त्र बाजार कि शक्तियों के अधीन चलता हैं तथा इससे व्यक्ति निरपेक्ष स्वतंत्रता के कारण तथा धर्म व संस्कृति के अभाव में सामाजिक, आर्थिक व राजनेतिक परिवेशिकी के अधीन नहीं रह पता हैं, परिणामस्वरूप वो लालची, धनलोलुप, अयाश, घमंडी, अहंकारी तथा माया के मोह में उल्जता हैं तथा समाज को पतन कि तरफ़ धकेल देता हैं. अतः हम पूंजीवाद के विकल्प बिना अपने नैसर्गिका व प्रकति प्रदत मानव मूल्यों कि रक्षा नहीं कर सकते. क्या हम गाय व उसके उत्पाद का उपयोग करने में इन परिस्थितियों के रहते कामयाब हों सकते हैं? हाँ विस्तार व गहराई में चिंतन करने से पहले यह जरुर सोचे कि दूध, मख्खन, घी, पनीर, मावे में आखिर केसे मिलावट रुकेगी ? सनद रहें कि मट्ठा(छाछ), दही आदि कि गुणवता का भी क्या हाल हैं ! क्या मात्र राज्य एकांकी रूप से दोषी हें? आखिर समाज कि वो कोनसी शक्तिया, संगठन व आधार हैं जो हमारी इन समस्यायों का समाधान करने व विकल्प देने के लिये माध्यम व वाहक बन सकती हैं?
    12 hours ago · Like · 2
    4- अमरनाथ 'मधुर'-अगर कोई वस्तु प्रचुर मात्र में उत्पादित होती है तो उसमें मिलावट की संभावना कम रहती है | पशु धन की समुचित देखभाल कीजिये पशु उत्पाद भरपूर लीजिये |
    12 hours ago · Like
    5-भूपट शूट पशु धन की समुचित देखभाल केसे करे जब हमारे देश की गाय की नस्ले ही दुध कम देती हैं? बकरी से जुड़ा अर्थतंत्र अलग किस्म का हैं.
    10 hours ago · Like

    6- अमरनाथ 'मधुर'-गाय हो या कोयो एनी जीव उसकी उत्पादकता तभी कम होती है जब उसे यथेष्ट पोष्टिक आहार नहीं मिलता है |कई पीढी तक ऐसा होने पर उसकी नस्ल ही खराब हो जाती है फिर उसे विशेष प्रयास अर्थात संकर नस्ल से ही जल्द सुधार ja सकता है |संकर नस्ल को भी अगर आहार नहीं मिलाता है तो उसकी भी नस्ल खराब होने लगती है |अब तो देशी गायें कम हैं उन्नत nsl की ही गायें हैं , वही सबसे ज्यादा बाँझ रहती हैं |उन्हीं बाँझ गायों को कसे i काटते हैं | पशु हो या इंसान उसे सही खुराक मिलनी ही चाहिए नहीं तो उसकी उत्पादकता, क्षमता प्रभावित होगी |

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  2. 7-Khushi Zeya and 2 others like this.
    Mohammad Sheeraz Anwar shame shame shame.....kuch logo ki maa yaha khana talash kr rhi hai aur beto ka pata nhi...?
    7 hours ago via mobile · Like

    8-Gitian Jawed Alam Bhains (buffalo) to cow se jyada dudh deti h to tumlog usko NANI Kyo nahi kahte.ek baat aur cow ka gosht khana hamare islam me jayaj h,aur ham apni sunnat ko chod nahi sakte.
    2 hours ago via mobile · Like

    9-Yogesh Sharma ‎Gitian Jawed Alam saale tu to apni maa ka bhi gosht kha jaye, maraa hua insaan tere liye gosht he hai,
    about an hour ago · Like

    10-Amarnath Madhur जिनको गौमाता में श्राद्ध है या जिनको गाय का मांस खाने में पसंद है वो थोडा गाय की देखभाल भी करें |मुस्लिम भाई बकरे को चने मुनक्के और न जाने क्या अच्छी चीज खिलाते हैं उसे साबुन से नहलाते हैं ब्रुश करते हैं गाय का भी वैसे ही पालन करें इससे गाय की रक्षा के नाम पर हो हल्ला करने वालों को भी कुछ शर्म आये की हम माँ को सड़क पर खदेड़ रहें है और उसको खाने वाले कितनी अच्छी तरह रख रहें हैं |

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  3. आशीष दुबे
    सवाल गौ हत्या कैसे रोकी जाये क्या ये संभव है इसका जवाब इन सवालो मै है इन सवालो का जवाब खोज लिया जाये तो गौ हत्या मे विराम लग जायेगा ?

    १.गौ हत्या की असली वजह पैसा है , जो गौ मांस की बिक्री , और चमडे की बिक्री से मिलता है जाहिर है हर देश के लोग गौ हत्या कर के ही चमडे और मांस मे पैसा नहीं कमा रहे होगे गौ हत्या बंद करने से होने वाले नुक्सान की भरपाई के लिए किस जानवर को विकल्प बनाया जाये....सूअर , गधे , घोडे , ऊंट , भैंस के बारे मे क्या राय है?

    २. देश मे इतने सारे बुचड खाने है सब को बंद कर के नई गौ शाला बनाना बड़ा मुशकिल होगा अच्छा होगा इन बुचड खानों को गौ शाला मे तब्दील किया जाये
    और इसे होने वाले मुनाफे को उनलोगों को दे दिया जाये जो इसकाम को करेगे जब लोगो को इसमे मुनाफा होगा लोग खुद बुचड खाने बंद कर गौ शाला खोलने लगेगे|
    बायो गैस प्लांट , बिजली और गैस का अच्छा विकल्प है| गौ शाला मे इसके निर्माण से मांस की बिक्री , और चमडे की बिक्री से होने वाले मुनाफे से आगे निकल जायेगा| इसके अलावा दूध , घी , मक्खन , खाद , सब फ्री मे मिलेगा इसे आमदनी बढेगी|

    ३.गौ हत्या बंद होने से मवेशियो की आबादी भी बढेगी| प्राकृतिक मौत मरने वाले मवेशियो या जो शारीरिक रूप से अशक्षम है उनका उपयोग भी करना होगा |इनको फियुल के रूप मे इस्तमाल किया जा सकता है जब 2050 मे सउदी अरब फियुल खत्म हो जयेगा तो भी भरत के पास एक विकल्प होगा इस प्रोजेक्ट के बारे मे सोचना चाहिए|

    ४.बहुत से ऐसे लोग है| देश मे जो नाम कमाना चाहते है मरने से पहले जिनके पास पैसो की कोई कमी नहीं है| इनकी मदत भी ली जनि चाहिए| किसी धर्म के द्वारा दिए गए सम्मान के लिए ऐसे बहुत लोग मिल जायेगे जो गौ हत्या रोकने के लिए पैसे लगायेगे|

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