चमन वालों के चहरे बेसबब ही तमतमाए थे,
चमन में जैसे-तैसे हम बहारें ले के आए थे.
हमारे ज़ख़्म को मरहम मिला न ग़म को दो आंसू,
तुम्हारे शहर में तो हम बड़ी हसरत से आए थे .
वो दिल पे चोट करना जनता था इसलिए उसने,
उन्हीं पौधों के सर काटे जो मैने खुद लगाये थे.
गिला सुनकर तुम्हारा तो हमारी आँख भर आईं,
जो तुमसे थीं हमें, हम वो शिकायत ले के आए थे.
न जाने आपके माथे पे क्यों ये बल उभर आए ,
कि हम मुश्किल से पत्थर दिल पे रखकर मुस्कुराए थे.
दिवाना मैं था तुम तो आदमी थे यूँ ही समझाते,
मुझे तुम क़ैद करने के लिए ज़ंजीर लाये थे ?
गो तपती रेत, नंगे पाँव भी किस्मत का हिस्सा है,
कभी वो दिन थे जब मासूम सी पलकों के साए थे.
- मासूम गाज़ियाबादी
چمن میں جیسے - تیسے ہم بهارے لے کے آئے تھے.
ہمارے زخم کو مرہم ملا نہ غم کو دو آنسو،
تمہارے شہر میں تو ہم بڑی حسرت سے آئے تھے.
وہ دل پہ چوٹ کرنا عوام تھا اس لیے اس نے،
انہی پودوں کے سر کاٹے جو میں نے خود لگائے تھے.
گلہ سن کر تمہارا تو ہماری آنکھیں بھر آئیں،
جو تم سے تھیں ہمیں، ہم وہ شکایت لے کے آئے تھے.
نہ جانے آپ کے ماتھے پہ کیوں یہ فورس ابھر آئے،
کہ ہم مشکل سے پتھر دل پہ رکھ کر مسکرائے تھے.
دوانا میں تھا تم تو آدمی تھے یوں ہی سمجھاتے،
مجھے تم قید کرنے کے لئے زنجیر لائے تھے؟
گو تپتی ریت، ننگے پاؤں بھی قسمت کا حصہ ہے،
کبھی وہ دن تھے جب معصوم سی پلکوں کے سائے تھے.
معصوم گاذيابادي

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