ज़माना है कि क्या-क्या बोलता है
मेरे होंठों का ताला बोलता है |
ज़ुबां पे कुछ है दिल में कुछ है उसके
वो क्या सोचे है और क्या बोलता है|
खिलौनें अब नहीं बन्दूक लूँगा
नयी नस्लों का बच्चा बोलता है |
मैं सारी रात आँखों में बिताकर,
जो सोता हूँ तो मुर्गा बोलता है|
बुजुर्गों कि दुआएं साथ रखना,
कुछ इनका भी तजुर्बा बोलता है|
ज़ुबां तो काट दी है उसकी' बेदिल'
वो गूँगा होके सच्चा बोलता है|
कृष्ण कुमार 'बेदिल' کرشن کمار بےدل
मेरे होंठों का ताला बोलता है |
ज़ुबां पे कुछ है दिल में कुछ है उसके
वो क्या सोचे है और क्या बोलता है|
खिलौनें अब नहीं बन्दूक लूँगा
नयी नस्लों का बच्चा बोलता है |
मैं सारी रात आँखों में बिताकर,
जो सोता हूँ तो मुर्गा बोलता है|
बुजुर्गों कि दुआएं साथ रखना,
कुछ इनका भी तजुर्बा बोलता है|
ज़ुबां तो काट दी है उसकी' बेदिल'
वो गूँगा होके सच्चा बोलता है|
कृष्ण कुमार 'बेदिल' کرشن کمار بےدل
زمانہ ہے کہ کیا - کیا بولتا ہے
میرے ہونٹوں کا تالا بولتا ہے
ذبا پہ کچھ ہے دل میں کچھ ہے اس کے
وہ کیا سوچے ہے اور کیا بولتا ہے
كھلونے اب نہیں بندوق لوں گا
نئی نسلوں کا بچہ بولتا ہے
میں ساری رات آنکھوں میں بتا کر،
جو سوتا ہوں تو مرغا بولتا ہے
بزرگوں کہ دعائیں ساتھ رکھنا،
کچھ ان کا بھی تجربہ بولتا ہے
ذبا تو کاٹ دی ہے اس کی 'بےدل'
وہ گگا ہوکے سچا بولتا ہے
میرے ہونٹوں کا تالا بولتا ہے
ذبا پہ کچھ ہے دل میں کچھ ہے اس کے
وہ کیا سوچے ہے اور کیا بولتا ہے
كھلونے اب نہیں بندوق لوں گا
نئی نسلوں کا بچہ بولتا ہے
میں ساری رات آنکھوں میں بتا کر،
جو سوتا ہوں تو مرغا بولتا ہے
بزرگوں کہ دعائیں ساتھ رکھنا،
کچھ ان کا بھی تجربہ بولتا ہے
ذبا تو کاٹ دی ہے اس کی 'بےدل'
وہ گگا ہوکے سچا بولتا ہے
0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें